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लहसुन की खेती से होगी 7 लाख की इनकम, ऐसे करें तैयारी

लहसुन की खेती से होगी 7 लाख की इनकम, ऐसे करें तैयारी

08 August, 2017 Total Views 6504

खेती को अगर बिजनेस मानकर किया जाए तो यह अधिकतम रिटर्न देने वाला साबित हो सकता है। यही कारण है कि इन दिनों युवाओं का रूझान भी खेती की ओर हो रहा है। बस जरूरत है फसलों के सही चुनाव की।

आज इसी तरह की एक फसल की जानकारी दे रहे हैं जिसकी खेती आपको महज 6 महीने में लाखों की इनकम करा सकती है।किसानों के लिए अक्टूबर का महीना लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में लहसुन का कंद निर्माण बेहतर होता है।

इसकी खेती के लिए दोमट भूमि अच्छी रहती है।लहसुन जितना आपके खाने को लजीज बनाता है उतनी ही इसकी खेती आपकी जेब को भी मजबूत कर सकती है। इसकी खेती पर महज 50 हजार रुपए खर्च कर आप इससे 8 से 12 लाख रुपए तक कमा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं लहसुन की आधुनिक खेती और इससे होने वाले लाभ को….

लहसुन की विभिन्न किस्में

इन दिनों लहसुन की जी-1 और जी-17 प्रजाति प्रमुख हैं। जी-17 का प्रयोग ज्‍यादातर हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश के किसान कर रहे हैं। यह दोनों प्रजातियां ही 160 से 180 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं। इसके बाद अप्रैल-मई महीने में इसकी खुदाई होती है। एक हेक्‍टेयर में लगभग 8 से 9 टन पैदावार आसानी से हो जाती है।इसके इलावा प्रमुख किस्मे निचे दी हुई है

टाइप 56-4:लहसुन की इस किस्म का विकास पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है। इसमें लहसुन की गांठे छोटी होती हैं और सफेद होती हैं। प्रत्येक गांठ में 25 से 34 पुत्तियां होती हैं। इस किस्म से किसान को प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक उपज मिलती है।

आईसी 49381:इस किस्म का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से किया गया है। इस किस्म से लहसुन की फसल 160 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से किसानों को अधिक उपज मिलती है।

सोलन:लहसुन की इस किस्म का विकास हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है। इस किस्म में पौधों की पत्तियां काफी चौड़ी व लंबी होती हैं और रंग गहरा होता है। इसमें प्रत्येक गांठ में चार ही पुत्तियां होती हैं और काफी मोटी होती हैं। अन्य किस्मों की तुलना में यह अधिक उपज देने वाली किस्म है।

एग्री फाउंड व्हाईट (41 जी):लहसुन की इस किस्म में भी फसल 150 से 160 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से लहसुन की उपज 130 से 140 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह किस्म गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि प्रदेशों के लिए अखिल भारतीय समन्वित सब्जी सुधार परियोजना के द्वारा संस्तुति की जा चुकी है।

यमुना (-1 जी) सफेद: लहसुन की यह किस्म संपूर्ण भारत में उगाने के लिए अखिल भारतीय सब्जी सुधार परियोजना के द्वारा संस्तुति की जा चुकी है। इस किस्म में फसल से 150 से 160 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर उपज 150 से 175 क्विंटल होती है।

यमुना सफेद 2 (जी 50): यह किस्म मध्य प्रदेश के लिए उत्तम पाई जाती है। इस किस्म में 160 से 170 दिन फसल तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर उपज 150 से 155 क्विंटल तक होती है। यह किस्म बैंगनी धब्बा और झुलसा रोग के प्रति सहनशील होती है।

जी 282:इस किस्म में शल्क कंद सफेद और बड़े आकार के होते हैं। इसके साथ ही 140 से 150 दिनों में फसल तैयार हो जाती है। इस किस्म में किसान को 175 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल जाती है।

आईसी 42891:लहसुन की इस किस्म का विकास भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली की ओर से किया गया है। यह किस्म किसानों को अधिक उपज देती है और फसल 160-180 दिन में तैयार हो जाती है।

मिट्टी और जलवायु

जैसा कि आपको पहले बताया जा चुका है कि लहसुन की खेती के लिए मध्यम ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है। इसके साथ ही दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक हो, लहसुन की खेती के लिए सबसे अच्छी है।

खेती की तैयारी

खेत में दो या तीन गहरी जुताई करें। इसके बाद खेत को समतल कर क्यारियां और सिचांई की नालियां बना लें। बता दें कि लहसुन की अधिक उपज के लिए डेढ़ से दो क्विंटल स्वस्थ कलियां प्रति एकड़ लगती हैं।

ऐसे करें बुवाई और सिंचाई

अधिक उपज के लिए किसानों को बुवाई के लिए डबलिंग विधि का उपयोग करना चाहिए। क्यारी में कतारों की दूरी 15 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए। वहीं, दो पौधों के बीच की दूरी 7.5 सेंटीमीटर होनी चाहिए। वहीं किसानों को बोने की गहराई 5 सेंटीमीटर तक रखनी चाहिए। जबकि सिंचाई के लिए लहसुन की गांठों के अच्छे विकास के लिए 10 से 15 दिनों का अंतर होना चाहिए।

