Indian tea exports to the world effectively 856.57 crore with a growth of 14 percent.

Indian tea exports to the world effectively 856.57 crore with a growth of 14 percent.

23 August, 2016

Last year, after record exports of Indian tea during the first quarter of the current financial year is also kept pace. Tea Board of India, the apex body of the industry figures compiled between April and June this fiscal, India's tea exports increased by 2.56 percent compared to the same period last year was 4.206 million kg. However, in value terms during the first quarter of the current financial year, Indian tea exports to the world effectively 856.57 crore with a growth of 14 percent in the same period last year was Rs 751.44 crore.
Last year, at Rs 183.23 per kg in April-June compared to the same period of the current fiscal over the tea export earnings increased 11 percent to Rs 203.65 per kg, with the. India tea exports in Germany, Bangladesh, Poland and the United Arab Emirates due to the huge demand from other countries has increased. One of India's largest tea producing companies from declaring a company official said, Shbart Tea Board of India in the past been able to benefit from the promotional efforts because Haksh
To increase per capita consumption of tea in the country owned by the Tea Board has prepared promotional initiatives. The board will spend Rs 54 crore. 29 crore for promotion in the domestic market and abroad has allocated Rs 25 crore for publicity. Every year in the country is expected to produce 120 million kg. India is the largest producer and consumer of black tea in the world, but is not at the forefront in terms of per capita consumption. Average per capita consumption of tea in India is ranked 43 in the global rankings. The country's per capita consumption is 730 grams, while the turkey 7.54 kg, 4.34 kg, in Morocco, in the UK, 2.74 kg and 1.01 kg, is Pakistan.
Sincerely: Punjab Kesari

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अब रायपुर में खोला जाएगा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र

अब रायपुर में खोला जाएगा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अच्छी खबर, स्थानीय स्तर पर फसलों की लागत के निर्धारण में होगी सहुलियत छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई हैं। खबर ये हैं कि अब इस राज्य के रायपुर जिले में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र खुलने जा रहा है। इससे यहां स्थानीय स्तर पर किसानों की फसलों का लागत मूल्य निर्धारण किया जा सकेगा। आज देश भर के अलग-अलग जगहों पर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के 16 केंद्र खुले हुए हैं। यह 17 वां केंद्र होगा जो रायपुर में खोला जाएगा। जानकारी के अनुसार भारत सरकार द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का क्षेत्रीय केंद्र खोलने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह केंद्र आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 से कार्य करना प्रारंभ कर देगा। इस केन्द्र के संचालन हेतु भारत सरकार द्वारा 25 पद भी स्वीकृत किए गए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 परियोजना के क्रियान्वयन हेतु केन्द्र सरकार से 10.75 करोड़ रुपए की मांग राज्य निर्माण के बाद से यहां किसानों द्वारा उत्पादित फसलों के लागत का आंकलन करने हेतु कोई केन्द्र नहीं था। अब तक जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्थित केन्द्र द्वारा ही छत्तीसगढ़ में फसल उत्पादन लागत का निर्धारण किया जा रहा था। विश्वविद्यालय विगत चार वर्षों से यहां इस केंद्र की स्वीकृति हेतु प्रयासरत था। अब केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों की खेती की लागत निर्धारण हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को एक परियोजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के संचालन हेतु समस्त राशि भारत सरकार की ओर से प्रदान की जाएगी। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा परियोजना संचालित करने हेतु सहमति एवं आवश्यक बजट का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया गया है। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु केन्द्र सरकार से 10.75 करोड़ रुपए की मांग की गई है। क्या है कृषि लागत एवं मूल्य आयोग और उसका काम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है। यह आयोग जनवरी1965 में अस्तित्व में आया। यह आयोग कृषि उत्पादों के संतुलित एवं एकीकृत मूल्य संरचना तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सलाह देता है। भारत सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, गेहूं, मक्का, ज्वार,बाजरा, जौ, रागी, सोयाबीन, अरहर, चना, उड़द, मूंग, मसूर, मूंगफली, तिल, रामतिल, सरसों, तोरिया, सूरजमुखी, कुसुम, गन्ना, कपास, जूट आदि फसलों की खरीदी की जाती है। इसके लिए प्रतिवर्ष आयोग द्वारा 23 कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह उचित एवं लाभकारी मूल्य की घोषणा की जाती है। गन्ने का मूल्य निर्धारण आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अनुमोदित किया जाता है। अब तक कहां-कहां खोले गए हैं कृषि लागत एवं मूल्य आयोग केंद्र समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण करने के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा देश के 16 राज्यों आंध्रप्रदेश, आसाम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचलप्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। अब केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़, झारखंड एवं तेलंगाना में नवीन केंद्रों की स्थापना के लिए मंजूरी दी गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के रायपुर में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग का 17वां केंद्र खुलने जा रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्याज की खेती : ये किस्में देगी अधिक पैदावार, बस इन बातों का रखें ध्यान

