Man left his government job and became farmer ,now he is earning 1.5- 2 crore per year.

Man left his government job and became farmer ,now he is earning 1.5- 2 crore per year.

16 November, 2016

He had government jobs, but he was not satisfied with it. He belongs to a family of farmers, and some wanted to step aside. Once an agricultural exhibition held in Delhi, where he happened to visit and changed his life. He resigned from his job and his 120-acre farm ie Aloe vera and other crops has started.

Yes, we are talking about the annual income from the farms which Dhanadeva Harish date is between one and a half to two million. Harish, 45 km from Jaisalmer Dhisr his company Agro Nechurlo 'is launched. The Thar desert are large amounts of aloe vera Prodekts Ptnjli food is sent to the juice that is created.

The quality of Aloe Vera in the desert is so great that it is extremely demanding national and international markets. Aloe Vera grown in the State of Ptnjli experts found the quality so good that he gave orders immediately for its leaves. Farming resign from job to start this adventure Dhanadeva decision pleasant results.

Dhanadeva indicate he got a job as junior engineer in Jaisalmer City Council, but his heart was always something to do and keeps playing in. So he resigned from government service. He wanted to do something new. Last year he arrived in Delhi where they see an agricultural exhibition vera, amla and marigold cultivation idea. Usually in the desert millet, wheat, moong and mustard grown but he wanted to grow something new. 120 acres of aloe vera in his Baby put Densis species. Aloe Vera This species is so great that Brazil, Hong Kong and the US, in countries like the big demand. Aloe vera, which he initially planted today than seven lakh 80 thousand have. He points out that in the last four months of the Haridwar factory Ptnjli 125 150 tonnes of aloe vera leaves are processed Mude Qi sent. It also points out that the processing of aloe vera leaves Dhanadeva art system is through a plant for which he has established.

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गेहूं की अगेती खेती : इन किस्मों की करें बुवाई, होगा भरपूर फायदा

