हाइब्रिड धान ने बदली महिला किसानों की किस्मत

हाइब्रिड धान ने बदली महिला किसानों की किस्मत

Posted On - 07 Nov 2020

तीन वर्ष की अवधि का है हाइब्रिड धान की खेती का प्रशिक्षण

बिहार और झारखंड में महिला किसानों को हाईब्रिड धान की खेती की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वैश्विक कृषि कंपनी कोर्टेवा एग्रीसाइंस महिला किसानों की सहायता कर रही है। दरअसल में यह कपंनी अपने संकर (हाईब्रिड) बीज व एवं उत्पादों को इन किसानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। कंपनी की योजना के अनुसार महिला किसानों को हाईब्रिड बीज उगाने तथा रोपाई के बाद की देखभाल के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया है। कंपनी द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण की अवधि तीन वर्ष है। इन तीन वर्षों के दरम्यान कंपनी की ओर से यहां के किसानों को हाईब्रिड बीज से खेती करने की तकनीक सिखाई जाएगी। मीडिया  में प्रकाशित खबरों के अनुसार वैश्विक कृषि कंपनी कोर्टेवा एग्रीसाइंस की ओर से बिहार और झारखंड में करीब 90,000 महिला किसानों को संकर बीज उगाने तथा रोपाई के बाद की देखभाल के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया है। पहले ये महिलाएं खुद से तैयार किए गये धान बीज (इनब्रेड राइस) का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन अब कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए हाईब्रिड बीज का इस्तेमाल करती है जिससे उनको काफी लाभ मिला है। 

 

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क्या है हाइब्रिड बीज

कृषि के संदर्भ में हाईब्रिड बीज वे बीज कहलाते हैं जो दो या अधिक पौधों के संकरण (क्रास पालीनेशन) द्वारा उत्पन्न होते हैं। संकरण की प्रक्रिया अत्यंत नियंत्रित व विशिष्ट होती है। संक्षेप में कहे तो अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए शोध द्वारा बीजों के गुणों में विकास कर तैयार किए गए बीज को ही हाईब्रिड बीज या संकर बीज कहा जाता है। 

 


महिलाओं को बताई धान बुवाई की डीएसआर तकनीक

बिहार और झारखंड में महिलाओं को दिए जा रहे प्रशिक्षण के तहत उन्हें धान की बुवाई की डीएसआर तकनीक बताई जा रही है। कोर्टेवा एग्रीसाइंस की विपणन निदेशक (दक्षिण एशिया) अरुणा राचकोंडा ने मीडिया में दी जानकारी में बताया कि इन महिला किसानों ने प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2020-21 के चालू खरीफ सत्र में लगभग 10,000 एकड़ में संकर धान के बीज बोए हैं। उन्होंने कहा कि 90,000 महिला किसानों में से लगभग 20 प्रतिशत अब डीएसआर तकनीक में प्रशिक्षित हो चुकी हैं। जिसे कंपनी एक टिकाऊ प्रारूप में बढ़ावा दे रही है। भारत में हम यांत्रिक बुवाई मशीन को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो ट्रैक्टर पर रखा जाता है। हम बताते हैं कि एक एकड़ के लिए कितने बीजों की आवश्यकता होती है। बिहार और झारखंड में तीन साल की अवधि के लिए अलग से महिला किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।


क्या है धान बुवाई की डीएसआर तकनीक

डीएसआर तकनीक में धान की पौध तैयार कर उसकी रुपाई के बजाय सीधा बीज बोया जाता है। धान डीएसआर तकनीक के नए प्रत्यक्ष में खेत को पहले लेजर लैंड लेवलर द्वारा समतल किया जाता है। इसके बाद सिंचाई (रौणी) की जाती है और जब खेत तार (मिट्टी की अच्छी नमी) की स्थिति तक पहुंच जाता है, जब खेत को तैयार किया जाता है। धान के बीज को तुरंत ट्रैक्टर संचालित लकी बीज ड्रिल के साथ बोया जाता है जो सीधी बुवाई के लिए एक ही समय में चावल और खरपतवारनाशी का छिडक़ाव करता है। यदि यह मशीन उपलब्ध नहीं है, तो जीरी के बीज ड्रिल मशीन से भी बुवाई का काम किया जा सकता है। 


बिहार व झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी किसानों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण

कोर्टेवा एग्रीसाइंस की विपणन निदेशक (दक्षिण एशिया) अरुणा राचकोंडा के अनुसार कंपनी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के अन्य धान उत्पादक क्षेत्रों में इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जहां पुरुष और महिला किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। बिहार और झारखंड में तीन साल की अवधि के लिए अलग से महिला किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा कंपनी की ओर से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के अन्य चावल उगाने वाले बेल्टों में इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जहां पुरुष और महिला दोनों किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।


इधर वैज्ञानिक, महिलाओं को सिखा रहे हैं सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीक

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार, वैज्ञानिक डॉ. यू. एस. धाकड़, वैज्ञानिक एस.के. सिंह एवं डॉ. आर. के. प्रजापति द्वारा विगत दिवस गांव माडूमार में महिलाओं को उन्नत तकनीक से सब्जी उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया गया। वैज्ञानिकों ने गोभी वर्गीय फूलगोभी एवं पत्तागोभी की उन्नत किस्मों, ऊंची क्यारी बनाकर रोपणी तैयार करना, उचित मात्रा में उर्वरको का उपयोग एवं निराई-गुड़ाई व सिंचाई का उचित समय के बारे में विस्तार से बताया गया। फूलगोभी का गुणवत्तायुक्त फूल पैदा करने में सूक्ष्म पोषक तत्वों के बारे में बताया गया और सफेद फूल प्राप्त करने के लिए फूल के ऊपर की पत्तियों को आपस में बॉध देवे, गोभियों में पत्ती खाने वाली इल्लियों एवं रस चूसक कीड़ों के नियंत्रण के बारे में रासायनिक एवं जैविक दवाओं के बारे में भी बताया गया। महिलाओं ने सब्जीत्पादन में आने वाली समस्याओं से अवगत कराया।


सब्जी की खेती में आने वाली समस्याओं पर दी सलाह

सब्जी की खेती में शुरुआती अवस्था में लागत अधिक आती है उस समय पूंजी की व्यवस्था करना कठिन कार्य होता है और सब्जियों का उच्च गुणवत्ताबीज नहीं मिल पाता है कई बार बीज खराब निकल जाता है जिससे पूरी मेहनत एवं लागत बेकार चली जाती है और कई बार कीड़े बीमारी से भी नुकसान हो जाता है। इन समस्याओं के समाधान हेतु वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि आप कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क/जानकारी लेकर बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर मुख्यमंत्री की योजना से बिना ब्याज के खेती के लिए राशि प्राप्त करें और उन्नत किस्म का बीज खरीदने और कीड़े-बीमारियों के उचित नियंत्रण हेतु सही दवा खरीदने के पहले कीट व रोगग्रस्त पौधे को लेकर वैज्ञानिक एवं उद्यानिकी अधिकारियों से परामर्श लेकर विश्वसनीय दुकान से बीज एवं दवाएं खरीदें। 

 

 

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