फरवरी माह के कृषि कार्य : फसलों की बेहतर पैदावार के लिए खास बातें

फरवरी माह के कृषि कार्य : फसलों की बेहतर पैदावार के लिए खास बातें

Posted On - 16 Feb 2021

इस माह करें ये काम : गेहूं, नींबू, धनिया, आलू, जीरा, सौंफ व अदरक में होगा फायदा

फसलों की बेहतर पैदावार के लिए उनकी समय-समय पर देखभाल करना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि फसलों को उनकी आवश्यकतानुसार सिंचाई, निराई-गुड़ाई व रोगों से सुरक्षित किया जाना जरूरी है। इसके लिए किसानों को हम हर माह किए जाने वाले कृषि कार्यों की जानकारी देते हैं ताकि किसान भाइयों को अपनी बोई हुई फसलों का बेहतर उत्पादन मिलने में मदद मिल सके। इसी क्रम में आज हम फरवरी माह में किए जाने वाले कृषि कार्यों को बताएंगे जिससे आपको लाभ होगा।

 

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आलू- पिछेती आलू की करें देखभाल

पिछेती बोई गई आलू की फसल की देखभाल करें। बुवाई के 30-35 दिन बाद 125-150 किलो यूरिया प्रति हैक्टेयर की दर से मिट्टी चढ़ाते समय दें।

 


 

गेहूं- गांठ व बालियां आने पर करें सिंचाई

  • गेहूं की फसल में करनाल बंद रोग की रोकथाम के लिए बाली आने की अवस्था पर 0.1 प्रतिशत (एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) प्रोपीकोनाजोल के घोल का छिडक़ाव करें। छिडक़ाव को 15 दिन बाद फिर दोहराएं।
  • गेहूं की फसल में गांठ बनते समय (बुवाई के 65 से 70 दिन बाद) तथा बालियां आने के समय (बुवाई के 65-90 दिन बाद) व जौ में दूधिया अवस्था में सिंचाई आवश्यक रूप से करें।


नींबू- धब्बे दिखाई देने पर करें ये उपचार

  • नींबू में सिट्रस कॅकर के कारण टहनियां, पत्तियां व फलों पर भूरे रंग के मध्य से फटे, खुरदरे व कॉर्कनुमा धब्बे बन जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोसाइकिलन 100 मिलीग्राम व ताम्रयुक्त कवकनाशी दवा 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिडक़ाव करें।
  • नींबू के पौधों के मूलवृन्त तैयार करने के लिए नर्सरी में बीजों की बुवाई करें। मूलवृन्त एक वर्ष के हो जाएं तब उन पर कलिकायन करें।

 

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बैंगन, टमाटर, भिंड़ी- मकड़ी, थ्रिप्स तथा सफेद एवं हरा तेला से करें बचाव

  • सब्जियों में बैंगन, टमाटर व भिंड़ी में मकड़ी, थ्रिप्स, सफेद व हरा तेला पत्तियों व तने का रस चूसकर पौधों को रोगग्रस्त बनाते हैं। इससे बचाव के लिए डायमिथोएट 30 ई.सी. एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। आवश्यकता पडऩे पर यह छिडक़ाव 15 से 20 दिन बाद फिर दोहराएं।
  • बैंगन और टमाटर की फसल में फल एवं तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए प्रभावित शाखाओं एवं फलों को तोडक़र नष्ट कर देंवे तथा फल बनने की अवस्था पर एसीफेट 75 एसपी दवा 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडक़ाव करें। आवश्यकतानुसार छिडक़ाव को दोहराएं।


मटर- छाछ्या रोग की ऐसे करें रोकथाम

मटर में यदि छाछ्या रोग का प्रकोप हो रहा हो तो 0.25 प्रतिशत यानि 2.5 ग्राम प्रति लीटर ट्रायडिनिफोन का छिडक़ाव रोग के लक्षण दिखाई देते ही करें तथा दूसरा छिडक़ाव प्रथम छिडक़ाव के 15 दिन बाद पुन: करें।


धनिया- दानों का रंग पाला होने पर करें कटाई

धनिया की फसल 115 से 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। फसल पकने पर दानों के रंग में कुछ पीलापन आने लगता है। इस समय फसल की कटाई कर लेनी चाहिए।


जीरा- फसल को काटकर सुखाएं

जीरे की फसल 90-135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। फसल को काटकर अच्छी तरह सुखा लेंवे। फसल के ढेर को पक्के फर्श पर धीरे-धीरे पीटकर दानों को अलग कर लेंवे।


सौंफ- पैदावार को अधिक पीला न होने दें

सौंफ में दानों का रंग हरे से पीला रंग होने लगे उन गुच्छों को तोड़ लेना चाहिए एवं साफ जगह में सूखा देना चाहिए। अधिक पैदावार के लिए सौंफ को अधिक पीला नहीं होने देना चाहिए।


अदरक- पत्ते पीले पडक़र सूखने पर करें खुदाई

अदरक की गांठे बनने के 9-10 माह जब पत्ते पीले पडक़र सूखने लग जाएं तब अदरक की फसल तैयार हो जाती है। इस समय इसकी खुदाई करके गांठे निकल लेनी चाहिए।


चारा फसलें : रिजका, बरसीम और जई की कटाई

  • रिजका, बरसीम और जई ये चारा फसलें हैं। इनकी 20-25 दिन के अंतराल में सिंचाई करें।
  • बरसीम की कटाई 20-25 दिन के अंतराल में की जा सकती है।
  • रिजका, बरसीम और जई को सूखे चारा या अचार (साईलेज) के रूप में संग्रहित कर भविष्य में चारे की कमी होने पर सुरक्षित रखें।
  • गर्मी में चारे के लिए रिजका, बरसीम और जई की बुवाई इस माह के दूसरे पखवाड़े से शुरू की जा सकती है।

 

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आम - फलों को गिरने से रोकने के लिए करें ये उपाय

इस समय आम के पेड़ पर फूल व फल आना शुरू हो जाता है। छोटे फलों को गिरने से रोकने के लिए 2,4-डी नामक दवा 2 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। छिडक़ाव फल मटर के दाने के बराबर हो जाने पर करना चाहिए।


पपीता- पानी के निकास को ठीक करें

पपीता में तना गलन रोग के कारण भूमि की सतह से तना सडऩा शुरू हो जाता है । पौधा गिर जाता है। इस रोग से बचाव के लिए पानी का निकास ठीक करें तथा कॅप्टान 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें।


शरीफा ( सीताफल ) - स्केल कीट से करें बचाव

शरीफा जिसे सीताफल भी कहा जाता है। सीताफल में स्केल कीट टहनियां व फूलों का रस चूसकर उसे हानि पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 50 से 100 ग्राम प्रति पेड़ थाले में 10 से 25 सेंटीमीटर की गहराई पर मिलाएं। पेड़ पर डायमिथोएट 30 ई.सी. या क्यूनॉलफॉस 25 ई.सी. दवा 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडक़ाव करें।

 

 

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