गेहूं की अगेती खेती : इन किस्मों की करें बुवाई, होगा भरपूर फायदा

जानें, कौनसी अगेती किस्म की करें बुवाई और क्या रखें सावधानियां? यह समय गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है। इस समय किसान इन किस्मों की बुवाई करके अच्छा उत्पादन कर भरपूर मुनाफा कमा सकता है। किसान को अगेेती किस्म की बुवाई करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिल सके। अगेती किस्म की बुवाई के संदर्भ में कृषि विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां बताईं हैं और इसी आधार पर इन किस्मों को तीन चरणों में बांटा गया है। इसी के साथ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगेती किस्म की बुवाई करते समय बीजों करना बेहद आवश्यक है। आइए जानते हैं कि आप किस तरह कुछ सावधानियां रखते हुए अगेती किस्मों की बुवाई कर अच्छा लाभ कमा सकते हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 अगेती गेहूं की किस्मों की बुवाई के समय का विभाजन कृषि विशेषज्ञों ने अगेती गेहूं की किस्मों के आधार पर इनकी बुवाई के समय को तीन चरणों में बांटा है। इसका पहला चरण 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक रखा गया है। दूसरा चरण 11 नवंबर से 25 नवंबर तक का है। वहीं तीसरा चरण 26 नवंबर से 25 दिसंबर तक का रहेगा। यानि गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई किसान 25 अक्टूबर से लेकर 25 दिसंबर तक कर सकता है, लेकिन उसमें उसे हर चरण के अनुरूप खाद की मात्रा व बीज को उपचारित करने पर विशेष ध्यान रखना होगा। चरणों के अनुसार गेहूं की अगेती किस्में पहला चरण- (25 अक्टूबर से 10 नवंबर) के लिए अगेती गेहूं की किस्मों में एचडी 2967, डब्ल्यूएच 542, यूपी 2338, एचडी 2687, डब्लयूएच 1105 और देसी गेहूं सी-306 किस्में अच्छी है। दूसरा चरण- (11 नवंबर से 25 नवंबर) के लिए डब्ल्यूएच 542, डब्ल्यूएच 711, डब्ल्यूएच 283, डब्ल्यूएच 416 किस्मों की बुवाई की जा सकती है। तीसरा चरण- (25 नवंबर से 25 दिसंबर) के लिए पछेती किस्म एचडी 2851, यूपी 2338, आरएजे 3765, पीबीडब्ल्यू 373, आरएजे 3077 की बुवाई कर सकते हैं। इस समय किसान पहले चरण की बुवाई कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पहले चरण की किस्मों का चयन कर सकते हैं। गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान गेहूं की बुवाई के लिए तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। गेहूं की बुवाई के समय मिट्टी में नमी होना बेहद जरूरी है। इसके लिए खेत की अच्छे से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। गेहूं की बुवाई करने से 15-20 दिन पहले खेत तैयार करते समय 4-6 टन/एकड़ की दर से गोबर की खाद का खेत में डाल देनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ जाती है। गेहूं की बुवाई हैप्पी सीडर और सुपर सीडर की सहायता से करनी चाहिए जिससे बीज को सही मात्रा में उचित गहराई पर छोड़ा जा सके। ऐसा करने से अंकुरण अच्छा होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पहले दो चरणों में 40 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की बुवाई करना चाहिए। वहीं तीसरे चरण में 50 से 60 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की बुवाई की जा सकती है। रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीजों को 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बावास्टीन और बीटावैक्स से उपचारित करना चाहिए। वहीं दीमक से बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफॉस 1.5 मिली, प्रति किलोग्राम से बीज को उपचारित किया जाना चाहिए। गेहूं की अगेती फसल की कब - कब करें सिंचाई गेहूं की खेती में सिंचाई प्रबंधन है जरूरी अधिक उपज के लिए गेहूं की फसल को पांच-छह सिंचाई की जरूरत होती है। पानी की उपलब्धता, मिट्टी के प्रकार और पौधों की आवश्यकता के हिसाब से सिंचाई करनी चाहिए। गेहूं की फसल के जीवन चक्र में तीन अवस्थाएं जैसे चंदेरी जड़ निकलना (21 दिन), पहली गांठ बनना (65 दिन) और दाना बनना (85 दिन) ऐसी हैं, जिन पर सिंचाई करना अति आवश्यक है। यदि सिंचाई के लिए जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो पहली सिंचाई 21 दिन पर इसके बाद 20 दिन के अंतराल पर अन्य पांच सिंचाई करें। वहीं पानी की बचत के लिए फव्वारा विधि या टपका विधि का प्रयोग करें। सिंचाई की इन तकनीकों पर केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी के रूप में अनुदान भी दिया जाता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए ये करें उपाय खरपतवार प्रबंधन गेहूं की फसल में संकरी पत्ती (मंडूसी/कनकी/गुल्ली डंडा, जंगली जई, लोमड़ घास) वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए क्लोडिनाफॉप 15 डब्ल्यूपी 160 ग्राम या फिनोक्साडेन 5 ईसी 400 मिलीलीटर या फिनोक्साप्रॉप 10 ईसी 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर प्रयोग करें। यदि चौड़ी पत्ती (बथुआ, खरबाथु, जंगली पालक, मैना, मैथा, सोंचल/मालवा, मकोय, हिरनखुरी, कंडाई, कृष्णनील, प्याजी, चटरी-मटरी) वाले खरपतवारों की समस्या हो तो मेटसल्फ्यूरॉन 20 डब्ल्यूपी 8 ग्राम या कारफेन्ट्राजोन 40 डब्ल्यूडीजी 20 ग्राम या 2,4 डी 38 ईसी 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। सभी खरपतवारनाशी/शाकनाशी का छिडक़ाव बीजाई के 30-35 दिन बाद 120-150 लीटर पानी में घोल बनाकर फ्लैट फैन नोजल से करें। मिश्रित खरपतवारों की समस्या होने पर संकरी पत्ती शाकनाशी के प्रयोग उपरान्त चौड़ी पत्ती शाकनाशी का छिडक़ाव करें। बहुशाकनाशी प्रतिरोधी कनकी के नियंत्रण के लिए पायरोक्सासल्फोन 85 डब्ल्यूडीजी 60 ग्राम/एकड़ को बीजाई के तुरंत बाद प्रयोग करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