कितना आता है खर्च

 

एक हेक्‍टेयर में लगता है 12 हजार रुपए का बीज लहसुन की खेती के लिए नवंबर महीना मुफीद रहता है। इसकी खेती भारत के लगभग हर हिस्‍से में की जाती है.लेकिन, इसके लिए उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, हरियाणा, पंजाब और मध्‍य प्रदेश का मौसम बहुत ही उपयुक्‍त माना जाता है। एक एकड़ खेती में लगभग 5 हजार रुपए का बीज (लहसुन की गांठ) लगता है।

जबकि, एक हेक्‍टेयर को अगर मॉडल मानकर चलें तो 12 हजार से 13 हजार रुपए का बीज पर्याप्‍त होता है। छह महीने में खाद, पानी, मजदूरी आदि कुल सब मिलाकर 50 से 60 हजार रुपए खर्च आ जाता है।

7 से 8 लाख रुपए होती है इनकम

लहसुन का प्रयोग ज्‍यादातर मसालों और आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। ऐसे में इसकी ज्‍यादा मांग रहती है। वर्तमान में दिल्‍ली आजादपुर मंडी.की ही अगर बात करें तो इसके दाम 120 से 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक चल रहे हैं।

इस तरह अगर आप एक हेक्‍टेयर में 8 टन यानि 8000 किलोग्राम लहसुन भी मानकर चलें तो आपको मंडी से 100 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भी 8 लाख रुपए प्राप्‍त होंगे। इसमें से अगर आप पैदावार, खुदाई और ढुलाई का खर्च एक लाख रुपए भी निकाल लें तो 7 लाख रुपए की बचत होती है। पिछले दिनों लहसुन प्रमुख बाजारों में 450 रुपए प्रति किलोग्राम तक भी बिका है।

प्रोसेस कर बेच सकते हैं

लहसुन इसमें अगर आप इनकम को बढ़ाना चाहते हैं तो इसे प्रोसेस कर भी बेच सकते हैं। शुरुआत में आप महज 10 फीसदी उत्‍पादन को ही प्रोसस कर बेचे तो आपको कुल उत्‍पादन के लाभ का 50 फीसदी तक प्राप्‍त हो सकता है। बिजनौर उत्‍तर प्रदेश के नीरज अहलावत ने पिछले दिनों सिर्फ 1 क्विंटल गार्लिक को प्रोसस (पेस्‍ट और मसाला तैयार करना) 1.5 लाख रुपए में बेचा है।

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कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

15 सरकारी बैंकों ने किया राहत स्कीमों का ऐलान, उठाएं फायदा ट्रैक्टर जंक्शन पर देश के किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं कोरोना लाकडाउन के समय मिलने वाले सस्ते लोनों के बारे में। कोरोना वायरस की इस मुश्किल घड़ी में किसान, मजदूर, व्यापारी, छात्र, छोटे दुकानदार, महिलाओं की मदद के लिए देश के सरकारी बैंकों ने खास पहल शुरू की है। देश के करीब 15 सरकारी बैंक इमरजेंसी लोन सहित अन्य तरीक के लोन उपलब्ध करा रहे हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना लॉकडाउन में सस्ते लोन कोरोना (कोविड 19) लॉकडाउन की संकटकालीन घड़ी में सस्ते लोन उपलब्ध कराने के लिए जहां सरकारी बैंकों ने तत्परता दिखाई है वहीं निजी सैक्टर के बैंक अभी इस मामले में पीछे हैं। कोरोना लॉकडाउन के बाद देश के कुल 18 सरकारी बैंकों में से कम से कम 15 बैंकों ने विभिन्न सेक्टरों के लिए राहत स्कीमों का एलान किया है। इसे लोगों को तात्कालिक स्थितियों से निपटने में थोड़ी राहत मिलेगी। भारतीय स्टेट बैंक इस तरह के लोन की पेशकश करने वाला पहला बैंक है। ऐसे कर्ज पर छह महीने तक कोई किश्त नहीं देनी होगी। उसके अगले छह महीनों से 7.25 फीसदी की रियायती दर से कर्ज चुकाना होगा। इन