प्याज की खेती : ये किस्में देगी अधिक पैदावार, बस इन बातों का रखें ध्यान

प्याज की पूरे साल रहती है बाजार में मांग, मिलते हैं अच्छे भाव सब्जियों में आलू और प्याज हर मौसम में खाई जाने वाली सब्जी है। इसलिए इसकी साल के 12 महीने बाजार में मांग रहती है। प्याज को कच्चा सलाद के रूप में एकल या अन्य सब्जी के साथ पकाकर खाया जाता है। होटलों, ढाबों सहित घरों में इसका उपयोग कई तरीके की रेसीपी बनाने में किया जाता है। भारत में महाराष्ट्र में प्याज की खेती सबसे ज्यादा की जाती है। यहां साल मेें दो बार प्याज की फसल होती है- एक नवंबर में तो दूसरी मई के महीने के करीब होती है। भारत से कई देशों में प्याज का निर्यात किया जाता है। भारत से प्याज खरीदार देशों में नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांज्लादेश आदि प्रमुख है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्याज की खेती (Onion cultivation) सबसे ज्यादा कहां होती है हमारे देश के नासिक और राजस्थान के अलवर शहर का प्याज काफी पसंद किया जाता है। प्याज की फसल कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर अलग-अलग समय पर तैयार होती है। विश्व में प्याज 1,789 हजार हेक्टर क्षेत्रफल में उगाई जाती हैं, जिससे 25,387 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता है। भारत में इसे कुल 287 हजार हेक्टर क्षेत्रफल में उगाए जाने पर 2450 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। इसकी देश व विदेशों में इसकी अच्छी मांग होने के कारण इसे नकदी फसल में गिना जाता है। यदि किसान व्यवसायिक तरीके से इसकी खेती करे तो अधिक पैदावार के साथ ही भरपूर मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके लिए किसान को प्याज की उन्नत किस्मों की जानकारी होना बेहद जरूरी है जिससे वह अधिक उत्पादन और स्वाद से भरपूर किस्म का चुनाव कर अच्छा लाभ सके। आइए जानतें हैं प्याज की अधिक पैदावार देने वाली उन्नत किस्मों और इसकी खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातों के बारें में जिससे किसान भाई प्याज का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने में सफल हो सके। अधिक पैदावार देने वाली प्याज की उन्नत किस्में / प्याज की किस्में पूसा रतनार : इस किस्म के कंद बड़े थोड़े चपटे व गोल होते है, जो गहरे लाल रंग के होते है। पत्तियां मोमी चमक तथा गहरे रंग कि होती है। इसके कंदों को 3 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, रोपाई के 125 दिनों बाद खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। यह प्याज की उन्नत किस्म प्रति हेक्टेयर 400 से 500 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। हिसार- 2 : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद लाली लिए हुए, भूरे रंग के तथा गोल होते है। इसकी फसल रोपाई के लगभग 175 दिनों बाद खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके कंद कम तीखे होते है। यह प्रति हेक्टेयर 300 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। इस प्याज की इस उन्नत किस्म की भंडारण क्षमता भी अच्छी है। पूसा व्हाईट फ़्लैट : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद मध्यम से बड़े आकार के चपटे, गोल तथा आकर्षक सफ़ेद रंग के होते है। रोपाई के 125 से 130 दिन बाद में तैयार होने वाली किस्म है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी होती है। यह प्रति हेक्टेयर 325 से 350 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। पूसा व्हाईट राउंड : इस प्याज की उन्नत किस्म के कंद मध्यम से बड़े आकार के चपटे, गोल, और आकर्षक सफेद रंग के होते है। इस किस्म को सुखाकर रखने कि दृष्टि से विकास किया गया है। यह रोपाई के 125 से 130 दिनों बाद तैयार