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सरकारी खरीद होगी ज्यादा, किसानों को होगा अधिक मुनाफा

सरकारी खरीद होगी ज्यादा, किसानों को होगा अधिक मुनाफा

मोदी सरकार ने बढ़ाया 14 फसलों का समर्थन मूल्य

किसान भाइयों का ट्रैक्टर जंक्शन में आपका स्वागत है। आज हम लाएं है आपके लिए एक खुश खबर। जी हां, मोदी सरकार ने किसानों से किया हुआ अपना वादा पूरा करते हुए प्रमुख 14 फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है। इससे किसानों को अपनी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सकेगा जिससे किसानों को अधिक फायदा होगा। आइए जानते हैं सरकार ने कौन-कौनसी फसल के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है और  कितनी। 

कोरोना संक्रमण काल के बीच सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को मानते हुए खरीफ की फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि का फैसला लिया और 14 फसलों के समर्थन मूल्य तय कर दिए। इसमें सरकार ने एमएसपी में फसल की लागत का 50 से लेकर 83 फीसदी तक मुनाफे में वृद्धि की गई है जो अलग-अलग फसलों के लिए अलग-अलग तय की गई है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार अब सरकार धान 1868 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल लागत पर 50 फीसदी लाभ मिलना चाहिए। मोदी सरकार इसी नीति पर काम कर रही है। सरकार ने 2018-19 में ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। 

 

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सबसे कम धान में 53 रुपए की बढ़ोतरी- 

धान- अनाज फसलों में प्रमुख रूप से शामिल धान के समर्थन मूल्य में सरकार ने सबसे कम बढ़ोतरी की है। सरकार ने फसल वर्ष 2020-21 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 53 रुपए बढ़ाकर 1,868 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसका एमएसपी 1,815 रुपए प्रति क्विंटल था। वहीं ए-ग्रेड धान का 2020-21 के लिए 1,888 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य निर्धारित किया गया है जो 2019-20 में 1,835 रुपए प्रति क्विंटल था। अब धान की फसल के बेचने पर किसान को प्रति क्विंटल के हिसाब से 53 रुपए का अधिक फायदा होगा।

 

 

ज्वार- सरकार ने ज्वार के समर्थन में 70 रुपए की वृद्धि की है। इससे ज्वार (हाइब्रिड) का अब एमएसपी 2,620 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा जो पहले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2,550 रुपए प्रति क्विंटल था। इसी प्रकार ज्वार (मालदानी) का समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,640 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जो पिछले वर्ष 2019-20 में 2,570 रुपए प्रति क्विंटल था। इससे किसान को अब ज्वार की फसल बिक्री पर 70 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से फायदा होगा।

बाजारा- बाजरा की फसल में सरकार द्वारा इसके समर्थन मूल्य में 150 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इससे अब किसान प्रति क्विंटल बाजरे की फसल बेचने पर 150 रुपए का मुनाफा होगा। सरकार ने बाजरे का समर्थन मूल्य जो वर्ष  2019-20 में 2,000 रुपए था इसे बढ़ाकर 2,150 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। 
रागी- रागी के मूल्य में 145 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पहले रागी का मूल्य वर्ष 2019-20 में 3,150 रुपए तय किया गया था जिसे वर्ष 2020-21 के लिए 3,295 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

मक्का- मक्का की फसल में 90 रुपए की प्रति क्विंटल की दर से वृद्धि करते हुए इसका समर्थन मूल्य 1,850 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। जो पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,760 रुपए प्रति क्विंटल था। 

 

दलहन फसलों में के समर्थन मूल्य में 300 रुपए तक की बढ़ोतरी- 

दलहन फसलों में तूअर और मूंग के समर्थन मूल्य में 58 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। तूअर में 200 रुपए व उड़द में 300 रुपए की वृद्धि की गई है। तूअर का समर्थन मूल्य अब 6,000 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जो पिछले साल 5,800 रुपए प्रति क्विंटल था। वहीं उड़द का समर्थन मूल्य 5,700 रुपए से बढ़ाकर 6,000 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 300 रुपए अधिक है। वहीं मूंग दल का समर्थन मूल्य 7,196 तय किया गया है जो पिछले 7,050 रुपए प्रति क्विंटल था। 