बैंकों में उपलब्ध है सस्ते लोन भारतीय स्टेट बैंक पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा केरना बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बैंक ऑफ इंडिया इंडियन बैंक बैंक ऑफ महाराष्ट्र सिंडिकेट बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक यूको बैंक आंध्र बैंक सिडबी यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए कोविड-19 और बैंकों के इमरजेंसी लोन की खास बातें इमरजेंसी लोन से कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के समय लोगों को अपनी नकद जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इन लोन स्कीमों में छह महीने तक किश्तों का कोई भुगतान नहीं करना होगा। इसके बाद लोन की अदायगी शुरू होगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड 19 इमरजेंसी क्रेडिट लाइन नाम से यह सुविधा शुरू की है। कैपिटल लिमिट के 10 फीसदी के बराबर होगी। इसमें खात बात यह है कि 200 करोड़ रुपए तक का अधिकतम लोन दिया जा सकेगा। इस लोन योजना के तहत लिए गए ब्याज दर की लिमिट 7.25 फीसदी रखी गई है। इस सुविधा के तहत कोई प्रोसेसिंग फीस या प्री पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूली जाएगी। यह सुविधा 30 जून 2020 तक उपलब्ध होगी। इंडियन बैंक : इंडियन बैंक के पांच स्पेशल कोविड इमरजेंसी लोन स्कीम है। इससे नौकरीपेशा वर्ग, पेंशनर, स्वयं सहायता स्मूह, एमएसएमई और बड़े कॉरपोरेट घराने लाभान्वित होंगे। बैंक के मौजूद ग्राहक भी इस स्कीम का फायदा ले पाएंगे। बैंक से बहुत बड़ा किसान वर्ग भी जुड़ा हुआ है। इंडियन बैंक के नौकरीपेशा ग्राहक अपनी सैलरी के 20 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसकी ऊपरी सीमा 2 लाख रुपए है। इंडियन बैंक की वरिष्ठ नागरिक इमरजेंसी पेंशन लान के तहत अपनी मासिक पेंशन के 15 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसमें भी 2 लाख रुपए की ऊपरी सीमा है, ऐसे लोन की अवधि 5 साल है। यह जीरो कंसेशनल इंटरेंस्ट या चार्ज पर मिलेगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया उन व्यापारियों को भी कर्ज दे रहा है जिनके काम पर लॉकडाउन से असर पड़ा है। यह उनकी कार्यशील पूंजी के 10 फीसदी तक दिया जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा : बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ौदा कोविड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन शुरू की है। यह स्वीकृत लोन सीमा के 10 फीसदी तक अतिरिक्त धन मुहैया कराएगा। कारर्पोरेट के लिए ब्याज दर स्टैंडर्ड प्रीमियम के बिना 8.15 फीसदी होगी। एमएसएमई को 8 फीसदी की दर से लोन मिलेगा। बैंक ऑफ इंडिया : बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड इमरजेंसी सपोर्ट स्कीम शुरू की है। इसके तहत कॉर्पोरेट अपनी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमा पर 20 फीसदी अतिरिक्त क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं। स्कीम के तहत नौकरीपेशा को उनकी अंतिम सैलरी के तीन गुना तक लोन दिया जाएगा। सिडबी : सरकारी वित्तीय संस्थान सिडबी ने भी 5 फीसदी की रियायती दरों पर एमएसएमई को कर्ज उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