राज्य सरकार ने 19 जनपदों के किसानों को दिया फसल नुकसान का मुआवजा

राज्य सरकार ने 19 जनपदों के किसानों को दिया फसल नुकसान का मुआवजा

उत्तरप्रदेश में बाढ़ प्रभावित 3.48 लाख से अधिक किसानों को मिला 113.20 करोड़ रुपए का मुआवजा देश में इस वर्ष कई राज्यों में भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई थी। इससे किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। कई इलाकों में तो बाढ़ से किसान की पूरी की पूरी फसल तबाह हो गई थी। इसको लेकर राज्य की सरकारों ने अपने-अपने राज्यों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन कराया था। इसके बाद भी इन राज्यों के किसानों को अभी तक बाढ़ से हुए फसल नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है जिसका उन्हें इंतजार है। वहीं उत्तरप्रदेश की सरकार ने राज्य के बाढ़ प्रभावित किसानों को सहायता राशि दे दी है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित 3.48 लाख से अधिक किसानों को 113.20 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 राज्य के 19 जनपदों को दिया फसल नुकसानी का मुआवजा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने राज्य के 19 जनपदों के किसानों को सहायता राशि का वितरण किया। मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर बाढ़ से प्रभावित 19 जनपदों के 3 लाख 48 हजार 511 किसानों को क्षतिपूर्ति अनुदान के रूप में 113 करोड़ 20 लाख 66 हजार रुपए की राशि उनके बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वैश्विक बीमारी कोराना वायरस के बावजूद बाढ़ से प्रभावित जिलों में राहत कार्य युद्ध स्तर पर किया गया। हमारा यही प्रयास रहा कि सभी पीडि़तों तक राहत सामग्री मिले। सरकार सुख-दुख में किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शीघ्र ही यूपी सरकार बाढ़ की समस्या का स्थाई हल निकालेगी। इस बाबत कार्ययोजना तैयार हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाढ़ के कारण हुए नुकसान की भरपाई मुश्किल होती है। फिर भी सरकार के द्वारा बाढ़ से प्रभावित किसानों के जख्मों पर मलहम लगाने का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जनपद लखीमपुर खरी, गोरखपुर, बाराबांकी, बहराइच और सिद्धार्थ नगर के किसानों से बात भी की। किसानों को हर हाल में मिले उपज का समर्थन मूल्य किसानों की हित की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हितों के कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिले यह सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य हर हाल में मिलना ही चाहिए। मुआवजा राशि को किया सीधे किसानों के खाते में की हस्तांतरित अनुदान राशि डी.बी.टी.के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में इस वर्ष बाढ़ से प्रभावित किसानों तथा क्षति संबंधित विवरण को पहली बार ऑनलाइन करते हुए एन.आई.सी. के माद्यम से वेब बेस्ड क्षति सर्वेक्षण तथा राहत वितरण तैयार किया गया, जिसके माध्यम से कृषि निवेश अनुदान राशि डी.बी.टी.के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की गई। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब रायपुर में खोला जाएगा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र

अब रायपुर में खोला जाएगा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अच्छी खबर, स्थानीय स्तर पर फसलों की लागत के निर्धारण में होगी सहुलियत छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई हैं। खबर ये हैं कि अब इस राज्य के रायपुर जिले में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र खुलने जा रहा है। इससे यहां स्थानीय स्तर पर किसानों की फसलों का लागत मूल्य निर्धारण किया जा सकेगा। आज देश भर के अलग-अलग जगहों पर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के 16 केंद्र खुले हुए हैं। यह 17 वां केंद्र होगा जो रायपुर में खोला जाएगा। जानकारी के अनुसार भारत सरकार द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र खोलने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह केंद्र आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 से कार्य करना प्रारंभ कर देगा। इस केन्द्र के संचालन हेतु भारत सरकार द्वारा 25 पद भी स्वीकृत किए गए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 परियोजना के क्रियान्वयन हेतु केन्द्र सरकार से 10.75 करोड़ रुपए की मांग राज्य निर्माण के बाद से यहां किसानों द्वारा उत्पादित फसलों के लागत का आंकलन करने हेतु कोई केन्द्र नहीं था। अब तक जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्थित केन्द्र द्वारा ही छत्तीसगढ़ में फसल उत्पादन लागत का निर्धारण किया जा रहा था। विश्वविद्यालय विगत चार वर्षों से यहां इस केंद्र की स्वीकृति हेतु प्रयासरत था। अब केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों की खेती की लागत निर्धारण हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को एक परियोजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के संचालन हेतु समस्त राशि भारत सरकार की ओर से प्रदान की जाएगी। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा परियोजना संचालित करने हेतु सहमति एवं आवश्यक बजट का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया गया है। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु केन्द्र सरकार से 10.75 करोड़ रुपए की मांग की गई है। क्या है कृषि लागत एवं मूल्य आयोग और उसका काम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है। यह आयोग जनवरी1965 में अस्तित्व में आया। यह आयोग कृषि उत्पादों के संतुलित एवं एकीकृत मूल्य संरचना तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सलाह देता है। भारत सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, गेहूं, मक्का, ज्वार,बाजरा, जौ, रागी, सोयाबीन, अरहर, चना, उड़द, मूंग, मसूर, मूंगफली, तिल, रामतिल, सरसों, तोरिया, सूरजमुखी, कुसुम, गन्ना, कपास, जूट आदि फसलों की खरीदी की जाती है। इसके लिए प्रतिवर्ष आयोग द्वारा 23 कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह उचित एवं लाभकारी मूल्य की घोषणा की जाती है। गन्ने का मूल्य निर्धारण आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अनुमोदित किया जाता है। अब तक कहां-कहां खोले गए हैं कृषि लागत एवं मूल्य आयोग केंद्र समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण करने के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा देश के 16 राज्यों आंध्रप्रदेश, आसाम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचलप्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। अब केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़, झारखंड एवं तेलंगाना में नवीन केंद्रों की स्थापना के लिए मंजूरी दी गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के रायपुर में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का 17वां केंद्र खुलने जा रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्याज की खेती : ये किस्में देगी अधिक पैदावार, बस इन बातों का रखें ध्यान

