चारे की महंगाई 9 साल के उच्चतम स्तर पर, दूध की कीमतों पर पड़ेगा असर

प्रकाशित - 04 Oct 2022

चारे की महंगाई 9 साल के उच्चतम स्तर पर, दूध की कीमतों पर पड़ेगा असर

पशुपालक किसान भारी परेशान, गेहूं की कीमतों के समीप पहुंचे चारे के भाव

इस साल मानसून की अनियमितता ने किसानों को कई तरह से नुकसान पहुंचाया है। कहीं अधिक बारिश से फसलें बर्बाद हो गई तो कहीं सूखे के कारण फसलों की बुवाई ही नहीं हो पाई। कई राज्यों में जब फसले कटने के लिए तैयार हुई तो बेमौसम की बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। इससे खेत में खड़े बाजरे की फसल की क्वालिटी खराब हो गई वहीं बाजरे की कड़बी (पशु चारा) भी किसी काम की नहीं रही। ऐसे में पशुपालक किसानों के सामने पशु चारे का संकट खड़ा हो गया है। देशभर में पशुचारे की कमी के समाचार सामने आ रहे हैं। चारे की महंगाई 9 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। गेहूं की भूसे की कीमत 700 से 800 रुपए प्रति मण (40 किलो) पहुंच गई है। जो पिछले सीजन में अधिकतम 400-450 रुपए प्रति मण पहुंच गई थी। चारे में उच्चतम महंगाई के कारण दूध की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। भविष्य में दाम बढ़ने की और संभावना है। 

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राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व गुजरात के किसान सबसे ज्यादा परेशान

देश के जिन राज्यों में बाजरे की फसल होती वहां के किसान बाजरे का उपयोग तो भोजन में करते हैं। वहीं बाजरे की कड़बी का उपयोग पशुचारे के रूप में किया जाता है। कड़बी को पशुओं के लिए स्वास्थ्य वर्धक आहार माना जाता है जिससे दूध की मात्रा व क्वालिटी में वृद्धि होती है। सितंबर महीने में बेमौसम की बारिश ने खेतों में खड़ी चारे की फसलों को नुकसान होने से छोटे पशुपालकों की हालत बेहद खराब है। सबसे ज्यादा परेशान राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और गुजरात के किसान हैं। इन राज्यों में बेमौसम भारी बारिश के कारण बाजरा व अन्य खरीफ फसलें बर्बाद हो गई। अब किसानों को दुधारू पशुओं के लिए पशु चारे की चिंता सता रही है। पशुओं के लिए पारंपरिक आहार गेहूं का भूसा खरीदना किसानों के लिए काफी मुश्किल हो गया है।

पहली बार गेहूं और पशुचारे के भाव एक समान

गेहूं का भूसा इन दिनों करीब 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। वहीं गेहूं का भाव भी 2200 रुपए प्रति क्विंटल है। मालाखेड़ा निवासी 37 वर्षीय किसान दिनेश चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पशु चारे में कभी भी इतनी महंगाई नहीं देखी है। गेहूं और गेहूं के भूसे के भाव लगभग समान हो गए हैं। अगर यही हालत रहे तो गेहूं के भूसे के भाव गेहूं से ज्यादा हो जाएंगे। वहीं सरसों खली की कीमत भी बढ़कर 3000 रुपए प्रति क्विटंल पहुंच गई है। कुछ दिन पहले इसकी कीमत 1600 रुपए प्रति क्विटंल थी। दिसंबर 2021 के बाद से पशु चारे की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है।

चारे की महंगाई दर अगस्त 2022 में 25.54 फीसदी पर पहुंची

देश में सूखे व हरे चारे की कमी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें पानी की कमी, पराली को खेतों में जलाना और बेमौसम की बरसात से पशु चारे का खराब होना शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में हरे चारे की 12 से 15 फीसदी और सूखे चारे की 25 से 26 फीसदी कमी है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित चारे की महंगाई दर अगस्त 2022 में पिछले नौ साल के दौरान सबसे अधिक 25.54 फीसदी रही है। यह दिसंबर 2021 से लगातार बढ़ रहा है। जबकि इस महीने थोक महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली को अगर खेतों में ही नहीं जलाया जाए तो सूख चारे की कमी को दूर किया जा सकता है। 

कुदरत का कहर, किसानों पर दोहरी मार

इस साल कुदरत के कहर से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। मानसून की अनियमितता के कारण खरीफ फसल किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं रही है। कई राज्यों में बाजरा न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बिक रहाहै। वहीं पशुओं में लंपी रोग ने किसानों को नुकसान पहुंचाया है। गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित देश के 15 राज्यों में लंपी स्किन डिजिज के कारण अब तक एक लाख से ज्यादा दुधारू पशुओं की मौत हो चुकी है जबकि 20 लाख से अधिक दुशारू पशु प्रभावित है। इनमें गौवंश की संख्या सबसे अधिक है। 

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दूध की कीमतों में महंगाई से इनकार नहीं

देश में दूध की सप्लाई करने वाली अमूल, डेयरी मिल्क, सरस, गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फैडरेशन आदि प्रमुख कंपनियां ने अगस्त में चारे की कीमतों में वृद्धि का हवाला देकर दूध की कीमतों में इजाफा किया था। राजस्थान में सरस डेयरी के फूल क्रीम दूध की कीमत 64 रुपए किलो तक पहुंच गई है। किसानों का कहना है की चारे की कीमतों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है, लेकिन दूध के दामों में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। किसान दूध के दामों में और वृद्धि की मांग कर रहे हैं। ऐसे में दूध की कीमतों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता। 


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