मंडिया खुलेंगी, किसान बेच सकेंगे फसल ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज बड़ी खुशी की बात है कि सरकार ने भी किसानों को भारत का भाग्य विधाता मान लिया है। कोरोना संकट के समय केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब लॉक डाउन के दौरान कृषि के कार्य प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर किसानों को कई प्रकार की छूट दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 किसानों के लिए सरकार की गाइडलाइन कोरोना लॉकडाउन के दौरान कृषि की हालत खराब नहीं हो इसलिए गृह मंत्रालय ने किसानों को कई तरह की छूट दी है। केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े कार्यों, मशीनरी, उर्वरक, खाद-बीज की दुकानों, कृषि उपज मंडियों व खरीद-फरोख्त से जुड़ी एजेंसियों को लॉकडाउन से बाहर कर दिया है। यानि अब किसान आराम से खेत पर जा सकेंगे। ट्रैक्टर से जुताई, कंबाइन मशीन से फसल काट सकेंगे। नजदीकी कस्बों से बीज, डीएपी व यूरिया खरीद सकेंगे। अपनी फसल को मंडी पहुंचा सकेंगे। दूसरे शहर या राज्यों से फसल कटाई में काम आने वाली मशीनों को मंगा सकेंगे। यानि अब लॉक डाउन से कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि किसानों से अपील की गई है कि वो उचित सामाजिक दूरी बनाए रखें और कोरोना गाइडलाइन का ध्यान रखें। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए किसानों के लिए गृह मंत्रालय के नए आदेश कोरोना के कारण देश के किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही थी। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और उसे काटने के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं न ही मशीन उपलब्ध हो पा रही है। मंडियां नहीं खुलने व समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसान अपनी उपज को नहीं बेच पा रहे हैं और आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने 27 मार्च 2020 को नए आदेश जारी किए हैं। ये आदेश पूरे देश में लागू होंगे। इसके अलावा राज्य सरकारों ने भी किसानों की सुविधा के अनुसार कुछ रियायतें उपलब्ध कराई हैं। गाइडलाइन की खास बातें किसान बिना किसी रुकावट के कृषि कार्य करें। मजदूरों को काम करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। फसल कटाई से जुड़ी मशीनें (कंबाइन-रीपर) आदि एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकेंगी। फसल कटाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद में जुटे लोग एक-दूसरे स्थान पर जा सकेंगे। सभी सरकारी मंडियां, कृषि उत्पादन मंडी समितियां या फिर वे मंडियां जिन्हें राज्य सरकारों ने मान्यता दी हैं, खुलेंगी। खाद-बीज और रासायनिक कीटनाशकों की दुकानें खुल सकेंगी। फार्म मशीनरी, कस्टम हायरिंग सेंटर खुलेंगे। जानिए, किस राज्य के किसान को क्या सुविधा मिली उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा समेत कई राज्य सरकारों ने फसल कटाई, मंडी, खाद-बीज, कीटनाशक, राशन व मंडी तक सामान ले जाने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। सरकारों ने कहा है कि किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। उत्तर प्रदेश : यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने निर्देश जारी किए हैं। इसमें पुलिस-प्रशासन से कहा गया है कि रबी फसल की कटाई में प्रयुक्त कंबाइन हार्वेस्टर काम करेंगे। खेतों व अन्य कृषि कार्यों में श्रमिक काम कर सकेंगे। उर्वरक व कीटनाशकों की दुकानों खुलेंगी। रेलवे रैक द्वारा उवर्रक की आपूर्ति जारी रहेगी। इन कामों में लगे श्रमिकों को आने-जाने में छूट रहेगी। बीज विधायन संयंत्र के संचालन और कार्य में लगे श्रमिकों को भी छूट रहेगी। साथ ही किसानों को सोशल डिस्टेसिंग बनाए रखने और खेत में ज्यादा मजदूरों को इकट्ठा नहीं होने की अपील की गई है। हरियाणा : कोरोना महामारी से जंग के बीच हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत दी है। बंद के दौरान किसान अपने खेतों में बेरोकटोक आवाजाही कर सकेंगे। फसल कटाई में भी किसानों को कोई दिक्कत नहीं आएगी। फसलों की कटाई के लिए आवागमन करने वाली कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरी मशीनों को सडक़ों पर रोका नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में पुलिस, प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए हैं। राजस्थान : राजस्थान सरकार ने 23 मार्च को जारी आदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद बंद कर दी थी, लेकिन फसल की कटाई जारी रहेगी। गहलोत सरकार ने फसल कटाई के दौरान एहतियात बरतने के आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि.फसल कटाई के लिए कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा मशीन (कंबाइन) से हो। इस दौरान खेत में काम करने वाले लोग एक दूसरे से 5 मीटर की दूरी पर रहें और समय-समय पर हाथ धुलते रहें। खेतों में काम करने वाले लोग किसान या मजदूर, अपना अपना पानी अलग-अलग रखें, खाने के बर्तन भी अलग हों। अगर किसी व्यक्ति को खांसी, जुखाम, बुआर आदि है तो उसे कृषि कार्य से दूर रखे। कोरोना से लड़ाई में किसानों की भी है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी गांव हो या खेत.. सोशल डिस्टेसिंग (उचित दूरी- यानि एक दूसरे के बीच न्यूनतम 1 मीटर की दूरी) बनाए रखिए। खेत में एक साथ ज्यादा मजूदरों को काम नहीं करना चाहिए। मजदूर, या आप खुद एक ही बोतल से पानी नहीं पिएं। खेत में बाल्टी और साबुन रखिए और हाथ धुलते रहिए। फसल काटें तो सुखाकर रखें, जल्द बेचने की कोशिश न करें औने-पौने दाम मिलेंगे। अपने जिले के इमरजेंसी नंबर अपने पास रखें। सबसे जरूरी चीज अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