 

मूंगफली में 185 रुपए तो तिल में 755 रुपए तक की वृद्धि- 

तिलहन फसलों में सरकार ने मूंगफली की फसल पर 185 रुपए, सूरजमुखी बीज पर 235 रुपए, सोयाबीन पर 170 रुपए, तिल पर 370 रुपए व रामतिल पर 755 रुपए तक प्रति क्विंटल की दर से वृद्धि की है। इससे अब मूंगफली का समर्थन मूल्य 5,275 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा जो पिछले 5,090 रुपए प्रति क्विंटल था। वहीं सूरजमुखी बीज जो पहले 5,650 रुपए प्रति क्विंटल था अब इसका समर्थन मूल्य 5,885 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसी प्रकार सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3,880 रुपए तय किया गया है जो पहले 3,710 रुपए प्रति क्विंटल था। तिल का समर्थन मूल्य 6,855 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है जो पहले 6,485 रुपए प्रति क्विंटल था। इसी प्रकार राम तिल में सबसे ज्यादा 755 रुपए की वृद्धि कर इसका समर्थन मूल्य 6,695 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है इससे पहले इसका समर्थन मूल्य 5,940 रुपए प्रति क्विंटल था। 

 

कपास का समर्थन मूल्य 260-275 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ाया- 

कपास के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करते हुए कपास (मध्यम रेशा) 260 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बढक़र 5,515 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पिछले फसल वर्ष में यह 5,255 रुपए प्रति क्विंटल था। इसी प्रकार कपास (लंबा रेशा) में 275 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। अब इस कपास का समर्थन मूल्य 5,825 रुपए प्रति क्विंटल होगा जबकि पहले इसका समर्थन मूल्य 5,550 रुपए प्रति क्विंटल था।

 

न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है, इससे किसान को क्या फायदा-

साधारण भाषा में समर्थन मूल्य वह होता है जिस मूल्य पर सरकार किसान की फसल खरीदती है। किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार हर वर्ष समर्थन मूल्य की घोषित करती है। इसमें सरकार फसलों के समर्थन मूल्य तय कर देती है। इससे किसान को यह फायदा होता है कि अगर बाजार में फसल के भाव गिर जाए तो भी सरकार तय समर्थन मूल्य ही किसानों से फसल खरीदती है जिससे किसान को नुकसान नहीं हो। समर्थन मूल्य तय करने के पीछे सरकार का उद्देश्य किसानों को फसल से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है।

 

 

दाम अधिक मिलने से सरकारी खरीद बढ़ेगी- 

सरकार ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। सरकार के फैसले से देश के किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा। अब किसान बढ़े हुए मूल्य पर फसल को बेचकर अधिक मुनाफा कमा सकेंगे जिससे उनका आर्थिक स्तर ऊंचा होगा। वहीं समर्थन मूल्य अब अधिक मिलने पर किसान भी अपनी फसल इस मूल्य पर बेचने के प्रति आकर्षित होगा। इससे सरकारी खरीद में बढ़ोतरी होगी। 

 

बिचौलियों की भूमिका होगी कम - 

सरकारी समर्थन मूल्य पर अच्छा दाम मिलने पर किसान अब अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेचना चाहेगा। इससे बिचौलिए कम मूल्य पर किसानों से फसल खरीदने में कामयाब नहीं हो पाएंगे। इसका फायदा यह होगा कि किसान को बाजार में भी फसल के ऊंचे दाम मिल पाएंगे। इस प्रकार सरकार किसी भी प्रकार से किसान को उसकी फसल की उचित कीमत दिलवाने की कोशिश कर रही है ताकि किसान को फायदा हो सके। 


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