प्याज की खेती : ये किस्में देगी अधिक पैदावार, बस इन बातों का रखें ध्यान

प्याज की पूरे साल रहती है बाजार में मांग, मिलते हैं अच्छे भाव सब्जियों में आलू और प्याज हर मौसम में खाई जाने वाली सब्जी है। इसलिए इसकी साल के 12 महीने बाजार में मांग रहती है। प्याज को कच्चा सलाद के रूप में एकल या अन्य सब्जी के साथ पकाकर खाया जाता है। होटलों, ढाबों सहित घरों में इसका उपयोग कई तरीके की रेसीपी बनाने में किया जाता है। भारत में महाराष्ट्र में प्याज की खेती सबसे ज्यादा की जाती है। यहां साल मेें दो बार प्याज की फसल होती है- एक नवंबर में तो दूसरी मई के महीने के करीब होती है। भारत से कई देशों में प्याज का निर्यात किया जाता है। भारत से प्याज खरीदार देशों में नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांज्लादेश आदि प्रमुख है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्याज की खेती (Onion cultivation) सबसे ज्यादा कहां होती है हमारे देश के नासिक और राजस्थान के अलवर शहर का प्याज काफी पसंद किया जाता है। प्याज की फसल कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर अलग-अलग समय पर तैयार होती है। विश्व में प्याज 1,789 हजार हेक्टर क्षेत्रफल में उगाई जाती हैं, जिससे 25,387 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता है। भारत में इसे कुल 287 हजार हेक्टर क्षेत्रफल में उगाए जाने पर 2450 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। इसकी देश व विदेशों में इसकी अच्छी मांग होने के कारण इसे नकदी फसल में गिना जाता है। यदि किसान व्यवसायिक तरीके से इसकी खेती करे तो अधिक पैदावार के साथ ही भरपूर मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके लिए किसान को प्याज की उन्नत किस्मों की जानकारी होना बेहद जरूरी है जिससे वह अधिक उत्पादन और स्वाद से भरपूर किस्म का चुनाव कर अच्छा लाभ सके। आइए जानतें हैं प्याज की अधिक पैदावार देने वाली उन्नत किस्मों और इसकी खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातों के बारें में जिससे किसान भाई प्याज का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने में सफल हो सके। अधिक पैदावार देने वाली प्याज की उन्नत किस्में / प्याज की किस्में पूसा रतनार : इस किस्म के कंद बड़े थोड़े चपटे व गोल होते है, जो गहरे लाल रंग के होते है। पत्तियां मोमी चमक तथा गहरे रंग कि होती है। इसके कंदों को 3 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, रोपाई के 125 दिनों बाद खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। यह प्याज की उन्नत किस्म प्रति हेक्टेयर 400 से 500 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। हिसार- 2 : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद लाली लिए हुए, भूरे रंग के तथा गोल होते है। इसकी फसल रोपाई के लगभग 175 दिनों बाद खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके कंद कम तीखे होते है। यह प्रति हेक्टेयर 300 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। इस प्याज की इस उन्नत किस्म की भंडारण क्षमता भी अच्छी है। पूसा व्हाईट फ़्लैट : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद मध्यम से बड़े आकार के चपटे, गोल तथा आकर्षक सफ़ेद रंग के होते है। रोपाई के 125 से 130 दिन बाद में तैयार होने वाली किस्म है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी होती है। यह प्रति हेक्टेयर 325 से 350 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। पूसा व्हाईट राउंड : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद मध्यम से बड़े आकार के चपटे, गोल, और आकर्षक सफेद रंग के होते है। इस किस्म को सुखाकर रखने कि दृष्टि से विकास किया गया है। यह