जानिए कोविड-19 से फसलों के नुकसान का मुआवजा मिलेगा या नहीं कोरोना वायरस (कोविड-19) की दहशत कम होती नहीं दिख रही है। 27 मार्च 2020 गुरुवार दोपहर तक भारत में 17 लोगों की मौत हो चुकी थी। वहीं 724 लोग संक्रमित है। इसके अलावा विश्व के अन्य देशों में हालात और भी भयावह है। विश्व के अन्य देशों में 24 हजार 57 लोगों की मौत हो चुकी है और सक्रमण के 5 लाख 31 हजार 860 मामले हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक 21 दिन का लॉकडाउन पीरियर चल रहा है। ऐसे में समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद बंद कर दी गई। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और किसान उसे काटने की तैयारी कर रहा है। ट्रैक्टर जंक्शन इस पोस्ट के माध्यम से किसानों के हर सवाल का जवाब दे रहा है जो उनके मन में है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 समर्थन मूल्य पर खरीद प्रक्रिया बंद केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं का उत्पादन 105 मिलियन टन होने की संभावना व्यक्त की है। कोरोना लॉकडाउन की वजह से फसलों को काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर खेत में जाने से डर रहे हैं। दूसरी तरफ बेमौसम बरसात का सिलसिला भी देश के उत्तरी राज्यों में जारी है जिससे किसानों को फसलों में नुकसान होने की संभावना है। देशभर में लॉक डाउन के कारण कृषि मशीनें भी एक राज्य से दूसरे राज्य नहीं जा पा रही है। कोरोना (कोविड-19) से फसल नुकसान का मुआवजा : मिलेगा या नहीं देशभर में लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टेशन के वाहन भी बंद है। देशवासियों से अपने-अपने घरों में रहने की अपील की गई है। जनजीवन थम गया है। लॉकडाउन का कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर के खेतों में फसलों की कटाई अंतिम चरण में चल रही है और किसानों को इसे जल्दी से जल्दी बेचना चाहते हैं। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मानव निर्मित जोखिम को शामिल नहीं किया गया है, जिससे देश का कोई भी किसान यह दावा नहीं कर सकता है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण हुए नुकसान का बीमा किया जाएगा। यदि खेत में पड़ी फसल का नुकसान बारिश या ओले से होता है तो यह प्राकृतिक आपदा है। फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए छोड़ी गई फसल की क्षति होने पर भी किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। किसानों को कोविड-19 जैसी महामारी से नुकसान की भरपाई के देश में फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों को फायदा पहुंचा रही है। अब किसानों की भरपाई बस सरकार के राहत पैकेज से ही हो सकती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए समर्थन मूल्य पर कब शुरू होगी सरकारी खरीद देश में लॉकडाउन की घोषणा से पहले देश के कई राज्यों में एक अप्रैल व 15 अप्रैल से रबी फसलों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होनी थी। लेकिन लॉकडाउन के बाद हालत उलट हो गए हैं। अब फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद कब शुरू होगी यह देश में लॉकडाउन हटने की तिथि 15 अप्रैल के बाद ही पता चलेगा। फसलों की संभावित खरीद से पहले ही पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान ने अपने राज्यों में गेहूं की खरीद अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी है। लॉक डाउन के कारण मंडियां भी बंद है। ऐसे में किसानों के पास बाजार में भी बेचने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन सभी किसान भाइयों को सलाह देना चाहता है कि किसान भाई परिवार के सहयोग से खेत में खड़ी फसलों को काटकर अपने घर व गोदामों में रखे। लॉक डाउन हटने के बाद फिर से सरकारी खरीद शुरू होगी और मंडियां भी खुल जाएंगी। इसके अलावा कई राज्यों में अभी तक समर्थन मूल्य पर पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। पंजीकरण के बाद ही किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं। किसान कैसे करें फसलों का सुरक्षित भंडारण देशभर के किसान फसलों की कटाई में जुटे हैं। अब उनके सामने फसलों को बेचने की समस्या है। लेकिन लॉकडाउन के कारण 15 अप्रैल से पहले फसलों को बेचना लगभग असंभव है। अत: जिन किसानों ने अपनी फसल काट ली है वह भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। भंडार में अन्न रखने से पहले मालाथियान 50 ई.सी. एक भाग एवं 300 भाग पानी में घोलकर अच्छी तरह से भंडार में छिडक़ाव करें। बीज से लिए रखी अन्न की बोरियों पर भी मालाथियान धूल का भुरकाव कर दें। अगर अन्न में कीड़ लगने शुरू हो जाए तो उसे शीघ्र बेच दें। कीड़े लगने की दशा में प्रधुमन भी कर सकते हैं। इसके लिए वायुरोधी बर्तन में ई.डी.बी. 3 मिली प्रति क्विंटलन की दर से काम में लाएं। देशी तरीके से भंडारण करने के लिए एक सौ किलोग्राम अनाज में 5 किलोग्राम सूखी नीम या सदाबहार या कनेर की पत्तियां अच्छी तरह से मिलाकर रखने से कीटों का बचाव होता है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोरोना वायरस के खिलाफ आर्थिक पैकेज - पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए

कोरोना वायरस के खिलाफ आर्थिक पैकेज - पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए

कोरोना से लड़ाई के लिए सरकार का बूस्टर डोज : 1.70 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस को हराने के लिए लॉकडाउन बहुत जरूरी है। यही एक तरीका है जिससे हम इस महामारी को अपने देश और समाज से भगा सकते हैं। लॉक डाउन की वजह से देश की इकोनॉमी को बहुत बड़ा नुकसान होने की आशंका जाहिर की जा रही है। इस बीच सरकार की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी राहत दी है। ट्रैक्टर जंक्शन आपको बता रहा है कि इकोनॉमी के इस बूस्टर डोज से किसानों, मजदूर, व महिलाओं को फायदा होगा। सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया है। इससे देश के 8.69 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा तो ट्रेक्टर जंक्शन के माध्यम से जानिए कैसे यह आपको फायदा पहुंचाएगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना वायरस ( Coronavirus ): प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना/आर्थिक पैकेज की खास बातें देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 मार्च की दोपहर जिस समय आर्थिक पैकेज की घोषणा की उस समय तक भारत में इस घातक वायरस से जुड़े 656 मामले सामने आ चुके थे और 16 लोगों की मौत हो चुकी थी। कोरोना वायरस की वजह से देश में 21 दिनों के लॉक डाउन का दूसरा दिन है। निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1,70,000 करोड़ के पैकेज का ऐलान किया है। गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों की मदद की जाएगी। यह भी पढ़ें : मोदी सरकार का बड़ा कदम : कृषि उपकरणों पर सरकार से मिलेगी 100 फीसदी सब्सिडी ट्रैक्टर जंक्शन पर समझे सरकार की प्रमुख घोषणाएं 8.69 करोड़ किसानों को मिलेंगे 2 हजार रुपए : किसान सम्मान निधि योजना के तहत 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले हफ्ते में 2 हजार रुपए की किस्त मिल जाएगी। 80 करोड़ लोगों को तीन महीने तक मुफ्त राशन : निर्मला सीतारमण ने देश के 80 करोड़ परिवारों को 5 किलो चावल व 5 किलो गेहूं तीन महीने के लिए मुफ्त देने का ऐलान किया है। यह वर्तमान में राशन की दुकानों पर मिल रहे राशन से अलग है। इसके साथ ही इन परिवारों को एक किलो दाल भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। मनरेगा में दिहाड़ी 202 रुपए : निर्मला सीतारमण ने कहा मनरेगा के तहत आने वाले श्रमिक की दिहाड़ी बढ़ा दी गई है। दिहाड़ी पहले 182 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 202 रुपए किया गया है। इसका फायदा 5 करोड़ परिवार को होने की उम्मीद है। 60 वर्ष से अधिक लोगों को दो किश्तों में मिलेंगे एक हजार रुपए : 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, विधवाओं और विकलांगों को दो किश्तों में एक हजार रुपए प्रतिमाह पूर्व अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा। इससे तीन करोड़ लोगों को लाभ की उम्मीद है। 20 करोड़ महिलाओं के खाते में तीन महीने तक आएंगे 500-500 रुपए : वित्त मंत्री के मुताबिक, महिला जनधन खाताधारकों को 500 रुपए प्रति महीने की राशि अगले तीन महीने तक दी जाएगी। इससे 20 करोड़ महिलाओं को लाभ मिलेगा। तीन महीने तक मिलेगा मुफ्त सिलेंडर : उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिला लाभार्थियों को तीन महीने तक मुफ्त सिलिंडर दिए जाएंगे। वेतन में से ईपीएफ की नहीं होगी कटौती, सरकारी देगी पूरा योगदान : वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि छोटे कारोबार वाले लोगों को दिक्कत नहीं आएगी। अगले तीन महीने तक 12+12 प्रतिशत ईपीएफ में सरकार योगदान देगी। यह वहां लागू होगा जहां 100 से कम कर्मचारी हैं और 90 प्रतिशत कर्मचारी 15 हजार से कम वेतन पाते हैं। ईपीएफ के नियमों में बदलाव : निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार एम्प्लाई प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) के नियमों में बदलाव कर रही है। इसके तहत कोई भी कर्मचारी पीएफ अकाउंट से या तीन महीने की सैलरी से 75 प्रतिशत की धनराशि एडवांस निकाल सकेगा। कोरोना वीरों को 15 लाख रुपए का लाइफ इंश्योरेंस : वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जो कोरोना वीर इस जंग को लड़ रहे हैं, उन्हें 15 लाख का लाइफ इंश्योरेंस दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि कोई गरीब भूखा न रहे, इसके लिए सरकार ने इंतजाम किए हैं। मिनरल फंड का इस्तेमाल करें राज्य : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमने राज्य सरकारों से अपील की है कि वे जिला मिनरल फंड का इस्तेमाल मेडिकल स्क्रीनिंग, टेस्टिंग गतिविधि, कोरोना के बारे में जागरूकता फैलाने और दूसरे कारणों के लिए करें। निर्माण श्रमिक के लिए उनके वेलफेयर फंड में 31 हजार करोड़ हैं और 3.5 करोड़ मजदूर हैं। राज्यों से अपील की गई है कि आपदा की स्थिति में मदद करें। लॉकडाउन के हालात में इस फंड का इस्तेमाल कर फायदा पहुंचाएं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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सोनालीका ट्रैक्टर्स ने लॉकडाउन में सबसे पहले दिया अपने संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं को मार्च का एडवांस वेतन

सोनालीका ट्रैक्टर्स ने लॉकडाउन में सबसे पहले दिया अपने संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं को मार्च का एडवांस वेतन

नई दिल्ली, 24 मार्च 20: भारत के सबसे आधुनिक एवं तेजी से बढ़ते ट्रैक्टर ब्रांड ने हाल ही में चल रहे COVID-19 के खतरे से निपटने के लिए अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और समाज की भलाई के प्रति कई उपाय किए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सोनालीका समूह के कार्यकारी निदेशक रमन मित्तल ने मौजूदा स्थिति पर ऑर्गेनाइजेशन को आश्वस्त किया, है कि, "हम सभी एक वैश्विक महामारी के बीच फंसे हैं। समय की जरूरत को देखते हुए, हम सभी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए मजबूती से खड़े हुए हैं। एक एसी आर्गेनाईजेशन होने के नाते जहा उसके कर्मचारी कंपनी के मुल्ये हिस्सा है, सभी चुनोतियो का सामना करने की योग्यता है| हम अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों का समर्थन करने के लिए आगे तक साथ में खड़े रहेंगे। इसके चलते कार्यकाल लॉकडाउन के दौरान हमारे सभी संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं और प्लांट में ट्रेनिज, बिजनेस और कार्यालयों में पूर्ण मजदूरी देने का सुनिश्चित निर्णय लिया है। इसके अलावा, हमने संभावित पलायन को प्रबंधित करने के लिए सभी सोनालीका कर्मचारियों को मार्च (2020) के महीने के लिए 20 दिनों का अग्रिम वेतन भी जारी कर दिया है। हम समाज और हमारे राष्ट्र की भलाई के लिए साथ में खड़े हैं और आवश्यक उपायों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।" सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

