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भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति : प्राकृतिक खेती के लिए 8 राज्यों को मिले 45 करोड़ रुपए

भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति : प्राकृतिक खेती के लिए 8 राज्यों को मिले 45 करोड़ रुपए

जानें, क्या है बीपीकेपी योजना और इसके लाभ?

प्राकृतिक खेती प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महती योजना प्रस्तुत की है। जिसका नाम भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) है। यह योजना प्राकृतिक खेती सहित पारंपरिक स्वदेशी प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए 2020-21 से परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) की उप योजना के रूप में पेश की गई है। इसके तहत इस वित्तीय वर्ष केंद्र सरकार ने 8 राज्यों के लिए 45 करोड़ रुपए दिए हैं। 

 

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क्या है भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) योजना?

परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी) के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। बीपीकेपी योजना का उद्देश्य पारंपरिक स्वदेशी प्रथाएं जो बाहरी रूप से खरीदे गए आदानों को कम करती हैं को बढ़ावा देना है। यह काफी हद तक ऑन-फार्म बायोमास रीसाइक्लिंग पर आधारित है, जो बायोमास मल्चिंग, ऑन-फार्म गाय गोबर-मूत्र का उपयोग; आवधिक मिट्टी का मिश्रण और सभी सिंथेटिक रासायनिक आदानों का बहिकार पर मुख्य जोर देता है। बीपीकेपी योजना मुख्य रूप से सभी सिंथेटिक रासायनिक आदानों के बहिष्कार पर जोर देती है और  कृषि बायोमास रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देती है। गोबर-मूत्र के मिश्रण  का उपयोग, भूमि की तैयारी के समय उपयोग आदि बातों को महत्व देती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों का कम से कम इस्तेमाल पर जोर देना है ताकि शून्य बजट पर खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा सके। 

 


बीपीकेपी के तहत सरकार से कितनी मिलती है वित्तीय सहायता?

बीपीकेपी के तहत, क्लस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा प्रमाणीकरण और अवशेष विश्लेषण के लिए 12200 /- रुपए प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता प्रथम 3 वर्ष तक दी है। अब तक, प्राकृतिक खेती के तहत 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित देश भर के 8 राज्यों में 4587.17 लाख रुपए जारी किए गए हैं।


क्या है प्राकृतिक खेती प्रणाली और कब शुरू हुई?

प्राकृतिक खेती एक केमिकल-मुक्त अथवा पारंपरिक खेती विधि है। इसे कृषि-पारिस्थितिकी आधारित कृषि प्रणाली माना जाता है जो फसलों, पेडों और पशुधन को कियात्मक जैव विविधता के साथ एकीकृत करती है। प्राकृतिक खेती की शुरुआत एक जापानी किसान, मासानोबू फुकुओका द्वारा की गई  थी, जो एक प्राकृतिक चक्र और प्राकृतिक दुनिया की प्रक्रियाओं के साथ काम करने के दर्शन पर आधारित है। 

 


प्राकृतिक खेती से छोटी जोत के किसानों को मिलेगी मदद

एचएलपीई की रिपोर्ट अनुसार, प्राकृतिक खेती से खरीदे गए आदानों पर निर्भरता कम होगी और छोटी (जोत के) किसानों के ऋण के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। बीपीकेपी योजना पीजीएस इंडिया कार्यक्रम के तहत पीजीएस-इंडिया सर्टिफिकेशन  के अनुरूप है। इस वित्तीय केंद्र सरकार ने बीपीकेपी योजना के लिए 8 राज्यों को करीब 45 करोड़ की राशि प्रदान की है। 


बीपीकेपी योजना की अब तक की प्रगति

भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम को मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और केरल राज्य में अपनाया गया है। कई अध्ययनों में भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम की प्रभावशीलता अर्थात् उत्पादन में वृद्धि, स्थिरता, जल उपयोग की बचत,  मृदा स्वास्थ्य में सुधार और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के मामले में प्राकृतिक कृषि की सूचना दी गई है। इसे रोजगार संवर्धन और ग्रामीण के अवसर के साथ लागत प्रभावी कृषि पद्धतियों के रूप में माना जाता है। नीति आयोग ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के साथ मिलकर प्राकृतिक कृषि पद्धतियों पर वैश्विक विशेषज्ञों के साथ कई उच्च स्तरीय विचार-विमर्श किए जिसमें मोटे तौर पर यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में करीब 2.5 मिलियन किसान पहले से ही पुनरुत्पादक कृषि अपना रहे  हैं। अगले 5 सालों मे, इसे प्राकृतिक खेती सहित जैविक खेती के किसी भी रूप में, 20 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है - जिसमें से बीपीकेपी के अधीन 12 लाख हेक्टेयर है। भारत ने जैविक खेती को बढ़ावा देकर महत्वपूर्ण छाप छोड़ी है। बता दें कि विश्व की जैविक खेती के संदर्भ में भारत का 9 वां स्थान है। भारत में जैविक खेती का रकबा 1.94 लमलियन हेक्टेयर क्षेत्र है। वहीं उत्पादकों की संख्या के संदर्भ में पहला (उत्पादक का 11.49 किसान) था, 2020 के आंकडों के अनुसार कुल निर्यात मूल्य 757.49 मिलियन अमेरिकी डालर है। 


केंद्र सरकार द्वारा बीपीकेपी योजना के लिए राज्य वार जारी राशि 

क्रमांक राज्य  क्षेत्रफल (हेक्टेयर)   राशि (लाख में)
1. आंध्र प्रदेश   100000    750.00
2. छत्तीसगढ़  85000 1352.52
3. केरल 84000  1336.60
4. हिमाचल प्रदेश  12000 286.42
5. झारखंड 3400 54.10
6.  उड़ीसा 24000 381.89
7. मध्य प्रदेश 9900  393.82
8. तमिलनाडु 2000 31.82
कुल                               409400 4587.17

 

 

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