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न्यूनतम समर्थन मूल्य : मूंग उपार्जन का लक्ष्य 5 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की मांग

न्यूनतम समर्थन मूल्य : मूंग उपार्जन का लक्ष्य 5 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की मांग

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद : लाखों किसानों को होगा फायदा

इन दिनों मध्यप्रदेश में मूंग की खरीदी चल रही है। मूंग की सरकारी खरीद को लेकर किसान खासे उत्साहित हैं और इसके लिए प्रदेश के 2 लाख 32 हजार किसानों ने मूंग की फसल बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। सर्वाधिक पंजीयन कराने वाले जिलों में पांच जिले शामिल हैं, जिनमें होशंगाबाद, हरदा, नरसिंहपुर, सीहोर और जबलपुर हैं। खरीद केंद्रों पर 7,196 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद की जा रही है। इससे मूंग उत्पादन करने वाले किसानों को लाभ हो रहा है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर से मुलाकात कर किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित प्रावधान के अनुसार खरीदी करने के लिए प्रदेश के प्रस्ताव के अनुसार संशोधित लक्ष्य जारी करने का आग्रह करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए दलहन के क्षेत्र में वृद्धि तथा कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए यह आवश्यक है कि मूंग का उपार्जन लक्ष्य 5 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया जाए। बता दें कि मध्यप्रदेश में इस वर्ष 4.77 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की बोवनी की गई है, जिससे 6.56 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन होना संभावित है। इसके अलावा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिले और प्रदेश की स्थिति से अवगत कराया।

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चमकविहीन गेहूं का उठाव करवाने की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री पीयूष गोयल से प्रदेश में इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर की कठिन परिस्थिति में किसानों के चमकविहीन गेहूं का उठाव करवाए जाने की मांग की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी प्रदेश में 128.16 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है और इसका पूरा श्रेय किसानों को जाता है। श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई असमय वर्षा के कारण प्रदेश के 26 जिलों में गेहूं की चमक विहीनता की स्थिति उत्पन्न हुई है, लेकिन उसकी पौष्टिकता और गुणवत्ता बरकरार है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने 10 प्रतिशत तक चमकविहीन गेहूं का उपार्जन करने की अनुमति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि राज्य में असमय वर्षा के कारण चमकविहीनता का प्रतिशत 10 से लेकर 80 प्रतिशत तक हो गया, जिसका उपार्जन किसानों के हित में किया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि केन्द्र सरकार भारतीय खाद्य निगम द्वारा 80 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उठाव शीघ्रातिशीघ्र कराये, जिससे भण्डारण की समस्या उत्पन्न न हो।


डीएपी की समस्या से अवगत कराया, 25 जून तक डीएपी आवंटन की मांग

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री डी.वी. सदानन्द गौड़ा को राज्य में डी.ए.पी. की समस्या से अवगत कराया और आग्रह किया कि 3.46 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. तथा 3.84 लाख मीट्रिक टन यूरिया का संशोधित आवंटन शीघ्र जारी किया जाए। साथ ही 25 जून तक डी.ए.पी. अनिवार्यत: राज्य को प्रदाय करवाएं।


राज्यों को बाजार से ऋण लेने की छूट को साढ़े प्रतिशत रखा जाए

मुख्यमंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बताया कि पिछले साल जी.डी.पी. का साढ़े 5 प्रतिशत राज्यों को बाजार से ऋण लेने की छूट थी। मुख्यमंत्री चौहान ने आग्रह किया कि इसी छूट को चालू वर्ष में रखा जाए। बता दें कि केंद्र सरकार ने छूट को साढ़े 5 से घटाकर साढ़े 4 प्रतिशत कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद सभी को दीवाली (नवंबर) तक निशुल्क राशन प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में दिया जाएगा।

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सुगंधित फसलों की खेती से किसानों की होगी कमाई

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोंडागांव जिले में सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत की ‘सुगंधित कोंडानार‘ (एरोमेटिक कोंडानार) परियोजना का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस परियोजना में कोंडागांव जिले में 2 हजार एकड़ भूमि पर सुगंधित फसलों की खेती की जाएगी। इस परियोजना के तहत किसानों के समूह एरोमा हब द्वारा सुगंधित फसलों की सात प्रजातियों लेमन ग्रास, पामारोजा, पचौली, मुनगा, अमाड़ी, वैटीवर, तुलसी की खेती की जाएगी। इन सुगंधित फसलों के बीच काजू, नारियल, लीची, कस्टर्ड सेब इंटरक्राप पेटर्न में उगाया जाएगा। सुगंधित फसलों के प्रसंस्करण से एसेंशियन ऑयल तैयार करने के लिए प्रसंस्करण यूनिट कोंडागांव में लगाई जाएगी। इसके लिए सन फ्लेक एग्रो प्रायवेट लिमिटेड और कोंडागांव जिला प्रशासन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस प्रसंस्करण प्लांट की क्षमता 5 हजार मेट्रिक टन होगी, जिसमें 250 लोगों को रोजगार मिलेगा। इस परियोजना से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ सालाना लगभग एक लाख रुपए की आमदनी होगी। 


20 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान

इस परियोजना के लिए चिन्हित की गई भूमि में वन विभाग की 1 हजार 575 एकड़ जमीन और 425 एकड़ भूमि व्यक्तिगत जमीन शामिल है। सुगंधित फसलों की कृषि के तहत 200 परिवार प्रत्यक्ष रूप से और 750 परिवार परोक्ष रूप से लाभांवित होंगे। परियोजना में पहले ही वर्ष में 20 करोड़ रुपए की आय अनुमानित है और बाद के वर्षों में इसमें निरंतर बढ़ोतरी भी होती जाएगी। 

 

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