होती है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी है। यह प्रति हेक्टेयर 300 से 350 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। ब्राउन स्पेनिश : इस किस्म की प्याज के शल्क कंद गोल लंबे तथा लाल भूरे रंग के होते है, इसमें हलकी गंध आती है। यह किस्म सलाद के लिए उपयुक्त होती है। इसके कंद 165 से 170 दिनों में खुदाई के लिए तैयार हो जाते है। यह किस्म पर्वतीय क्षेत्रों में उगाने के लिए अत्यंत उपयुक्त सिद्ध हुई है। सुरक्षित रखने कि दृष्टि से यह दूसरी किस्मों कि अपेक्षा काफी अच्छी मानी गई है। अर्ली ग्रेनो : इस किस्म के कंद गोल आकार के, पीले, हलकी गंध युक्त वाले तथा सलाद के लिए उपयुक्त होते है व रोपाई के 95 दिनों बाद पूरे आकार के हो जाते है और 115 से 120 दिनों में पक जाते है। इस किस्म में फूल खिलने कि समस्या कम है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 500 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता कम होती है। एग्री फाउंड लाईट रेड : प्याज की यह किस्म सभी क्षेत्रों के लिए अच्छी सिद्ध हुई है, परन्तु महाराष्ट्र में नासिक और उसके आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से सफल है। इसके कंद हलके लाल रंग के होते है। यह 160 दिन में 300 से 325 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार दे सकती है। कल्याणपुर रेड राउंड : प्याज की यह किस्म उत्तर प्रदेश के लिए अच्छी मनी गई है। यह किस्म 130 से 150 दिन पककर तैयार हो जाती है। बात करें इसके प्राप्त उपज की तो इसकी 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल जाती है। लाइन- 102 : इस किस्म में कंद मध्यम से बड़े आकार के तथा लाल रंग के होते है। यह किस्म 130 से 135 दिन में तैयार हो जाती है और 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल सकती है। यह किस्म उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी गई है। पूसा रेड : इस के कंद मंझौले आकार के तथा लाल रंग के होते है, स्थानीय लाल किस्मों कि तुलना में यह प्याज की उन्नत किस्म कम तीखी होती है। इसमें फूल निकल आने कि समस्या कम होती है। रोपाई के 125 से 140 दिनों में तैयार होने वाली किस्म है, इसकी भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। उपज की दृष्टि से देखे तो इसकी प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। कंद का भार 70 से 90 ग्राम का होता है, गंगा के पठारों, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त किस्म है। एन- 257-1 : प्याज की यह किस्म के सफेद रंग के कंद वाली होती है। यह किस्म महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में रबी मौसम में उगाने के लिए अच्छी है। अर्का कल्याण : प्याज की इस किस्म के कंद गहरे गुलाबी रंग के होते है, जिनका औसतन वजन 100 से 190 ग्राम होता है। यह किस्म उत्तरी भारत के मैदानों, मध्य प्रदेश, बिहार, उडि़सा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक तथा तमिलनाडु में उगाने के लिए उपयुक्त बताई गई है। रबी प्याज की खेती / खरीफ प्याज की खेती एन- 257-1 : प्याज की यह किस्म के सफेद रंग के कंद वाली होती है। यह किस्म महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में रबी मौसम में उगाने के लिए अच्छी है। अर्का प्रगति : यह दक्षिण भारत में रबी तथा खरीफ दोनों मौसमों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है। इसके कंद गुलाबी रंग के होते है। यह 140 से 145 दिन बाद 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देती है। एन- 53 : प्याज की इस किस्म के कंद गोल, हलके लाल सुडौल, कम तीखे होते है। इसकी एक गांठ का औसत वजन 80 से 120 ग्राम तक होता है, खुदाई के समय इसकी गांठ हलके बैंगनी रंग कि होती है जो बाद में