न्यू हॉलैंड ने बाजार में उतारा 5 लाख वां ट्रैक्टर

न्यू हॉलैंड ने बाजार में उतारा 5 लाख वां ट्रैक्टर

भुवनेश्वर. न्यू हॉलैंड एग्रीकल्चर इंडिया, यंत्रीकृत समाधानों की एक उन्नत श्रेणी पेश करने वाला देश का पहला ब्रांड है जिसने इस महीने अपना 5,00,000वें ट्रैक्टर को बाजार में उतारा है। भारत में संतुष्ट ग्राहकों के विस्तार के आधार और एक हजार से अधिक ग्राहक स्पर्श बिंदुओं के बढ़ते नेटवर्क के साथ, न्यू हॉलैंड ने बाजार की पहुंच और लोकप्रियता दोनों के मामले में अपनी नेतृत्व स्थिति को और अधिक मजबूत किया है। ब्रांड कृषि उपकरणों की एक उन्नत श्रेणी की पेशकश करके किसानों की मदद कर रहा है जो फसल जलने की आवश्यकता को समाप्त करता है और फसल उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस अवसर पर बोलते हुए श्री कुमार बिमल (निदेशक, बिक्री) ने कहा कि हम इस बात से बेहद खुश हैं कि हम अपने ग्राहकों की बढ़ती संख्या के बावजूद ग्राहकों का भरोसा बनाए हुए हैं। देश में 5 लाख वें ट्रैक्टर को बिक्री के लिए निकालना कंपनी के लिए एक जबरदस्त उपलब्धि है, जो हमारी विकास क्षमता की पुन: पुष्टि करता है और हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने किसानों को सबसे आधुनिक समाधान प्रदान करने के लिए अपनी आगामी उत्पादन रेंज में नई तकनीकों को जोडऩा जारी रखें। न्यू हॉलैंड ट्रैक्टरों की एक तकनीकी रूप से श्रेष्ठ श्रेणी के साथ-साथ भूमि की तैयारी से लेकर कटाई के बाद के कार्यों जैसे घास और चारा के उपकरण, प्लांटर्स, बेलर, स्प्रेयर और जुताई के उपकरणों की पूरी शृंखला प्रदान करता है। ब्रांड के ट्रैक्टरों की रेंज नवीनतम प्रौद्योगिकी, शक्तिशाली और ईंधन कुशल इंजनों के साथ आती है और किसानों के लिए पहली पसंद बनकर उभरी है। न्यू हॉलैंड कस्टमर केयर सेंटर देश के ग्राहकों को हिंदी और अंग्रेजी सहित दस भाषाओं में सहायता प्रदान करता है और इसका टोल फ्री नंबर 1800-419-0124 है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

ट्रैफे और आईआईटी कानप़ुर विकसित करेंगे डीएमई इंजन, ट्रैक्टरों में डीजल और पेट्रोल की निर्भरता घटेगी भविष्य में ट्रैक्टर के इंजन बिना पेट्रोल और डीजल के चलेंगे, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश में किसानों के खर्चों को कम करने के लिए ट्रैक्टर को बिना पेट्रोल और डीजल के लिए चलाने के लिए कई प्रयोग चल रहे हैं। इन्हीं प्रयोग की शृंखला में डीएमई इंजन का नाम भी शामिल होने जा रहा है। देश के सबसे प्रतिष्ठित ट्रैक्टर निर्माताओं में शामिल ‘ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड’ (TAFE) और आईआईटी कानपुर मिलकर ट्रैक्टर इंजनों के लिए एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे जो डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन की बजाए डीआई मिथाइल ईथर (DME) पर चलेंगे। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 लंबे समय से डीआई मिथाइल ईथर को पारंपरिक ईंधन का विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह एक हरा ईंधन है जिसे बायोमास से भी उत्पादित किया जा सकता है। डीएमई की एक बहुत अच्छी उच्च संख्या है जिसका अर्थ है कि यह दबाव के तहत आसानी से प्रज्वलित कर सकता है। इस कारण इसे डीजल के एक आसान विकल्प के रूप में देखा गया है। इसे डीजल से चलने वाले वाहनों और ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आईआईटी कानपुर के डा. अविनाश कुमार अग्रवाल और प्रोफेसर तरूण गुप्ता ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर Imprint-2 के तहत डीएमई संचालित डीजल इंजनों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है, जिसे अब परियोजना के लिए 1.60 करोड़ रुपए की राशि से मान्यता दी गई है। टैफे इस परियोजना के साथ एक औद्योगिक भागीदार के रूप में जुड़ा हुआ है। एक औद्योगिक भागीदार के रूप में टैफे ने इस परियोजना के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता दी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि टैफे का उद्देश्य बेस डीजल इंजन में संशोधन करना है और इसे डीएमई अनुकूलन के लिए रेट्रोफिट कीट के लिए विकसित करना है। इस संशोधन के साथ मौजूद इंजनों को भी डीएमई पर चलाने के लिए बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ट्रैक्टर इंजन के एक प्रोटो टाइप का निर्माण करने की भी योजना बनाई है जो डीएमई द्वारा पूरी तरह से संचालित किया जाएगा। यह भी पढ़ें : जापानी कंपनी कुबोटा ने एस्कॉर्ट्स की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,042 करोड़ रुपए में खरीदेगी डीएमई के उपयोग से लाभ डीएमई पर चलने वाले ट्रैक्टर इंजन का विकास दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण के लिए दुनियाभर में शोध चल रहे हैं। डीएमई जैसा हरे रंग का ईंधन पर्यावरण संरक्षण में स्थायी विकास प्राप्त करने में मदद कर सकता है। डीएमई, एक गैर विषैला और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। इसलिए यह मिट्टी को जहर नहीं देगा, भले ही यह गलती से फैल जाए। यह पानी में नहीं डूबता है और मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं होता है, जो इसे ट्रैक्टरों पर उपयोग करने वाले किसानों को सुरक्षित बनाता है। जबकि डीजल रिसाव से मिट्टी खराब हो सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता बहुत प्रभावित होती है। जैसा कि टैफे अपने मौजूदा इंजनों को संशोधित करता है, किसान निकट भविष्य में ऐसे कई डीएमई चलने वाले वाहनों की उम्मीद कर सकते हैं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

