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गेहूं की अगेती खेती : इन किस्मों की करें बुवाई, होगा भरपूर फायदा

गेहूं की अगेती खेती : इन किस्मों की करें बुवाई, होगा भरपूर फायदा

जानें, कौनसी अगेती किस्म की करें बुवाई और क्या रखें सावधानियां?

यह समय गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है। इस समय किसान इन किस्मों की बुवाई करके अच्छा उत्पादन कर भरपूर मुनाफा कमा सकता है। किसान को अगेेती किस्म की बुवाई करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिल सके। अगेती किस्म की बुवाई के संदर्भ में कृषि विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां बताईं हैं और इसी आधार पर इन किस्मों को तीन चरणों में बांटा गया है। इसी के साथ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगेती किस्म की बुवाई करते समय बीजों करना बेहद आवश्यक है। आइए जानते हैं कि आप किस तरह कुछ सावधानियां रखते हुए अगेती किस्मों की बुवाई कर अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

 

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अगेती गेहूं की किस्मों की बुवाई के समय का विभाजन

कृषि विशेषज्ञों ने अगेती गेहूं की किस्मों के आधार पर इनकी बुवाई के समय को तीन चरणों में बांटा है। इसका पहला चरण 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक रखा गया है। दूसरा चरण 11 नवंबर से 25 नवंबर तक का है। वहीं तीसरा चरण 26 नवंबर से 25 दिसंबर तक का रहेगा। यानि गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई किसान 25 अक्टूबर से लेकर 25 दिसंबर तक कर सकता है, लेकिन उसमें उसे हर चरण के अनुरूप खाद की मात्रा व बीज को उपचारित करने पर विशेष ध्यान रखना होगा।

 

चरणों के अनुसार गेहूं की अगेती किस्में

  • पहला चरण- (25 अक्टूबर से 10 नवंबर) के लिए अगेती गेहूं की किस्मों में एचडी 2967, डब्ल्यूएच 542, यूपी 2338, एचडी 2687, डब्लयूएच 1105 और देसी गेहूं सी-306 किस्में अच्छी है।
  • दूसरा चरण- (11 नवंबर से 25 नवंबर) के लिए डब्ल्यूएच 542, डब्ल्यूएच 711, डब्ल्यूएच 283, डब्ल्यूएच 416 किस्मों की बुवाई की जा सकती है।
  • तीसरा चरण- (25 नवंबर से 25 दिसंबर) के लिए पछेती किस्म एचडी 2851, यूपी 2338, आरएजे 3765, पीबीडब्ल्यू 373, आरएजे 3077 की बुवाई कर सकते हैं।
  • इस समय किसान पहले चरण की बुवाई कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पहले चरण की किस्मों का चयन कर सकते हैं।

 

गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • गेहूं की बुवाई के लिए तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए।
  • गेहूं की बुवाई के समय मिट्टी में नमी होना बेहद जरूरी है। इसके लिए खेत की अच्छे से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए।
  • गेहूं की बुवाई करने से 15-20 दिन पहले खेत तैयार करते समय 4-6 टन/एकड़ की दर से गोबर की खाद का खेत में डाल देनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ जाती है।
  • गेहूं की बुवाई हैप्पी सीडर और सुपर सीडर की सहायता से करनी चाहिए जिससे बीज को सही मात्रा में उचित गहराई पर छोड़ा जा सके। ऐसा करने से अंकुरण अच्छा होता है।
  • कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पहले दो चरणों में 40 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की बुवाई करना चाहिए। वहीं तीसरे चरण में 50 से 60 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की बुवाई की जा सकती है।
  • रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीजों को 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बावास्टीन और बीटावैक्स से उपचारित करना चाहिए। वहीं दीमक से बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफॉस 1.5 मिली, प्रति किलोग्राम से बीज को उपचारित किया जाना चाहिए।

 

गेहूं की अगेती फसल की कब - कब करें सिंचाई

गेहूं की खेती में सिंचाई प्रबंधन है जरूरी अधिक उपज के लिए गेहूं की फसल को पांच-छह सिंचाई की जरूरत होती है। पानी की उपलब्धता, मिट्टी के प्रकार और पौधों की आवश्यकता के हिसाब से सिंचाई करनी चाहिए। गेहूं की फसल के जीवन चक्र में तीन अवस्थाएं जैसे चंदेरी जड़ निकलना (21 दिन), पहली गांठ बनना (65 दिन) और दाना बनना (85 दिन) ऐसी हैं, जिन पर सिंचाई करना अति आवश्यक है। यदि सिंचाई के लिए जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो पहली सिंचाई 21 दिन पर इसके बाद 20 दिन के अंतराल पर अन्य पांच सिंचाई करें। वहीं पानी की बचत के लिए फव्वारा विधि या टपका विधि का प्रयोग करें। सिंचाई की इन तकनीकों पर केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी के रूप में अनुदान भी दिया जाता है।


खरपतवार नियंत्रण के लिए ये करें उपाय

खरपतवार प्रबंधन गेहूं की फसल में संकरी पत्ती (मंडूसी/कनकी/गुल्ली डंडा, जंगली जई, लोमड़ घास) वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए क्लोडिनाफॉप 15 डब्ल्यूपी 160 ग्राम या फिनोक्साडेन 5 ईसी 400 मिलीलीटर या फिनोक्साप्रॉप 10 ईसी 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर प्रयोग करें। यदि चौड़ी पत्ती (बथुआ, खरबाथु, जंगली पालक, मैना, मैथा, सोंचल/मालवा, मकोय, हिरनखुरी, कंडाई, कृष्णनील, प्याजी, चटरी-मटरी) वाले खरपतवारों की समस्या हो तो मेटसल्फ्यूरॉन 20 डब्ल्यूपी 8 ग्राम या कारफेन्ट्राजोन 40 डब्ल्यूडीजी 20 ग्राम या 2,4 डी 38 ईसी 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

सभी खरपतवारनाशी/शाकनाशी का छिडक़ाव बीजाई के 30-35 दिन बाद 120-150 लीटर पानी में घोल बनाकर फ्लैट फैन नोजल से करें। मिश्रित खरपतवारों की समस्या होने पर संकरी पत्ती शाकनाशी के प्रयोग उपरान्त चौड़ी पत्ती शाकनाशी का छिडक़ाव करें। बहुशाकनाशी प्रतिरोधी कनकी के नियंत्रण के लिए पायरोक्सासल्फोन 85 डब्ल्यूडीजी 60 ग्राम/एकड़ को बीजाई के तुरंत बाद प्रयोग करें।

 

 

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