गहरे लाल रंग कि हो जाती है। इस किस्म को रबी तथा खरीफ दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है, किन्तु उत्तरी भारत में खरीफ मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त पाई गई है। यह फसल 150 से 165 दिनों में खुदाई हेतु तैयार हो जाती है। रबी में 200 से 250 तथा खरीफ में 150 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल सकती है। अर्का निकेतन : इस प्याज की उन्नत किस्म को खरीफ व रबी दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है। इसकी फसल 145 दिन में तैयार हो जाती है। इसके कंद का वजन 100 से 180 ग्राम का होता है। यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा तमिलनाडु में उगाने के लिए उपयुक्त मानी गई है। इसकी प्रति हेक्टेयर 325 से 350 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। इसके कंदों को 3 महीने तक भंडारित किया जा सकता है। अधिक पैदावार देने वाली प्याज की कुछ संकर किस्में वी एल- 76 : यह एक संकर किस्म है, इस किस्म के कंद बड़े तथा लाल रंग के होते है। यह तराई क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है। रोपाई के बाद 175 से 180 दिनों में कंद खुदाई के लिए तैयार हो जाते है। यह प्रति हेक्टेयर 350 से 400 क्विंटल तक पैदावार देती है। अर्का कीर्तिमान : यह संकर किस्म है। इसके कंदों को काफी समय तक भंडारित किया जा सकता है। यह निर्यात के लिए अच्छी किस्म है। अर्का लाइम : यह भी प्याज की संकर किस्म है। इसके कंद लाल रंग के होते है। इसकी भंडारण क्षमता भी अधिक होती है। यह किस्म भी निर्यात के लिए अच्छी किस्म है। प्याज उगाते समय में इन बातों का रखें ध्यान / प्याज की खेती का समय प्याज की बुवाई करते समय भूमि से 10 सेमी. ऊंची क्यारियां बनाकर बुवाई करनी चाहिए। इसके बाद बीज को ढक देना चाहिए। आद्र्र गलन का रोग पौधों में न लग पाए इसके लिए क्यारियों में 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण का छिडक़ाव करना चाहिए। प्याज की कतार 15 सेमी., पौधे 10-15 सेमी. ऊंचे हो जाएं तब खेत में रोपण करना चाहिए। अधिक उम्र के पौधे या जब उनमें जड़ वाला भाग मोटा होने लगे, तब इसे नहीं लगाना चाहिए। इसकी के लिए खेत की तैयारी आलू के समान ही की जानी चाहिए। पौध रोपण के तुरंत बाद ही सिंचाई जरूर करनी चाहिए। प्याज के पौधों की कतारों के मध्य पुआल या सूखी पत्तियां बिछा देनी चाहिए जिससे सिंचाई की बचत होती है। फूल आना या बोल्टिंग- कन्द के लिए ली जाने वाली फसल में फूल आना उचित नहीं माना जाता है, इससे कन्द का आकार घट जाता है। अत: आरंभ में ही निकलते हुए डंठलों को तोड़ देना चाहिए। प्याज के लिए कुल 12-15 सिंचाई की आवश्यकता होती है, 7-12 दिन के अन्तर से भूमि के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। पौधों का सिरा जब मुरझाने लगे, यह कन्द पकने के लक्षण हैं, इस समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए। जब पत्तियों का ऊपरी भाग सूखने लगे तो उसे भूमि में गिरा देना चाहिए जिससे प्याज के कन्द ठीक से पक सकें। खुदाई करने में कन्द को चोट या खरोंच नहीं लगनी चाहिए। प्याज के छोटे आकार के कंदों में बड़े आकार की तुलना में संग्रहण क्षमता अधिक होती है। वहीं मोटी गर्दन वाले कंद संग्रहण में शीघ्र ही खराब होने लगते हैं। फसल में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक अधिक देने से कंदों की संग्रहण क्षमता कम हो जाती है। इसलिए इसका आवश्यकता से ज्यादा प्रयोग नहीं करें। वहीं फॉस्फोरस और पोटाश का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव इस पर नहीं पड़ता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मूंगफली की सरकारी खरीद : नेफैड 5,275 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीदने को तैयार