जापानी कंपनी कुबोटा ने एस्कॉर्ट्स की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,042 करोड़ रुपए में खरीदेगी

जापानी कंपनी कुबोटा ने एस्कॉर्ट्स की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,042 करोड़ रुपए में खरीदेगी

नई दिल्ली। विश्व के करीब सौ देशों में ट्रैक्टर और मशीनरी बेचने वाली वैश्विक जापानी कंपनी कुबोटा कॉर्प भारत की प्रमुख ट्रैक्टर निर्माण कंपनी एस्कॉर्ट्स में 10 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। इस लेन-देन के पूरा होने पर, एस्कॉर्ट्स और कुबोटा भारतीय बाजार में एक अग्रणी खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। साथ ही वैश्विक बाजारों के लिए उत्पाद विकास, विनिर्माण और सोर्सिंग का एक केंद्र बनने के लिए भागीदार होंगे। यह जानकारी एस्कॉर्ट्स ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को विनियामक फाइलिंग में दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार एस्कॉर्ट्स तरजीही इश्यू के जरिए 12.2 मिलियन से अधिक इक्विटी शेयर कुबोटा को 850 रूपए प्रति इक्विटी शेयर निर्गम मूल्य पर जारी करेगा। गुरुवार 19 मार्च 2020 की शेयर कीमत पर यह 48.21 प्रतिशत प्रीमियम है। एस्कॉर्ट्स कंपनी की कुल इक्विटी पूंजी को अपरिवर्तित रखने के लिए एस्कॉर्ट्स लाभ और कल्याण ट्रस्ट द्वारा रखे गए शेयरों की एक समान संख्या को कम करेगा। इस सौदे के बाद कुबोटा के पास एस्कॉर्ट्स बोर्ड में दो गैर-कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों को नामित करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही एस्कॉर्ट्स भारत में कुबोटा की विपणन और बिक्री कंपनी कुबोटा कृषि मशीनरी इंडिया में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। कुबोटा और एस्कॉट्र्स का 60 : 40 का संयुक्त उपक्रम है, जिसे एस्कॉर्ट्स कुबोटा इंडिया कहा जाता है, यह अपने वर्तमान स्वरूप में ही कार्य करता रहेगा। एस्कॉर्ट्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक निखिल नंदा ने कहा कि साझेदारी एस्कॉर्ट्स को अभिनव समाधान प्रदान करने और लाभदायक वृद्धि के लिए उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगी। यह सहयोग घरेलू और निर्यात बाजारों के लिए अत्याधुनिक उत्पादों की पेशकश करने के लिए कुबोटा की अनुसंधान और विकास शक्तियो का लाभ उठाने के लिए है। नंदा ने कहा कि हमारी विनिर्माण विशेषज्ञता और मजबूत घरेलू वितरण के साथ कुबोटा के सहयोग से, हमारा उद्देश्य कृषि यंत्रीकरण के बाजार में अग्रणी बनने के अपने उद्देश्य तक पहुंचना है और खाद्य सुरक्षा चुनौती को संबोधित करना है। कुबोटा के अध्यक्ष और प्रतिनिधि निदेशक यूची किताओ ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी भारत और अन्य बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की मांग को पूरा करेंगी, जिन्हें अत्यधिक मशीनीकृत खेती की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए उच्च अंत प्रौद्योगिकी और नए युग के ट्रैक्टरों की आवश्यकता होती है। कुबोटा और एस्कॉर्ट्स, एक साथ संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए ताकत और प्रौद्योगिकी नवाचार उत्कृष्टता को मजबूत करेंगे। प्रमुख ट्रैक्टर निर्माताओं में से एक एस्कॉर्ट्स के मशीनरी खंड में फरवरी में सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत की वृद्धि की है और यह 8601 ट्रैक्टर रही है। इससे एक साल पहले की समान अवधि में घरेलू बिक्री 16.3 प्रतिशत बढक़र 8049 रही। उल्लेखनीय है कि जापान के कुबोटा कॉर्पोरेशन कृषि, जल और पर्यावरण उत्पादों को बनाने में माहिर हैं और 100 से अधिक देशों में उनकी मौजूदगी है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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