रोपाई के 125 से 130 दिनों बाद तैयार होती है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी है। यह प्रति हेक्टेयर 300 से 350 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। ब्राउन स्पेनिश : इस किस्म की प्याज के शल्क कंद गोल लंबे तथा लाल भूरे रंग के होते है, इसमें हलकी गंध आती है। यह किस्म सलाद के लिए उपयुक्त होती है। इसके कंद 165 से 170 दिनों में खुदाई के लिए तैयार हो जाते है। यह किस्म पर्वतीय क्षेत्रों में उगाने के लिए अत्यंत उपयुक्त सिद्ध हुई है। सुरक्षित रखने कि दृष्टि से यह दूसरी किस्मों कि अपेक्षा काफी अच्छी मानी गई है। अर्ली ग्रेनो : इस किस्म के कंद गोल आकार के, पीले, हलकी गंध युक्त वाले तथा सलाद के लिए उपयुक्त होते है व रोपाई के 95 दिनों बाद पूरे आकार के हो जाते है और 115 से 120 दिनों में पक जाते है। इस किस्म में फूल खिलने कि समस्या कम है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 500 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता कम होती है। एग्री फाउंड लाईट रेड : प्याज की यह किस्म सभी क्षेत्रों के लिए अच्छी सिद्ध हुई है, परन्तु महाराष्ट्र में नासिक और उसके आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से सफल है। इसके कंद हलके लाल रंग के होते है। यह 160 दिन में 300 से 325 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार दे सकती है। कल्याणपुर रेड राउंड : प्याज की यह किस्म उत्तर प्रदेश के लिए अच्छी मनी गई है। यह किस्म 130 से 150 दिन पककर तैयार हो जाती है। बात करें इसके प्राप्त उपज की तो इसकी 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल जाती है। लाइन- 102 : इस किस्म में कंद मध्यम से बड़े आकार के तथा लाल रंग के होते है। यह किस्म 130 से 135 दिन में तैयार हो जाती है और 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल सकती है। यह किस्म उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी गई है। पूसा रेड : इस के कंद मंझौले आकार के तथा लाल रंग के होते है, स्थानीय लाल किस्मों कि तुलना में यह प्याज की उन्नत किस्म कम तीखी होती है। इसमें फूल निकल आने कि समस्या कम होती है। रोपाई के 125 से 140 दिनों में तैयार होने वाली किस्म है, इसकी भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। उपज की दृष्टि से देखे तो इसकी प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। कंद का भार 70 से 90 ग्राम का होता है, गंगा के पठारों, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त किस्म है। एन- 257-1 : प्याज की यह किस्म के सफेद रंग के कंद वाली होती है। यह किस्म महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में रबी मौसम में उगाने के लिए अच्छी है। अर्का कल्याण : प्याज की इस किस्म के कंद गहरे गुलाबी रंग के होते है, जिनका औसतन वजन 100 से 190 ग्राम होता है। यह किस्म उत्तरी भारत के मैदानों, मध्य प्रदेश, बिहार, उडि़सा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक तथा तमिलनाडु में उगाने के लिए उपयुक्त बताई गई है। रबी प्याज की खेती / खरीफ प्याज की खेती एन- 257-1 : प्याज की यह किस्म के सफेद रंग के कंद वाली होती है। यह किस्म महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में रबी मौसम में उगाने के लिए अच्छी है। अर्का प्रगति : यह दक्षिण भारत में रबी तथा खरीफ दोनों मौसमों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है। इसके कंद गुलाबी रंग के होते है। यह 140 से 145 दिन बाद 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देती है। एन- 53 : प्याज की इस किस्म के कंद गोल, हलके लाल सुडौल, कम तीखे होते है। इसकी एक गांठ का औसत वजन 80 से 120 ग्राम तक होता है, खुदाई के समय इसकी