मूंगफली की सरकारी खरीद : नेफैड 5,275 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीदने को तैयार

किसान एक नवंबर से करा सकेंगे पंजीकरण, 18 नबंवर से शुरू होगी मूंगफली की खरीद राजस्थान के किसानों के लिए खुशी की खबर है। सरकारी एजेंसी नेफैड किसानों से समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीदने को तैयार हो गया है। नेफैड 18 नवंबर से मूंगफली की खरीद शुरू करेगा। अभी कुछ दिनों पहले नेफैड ने राजस्थान के किसानों से मूंगफली खरीदने को लेकर असमर्थता प्रकट की थी। इसके बाद राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार व नेफैड से प्रदेश के किसानों से मूंगफली की खरीद समर्थन मूल्य पर करने का आग्रह किया था। इसके बाद नेफैड ने मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद को मंजूरी देते हुए राजस्थान के किसानों को राहत प्रदान की है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीद के लिए पंजीकरण बता दें कि राजस्थान में मूंगफली की खरीद के लिए 20 अक्टूबर से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी, लेकिन इसी बीच नेफैड ने अपने गोदामों में जगह खाली नहीं होने का हवाला देते हुए मूंगफली की खरीद के लिए असमर्थता जताई थी। इसके बाद राजस्थान में मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब चूंकी नेफैड ने मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद को हरी झंडी दे दी है। इसी के साथ मूंगफली खरीद के लिए पंजीकरण कराने की प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू कर दी जाएगी। पूर्व में अन्य फसल का पंजीकरण कराने वाले किसान भी करा सकेंगे पंजीयन सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने मीडिया को दी गई जानकारी में बताया कि नेफैड एवं भारत सरकार से वार्ता के बाद अब किसान 1 नवंबर से मूंगफली बेचान के लिए ई-मित्र या खरीद केन्द्रों से पंजीयन करा सकेंगे। राज्य में समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद 18 नवंबर से आरंभ की जाएगी। 1 नवंबर से मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की खरीद के लिए 20 अक्टूबर से पंजीयन प्रारंभ कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा पूर्व में भी किसी अन्य जिंस का पंजीयन कराया जा चुका है तो वह किसान भी मूंगफली का पंजीयन करा सकते हैं। पहले पंजीकरण किए गए थे स्थगित नेफैड के मूंगफली खरीदने से इनकार करने के बाद राजस्थान में मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए किए जाने वाले पंजीकरण को स्थगित कर दिया गया था। जिससे किसान सिर्फ मूंग, उड़द, एवं सोयाबीन का ही पंजीकरण करवा पा रहे थे परन्तु अब नाफैड ने समर्थन मूल्य पर मूंगफली को भी मंजूरी दे दी है। इसी के साथ पुन: पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। बता दें कि किसान को अपनी किसी भी फसल का समर्थन मूल्य पर विक्रय के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य हैं। पंजीकरण के अभाव में किसान की मूंगफली सहित अन्य उपज नहीं खरीदी जाएगी। मूंगफली उपज विक्रय के लिए कहां और कब कराएं पंजीकरण किसान ई-मित्र केंद्र एवं खरीद केन्द्रों पर प्रात: 9 बजे से सायं 7 बजे तक पंजीकरण करवा सकते है। किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगें। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिस तहसील में कृषि भूमि है उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केन्द्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण कराएं। दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नहीं होगा। किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाइल नंबर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके। किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो। मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए ये दस्तावेज होंगे देने किसान को पंजीकरण केंद्रों पर अपने साथ जनआधार कार्ड नंबर, खसरा नंबर, गिरदावरी की प्रति, बैंक पासबुक की प्रति ले जानी होगी। किसानों को यह दस्तावेज पंजीकरण फार्म के साथ अपलोड करने होंगे। जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जाएगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए मान्य नहीं होगा। यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किए जाते हैं या तहसील के बाहर पंजीकरण किए जाते है तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब किसान के खातें में आ सकते हैं 11,000 रुपए

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब किसान के खातें में आ सकते हैं 11,000 रुपए

