न्यूनतम समर्थन मूल्य : अब पंजाब के किसानों को समय पर मिलेगा भुगतान

न्यूनतम समर्थन मूल्य  : अब पंजाब के किसानों को समय पर मिलेगा भुगतान

Posted On - 07 Apr 2021

आरबीआई ने जारी की 21658.73 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट, 10 अप्रैल से खरीद शुरू

पंजाब में 10 अप्रैल से रबी फसल की खरीद शुरू होनी है। इसे देखते हुए राज्य की मांग पर केंद्र सरकार के निर्देशानुसार आरबीआई ने रबी सीजन के भुगतान में सहायता देने के उद्देश्य से 21658.73 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट जारी कर दी है। अब किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रबी फसल विक्रय का भुगतान समय पर किया जा सकेगा। मीडिया से मिली जानकारी हवाले से रिजर्व बैंक आफ इंडिया की तरफ से सोमवार को पंजाब में रबी मंडीकरण सीजन के लिए मौजूदा अप्रैल के अंत तक के लिए 21658.73 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमट (सी.सी.एल.) की हरी झंडी दे दी गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार की तरफ से इस सीजन के लिए 105.60 लाख टन गेहूं की खरीद संबंधी मांगी गई सी.सी.एल.का बड़ा हिस्सा केंद्रीय बैंक द्वारा जारी कर दिया गया है।

 

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अनाज खरीद सीजन 31 मई को होगा खत्म

एक सरकारी प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि जारी की सी.सी.एल. राज्य सरकार को मौजूदा सीजन जो 10 अप्रैल को शुरू होकर 31 मई को खत्म होगा, के दौरान किसानों को अनाज की खरीद के बदले समय पर अदायगियां करने में सहायक होगी। इसी दौरान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने खाद्य और सिविल सप्लाई विभाग को निर्देश दिए हैं कि कोविड-19 महामारी के चलते अनाज की खरीद के लिए किसानों को कोई परेशानी न आए।

 


राज्य में इस बार 130 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य

गेहूं उत्पादक राज्यों में पंजाब भी प्रमुख राज्य माना जाता है। यहां इस साल 130 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। राज्य में 10 अप्रैल से रबी फसलों की खरीदी की जाएगी और 31 मई तक खरीद होगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने इस रबी सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) 1975 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जो कि पिछले साल (1925 प्रति क्विंटल) की अपेक्षा 50 रुपए अधिक है।

 


फसल खरीद भुगतान को लेकर केंद्र सरकार, किसान एवं आढ़तियों के बीच ये रहा विवाद

रबी फसल के भुगतान को लेकर केंद्र सरकार से किसान एवं आढ़तियों के बीच विवाद रहा है। केंद्र सरकार अन्य राज्यों की तरह पंजाब में भी फसल बिक्री का भुगतान सीधा किसानों के खाते में देना चाहती थी। इसे लेकर किसान तो खुश थे मगर आढ़तिये खुश नहीं थे। वे चाहते थे कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की फसल खरीद का भुगतान किया जाए। बता दें कि आढ़तियों के माध्यम से किसान को फसल का भुगतान करने पर आढ़तियों को कमीशन मिलता है। और वे कभी नहीं चाहते कि उनका हिस्सा मारा जाए या उनकी भूमिका को खतम किया जाए। वहीं कुछ किसान ऐसे भी जो खुद सीधा भुगतान अपने खातों में नहीं लेना चाहते बल्कि आढ़तियों के माध्यम से भुगतान लेना पसंद करते हैं इसके पीछे उनका तर्क है कि किसान को फसल बुवाई से लेकर तैयार होने तक रुपयों की जरूरत पड़ती है। इस बीच आढ़तियों से ही वे कई बार अग्रिम राशि ले आते हैं और फसल विक्रय होने पर जब भुगतान प्राप्त होता है तब उसमें से उसे लौटा देते हैं। इस तरह छोटे किसानों को आढ़तियों के माध्यम से जरूरत पर मिल जाता है। वहीं सरकारी भुगतान मेें देरी से होता है।

 


पंजाब में किसानों और आढ़तियों के संबंध बहुत पुराने : सीएम

मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से सोमवार को पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी, लुधियाना द्वारा करवाए जा रहे दो दिवसीय किसान मेले का वर्चुअल उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र की आलोचना करते हुए किसानों और आढ़तियों के लिए अपने समर्थन को दोहराया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा ज़बरन कृषि कानून लागू करने और राज्य की किसानी पर सीधी अदायगी जैसे एकतरफ़ा फ़ैसले थोपने के लिए भी केंद्र को आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब के किसानों और आढ़तियों के संबंध बहुत पुराने हैं जिनको केंद्र सरकार खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा अपनाए जा रहे कड़े रूख और तर्कहीन फैसलों को संघवाद की मूल भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने आगे कहा कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान पंजाब से संबंधित किसी भी नीतिगत फैसले /विकास प्रमुख मुद्दे संबंधी उनको पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह का पूरा विश्वास और समर्थन हासिल था।


गेहूं व धान के चक्र से निकलें किसान, बूंद-बूंद सिंचाई अपनाएं

पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी, लुधियाना द्वारा करवाए जा रहे दो दिवसीय किसान मेले का वर्चुअल उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने सतही (नहरी) और भूजल के घटते स्तर की समस्या पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि किसानों को बड़े स्तर पर बूंद सिंचाई प्रणाली अपनाने को अपनाना चाहिए जिससे राज्य को भविष्य में मरूस्थल बनने से बचाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि घटते जा रहे पानी के स्तर, जिसका कारण पिघल रहे ग्लेशियर हैं, ने राज्य के सामने बड़ी चुनौती पेश की है जिसका एकमात्र समाधान धान और गेहूं के चक्कर में से निकलना है जिससे पानी जैसी कीमती रहमत बचायी जा सके।

मुख्यमंत्री ने किसानों को बूंद सिंचाई तकनीक के अलावा पानी के कम उपभोग वाली फसलों जैसे कि सब्जियों और फलों आदि की तरफ ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि बागबानी फसलों को अपनाने की कोशिशें करनी चाहिए हैं क्योंकि इनकी विश्व मंडी में फायदे की बड़ी संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने आने वाली नस्लों के लिए पानी बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इसकी संभाल करना हर पंजाबी का नेक फर्ज बनता है। पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी की तरफ से इस अनमोल संसाधन की महत्ता को सराहा गया है। उन्होंने बूंद सिंचाई संबंधी अपने तजुर्बे भी सांझे किये जो उन्होंने इजराइल के दौरे के दौरान हासिल किये थे जहां पौधे लगाने के अलावा नीबू जाति के फलों की काश्त बूंद सिंचाई के साथ की जाती है।

 

 

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