गांठ हलके बैंगनी रंग कि होती है जो बाद में गहरे लाल रंग कि हो जाती है। इस किस्म को रबी तथा खरीफ दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है, किन्तु उत्तरी भारत में खरीफ मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त पाई गई है। यह फसल 150 से 165 दिनों में खुदाई हेतु तैयार हो जाती है। रबी में 200 से 250 तथा खरीफ में 150 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल सकती है। अर्का निकेतन : इस प्याज की उन्नत किस्म को खरीफ व रबी दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है। इसकी फसल 145 दिन में तैयार हो जाती है। इसके कंद का वजन 100 से 180 ग्राम का होता है। यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा तमिलनाडु में उगाने के लिए उपयुक्त मानी गई है। इसकी प्रति हेक्टेयर 325 से 350 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। इसके कंदों को 3 महीने तक भंडारित किया जा सकता है। अधिक पैदावार देने वाली प्याज की कुछ संकर किस्में वी एल- 76 : यह एक संकर किस्म है, इस किस्म के कंद बड़े तथा लाल रंग के होते है। यह तराई क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। रोपाई के बाद 175 से 180 दिनों में कंद खुदाई के लिए तैयार हो जाते है। यह प्रति हेक्टेयर 350 से 400 क्विंटल तक पैदावार देती है। अर्का कीर्तिमान : यह संकर किस्म है। इसके कंदों को काफी समय तक भंडारित किया जा सकता है। यह निर्यात के लिए अच्छी किस्म है। अर्का लाइम : यह भी प्याज की संकर किस्म है। इसके कंद लाल रंग के होते है। इसकी भंडारण क्षमता भी अधिक होती है। यह किस्म भी निर्यात के लिए अच्छी किस्म है। प्याज उगाते समय में इन बातों का रखें ध्यान / प्याज की खेती का समय प्याज की बुवाई करते समय भूमि से 10 सेमी. ऊंची क्यारियां बनाकर बुवाई करनी चाहिए। इसके बाद बीज को ढक देना चाहिए। आद्र्र गलन का रोग पौधों में न लग पाए इसके लिए क्यारियों में 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण का छिडक़ाव करना चाहिए। प्याज की कतार 15 सेमी., पौधे 10-15 सेमी. ऊंचे हो जाएं तब खेत में रोपण करना चाहिए। अधिक उम्र के पौधे या जब उनमें जड़ वाला भाग मोटा होने लगे, तब इसे नहीं लगाना चाहिए। इसकी के लिए खेत की तैयारी आलू के समान ही की जानी चाहिए। पौध रोपण के तुरंत बाद ही सिंचाई जरूर करनी चाहिए। प्याज के पौधों की कतारों के मध्य पुआल या सूखी पत्तियां बिछा देनी चाहिए जिससे सिंचाई की बचत होती है। फूल आना या बोल्टिंग- कन्द के लिए ली जाने वाली फसल में फूल आना उचित नहीं माना जाता है, इससे कन्द का आकार घट जाता है। अत: आरंभ में ही निकलते हुए डंठलों को तोड़ देना चाहिए। प्याज के लिए कुल 12-15 सिंचाई की आवश्यकता होती है, 7-12 दिन के अन्तर से भूमि के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। पौधों का सिरा जब मुरझाने लगे, यह कन्द पकने के लक्षण हैं, इस समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए। जब पत्तियों का ऊपरी भाग सूखने लगे तो उसे भूमि में गिरा देना चाहिए जिससे प्याज के कन्द ठीक से पक सकें। खुदाई करने में कन्द को चोट या खरोंच नहीं लगनी चाहिए। प्याज के छोटे आकार के कंदों में बड़े आकार की तुलना में संग्रहण क्षमता अधिक होती है। वहीं मोटी गर्दन वाले कंद संग्रहण में शीघ्र ही खराब होने लगते हैं। फसल में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक अधिक देने से कंदों की संग्रहण क्षमता कम हो जाती है। इसलिए इसका आवश्यकता से ज्यादा प्रयोग नहीं करें। वहीं फॉस्फोरस और पोटाश का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव इस पर नहीं पड़ता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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