खाद खरीदने के लिए सरकार देगी 5000 रुपए सालाना, कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने की केंद्र सरकार से सिफारिश किसानों के लिए एक खुश खबर आई हैं। सरकार किसान को खाद खरीदने के लिए पैसा उनके खाते में देने की तैयारी में हैं। खबर है कि खाद खरीदने के लिए सरकार किसानों को 5000 रुपए की रकम सालाना देने वाली है जिसे दो किस्तों मेें भुगतान किया जाएगा। ये रकम पीएम किसान योजना में मिलने वाली 6000 रुपए से अलग होगी। यानि अब किसान को सरकार की ओर से सालाना कुल मिलकर 11,000 रुपए की मदद की जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा सकता है क्योंकि सरकार चाहती है कि खाद यूरिया बेचने वाली कंपनियों को सरकार जो सब्सिडी देती है वो सीधी किसान के खाते में जाए जिससे किसान स्वयं यूरिया खाद की खरीद कर सके। क्योंकि देखने में आया है कि सरकार की ओर से यूरिया खाद कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है उसके बाद भी किसान को यूरिया खाद के लिए किल्लत का सामना करना पड़ता है। वहीं इसकी कालाबाजारी होने से किसान को ऊंचे दामों में यूरिया खरीदना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास सरकार द्वारा किए जा रहे हैं जिससे किसान भाइयों को फायदा होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सीएसीपी ने केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ( एग्रीकल्चर कोस्ट एंड प्राइज कमीशन (सीएसीपी)) ने केंद्र सरकार से किसानों को सीधे 5000 रुपए सालाना खाद सब्सिडी के तौर पर नकद देने की सिफारिश की है। आयोग चाहता है कि किसानों को 2,500 रुपए की दो किश्तों में भुगतान किया जाए। पहली किश्त खरीफ की फसल शुरू होने से पहले और दूसरी रबी की शुरुआत में दी जाए। केंद्र सरकार ने सिफारिश मान ली तो किसानों के पास ज्यादा नकदी होगी, क्योंकि सब्सिडी का पैसा सीधे उनके खाते में आएगा। हर साल सरकार खाद सब्सिडी पर करती है 80 हजार करोड़ खर्च उर्वरक सब्सिडी के लिए सरकार सालाना लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम करती है। 2019-20 में 69418.85 रुपए की उर्वरक सब्सिडी दी गई। जिसमें से स्वदेशी यूरिया का हिस्सा 43,050 करोड़ रुपए है। इसके अलावा आयातित यूरिया पर 14049 करोड़ रुपए की सरकारी सहायता अलग से दी गई। छह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, 2 सहकारी और 37 निजी कंपनियों को यह सहायता मिली है। इसके बावजूद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाती है। सब्सिडी देने के बाद भी किसान को महंगे दामों पर यूरिया की खरीदना पड़ता है। खाद सब्सिडी को लेकर क्या है सरकार की योजना केंद्र सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए किसानों को उर्वरक की सब्सिडी सीधे उनके बैंक अकाउंट में देने पर विचार कर रही है। किसानों के खाते में नकद सब्सिडी जमा कराने के लिए 2017 में ही नीति आयोग की एक विशेषज्ञ समिति गठित कर दी गई थी लेकिन अब तक इस पर ठोस काम नहीं हो पाया। लेकिन अब सीएसीपी की सिफारिश के बाद नई व्यवस्था लागू होने की उम्मीद जग गई है। अब सरकार चाहती है कि ये पैसा किसान को सीधा पहुंचाया जाए जिससे वह स्वयं खाद की खरीद कर सके। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही एक कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि इन यूरिया कंपनियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी को समाप्त करके उस पैसे को किसान के खाते में डाल दिया जाए जिससे किसान खुद खाद खरीद सके और इन कंपनियों का सब्सिडी खाने का खेल खत्म हो जाए। उन्होंने कहा था कि मैं केंद्र सरकार के समक्ष इस बात को रखूंगा। इन सब बातों से लगता है कि केंद्र सरकार भी अब यूरिया कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी को सीधा किसानों को दिया जाएगा। किसानों को रकबा के हिसाब दिया जाए पैसा मीडिया में प्रसारित व प्रकाशित खबरों के अनुसार राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद का कहना है कि सरकार खाद सब्सिडी खत्म करके रकबे के हिसाब से उसका पूरा पैसा किसानों के अकाउंट में दे दे तो यह अच्छा होगा। लेकिन अगर सब्सिडी खत्म करके उस पैसे का कहीं और इस्तेमाल करेगी तो किसान इसके विरोध में उतरेंगे। जितना पैसा उर्वरक सब्सिडी के रूप में कंपनियों को जाता है उतने में हर साल सभी 14.5 करोड़ किसानों को 6-6 हजार रुपये दिए जा सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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