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खुरपका-मुंहपका रोग : सरकार ने पशुओं के टीकाकरण पर लगाई रोक

खुरपका-मुंहपका रोग : सरकार ने पशुओं के टीकाकरण पर लगाई रोक

पशुओं का टीकाकरण रोका : जानें, क्या है कारण और किन राज्यों में लगाई गई हैं रोक

सरकार ने पशुओं में होने वाले खुरपका-मुंहपका रोग के टीकाकरण पर रोक लगा दी है। अब पशुओं को इस रोग का टीका नहीं लगाया जाएगा। दरअसल इस रोग के टीकाकरण के प्रयोग में आने वाली वैक्सिन की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने झारखंड सहित कोई आधा दर्जन राज्यों को इसका इस्तेमाल न करने की सलाह दी थी। केंद्र के निर्देश के बाद झारखंड राज्य सरकार ने जिला पशुपालन अधिकारियों को रोक का आदेश जारी कर दिया है। हैदराबाद की एक कंपनी ने दवा की आपूर्ति की थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की इकाई आरवीआरआइ से वैक्सिन की जांच कराई गई थी जिसमें गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं पाया गया था। बता दें कि बीते साल झारखंड के टंडवा व करीबी इलाके में इस रोग से अनेक जानवरों की मौत हो गई थी। केंद्र से समय पर निर्देश व दवा का इंतजाम नहीं होता है तो बीमारी फैलने पर पशुपालकों का बड़ा नुकसान हो सकता है।

 

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किन राज्यों में लगाई पशुओं के टीकाकरण पर रोक / खुरपका-मुंहपका रोग का टीकाकरण

झारखंड सहित जिन अन्य प्रदेशों में टीकाकरण पर रोक लगाई गई है वे हैं पंजाब, राजस्थान, असम, दमन व जम्मू कश्मीर। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रदेश में करीब 30 लाख जानवरों का टीकाकरण किया जाना है। राज्य के 24 में 22 जिलों में टीकाकरण का काम प्रारंभ हो गया था। करीब 70 हजार जानवरों को टीके लगाये जा चुके थे इसी बीच रोक का आदेश आ गया है। कृषि एवं पशुपालन सचिव अबु बकर सिद्दीकी का कहना है कि केंद्र से पुन: निर्देश के अनुसार टीकाकरण का काम शुरू होगा।

 


क्या है खुरपका-मुंहपका रोग

खुरपका-मुंहपका रोग जिसे झारखंड की स्थानीय भाषा में खुरहा-चपका रोग भी कहते हैं, मूलत: दो खुर वाले गाय, भैंस, बैल, सांड, भेंड, बकरियों में होता है। ऐसे में इनका चलना और खड़े होना और खाना मुश्किल होता है। तेज बुखार होने के कारण जानवर खाना-पीना और जुगाली करना भी बंद कर देते हैं। बच्चों पर ज्यादा बुरा असर होता है। यह अति संक्रामक रोग है। वयस्क पशुओं की क्षमता कम कर देता है और इसके विषाणु लंबे समय तक जीवित रहते हैं।


पशुओं में कैसे फैलता है ये रोग

चिकित्सकों के अनुसार रोग अत्यन्त सूक्ष्म विषाणु से फैलता है। जिसमें ओ, ओ, ए, सी, एशिया-1, एशिया-2, एशिया-3, सैट-1, सैट-3 और इनकी 14 उप-किस्में मुख्य है। देश में यह रोग मुख्यत: ओ, ए, सी तथा एशिया-1 प्रकार के विषाणुओं द्वारा अपने पांव पसारता है। पशुओं में रोग फैलने का एक अन्य कारण नम-वातावरण, पशु की आंतरिक कमजोरी, पशुओं का स्थान बदलने क्षेत्र में रोग का प्रकोप भी इस बीमारी को फैलाने में सहायक हैं।


खुरपका मुहंपका रोग ग्रसित पशु की कैसे करें देखभाल

  • बीमारी हो जाने पर रोग ग्रस्त पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग करके रखें।
  • बीमार पशुओं की देख-भाल करने वाले व्यक्ति भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहे।
  • बीमार पशुओं के आवागमन पर रोक लगा दे।
  • पशु बाड़े की समय-समय पर सफाई करें।
  • इस बीमारी से मरे पशु के शव को खुला छोडक़र गाड़ दें ताकि वायरस ना फैले।


टीका नहीं लग रहा तो कैसे कर सकते हैं रोग ग्रसित पशु का उपचार / खुरपका - मुंहपका रोग का इलाज

जिन राज्यों में पशुओं के टीकाकरण पर रोक लगाई गई है वहां के पशुपालक चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार करवा सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार मुंह खुरों के घावों को फिटकरी या पोटाश के पानी से धोते है। मुंह में बोरो-ग्लिसरीन तथा खुरों में किसी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है।

 

 

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पीएम किसान सम्मान निधि योजना : बजट २०२१ में किसानों को मिल सकता है तोहफा

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : बजट २०२१ में किसानों को मिल सकता है तोहफा

खातें में आ सकते हैं 6000 रुपए से ज्यादा, जानें, किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ? बजट 2021 में सरकार किसानों को तोहफा दे सकती है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में सरकार किसानों को खुश करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी कर सकती है। बता दें कि अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकार की ओर से किसानों को एक वर्ष में 2,000-2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में कुल 6000 रुपए की राशि दी जाती है। यानि इस योजना के तहत सरकार किसानों को 500 रुपए महीने की सहायता हर माह प्रदान कर रही है। योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि को लेकर किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में हर माह सिर्फ 500 रुपए की राशि की सहायता बहुत कम है। वहीं कई कृषि जानकारों का भी कहना है कि इस राशि का बढ़ाया जाना चाहिए। किसानों को उम्मीद है कि इस बार बजट में इस योजना की राशि को बढ़ाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि मोदी सरकार किसानों को दी जाने वाली सम्मान राशि में इजाफा कर सकती है। इस इजाफे की घोषणा बजट 2021 में होने की संभावना जताई रही है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसानों को खुश करने के लिए सरकार कर सकती है कुछ खास ऐलान तीन नए कृषि कानून के विरोध में जारी किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। जानकारी के मुताबिक इस बार के बजट में खेती-किसानी को लेकर केंद्र सरकार के कुछ खास ऐलान किए जाने की भी संभावना है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस बार के बजट में सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत मिलने वाले 6,000 रुपए सालाना को बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। इस बार के बजट में किसानों ने मोदी सरकार से इस रकम को बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि 6,000 रुपए सालाना की रकम पर्याप्त नहीं है। एक एकड़ में फसल बोने पर कितना आता है खर्चा किसानों के अनुसार एक एकड़ जमीन में धान की फसल में 3-3.5 हजार रुपए लगते हैं। वहीं, अगर गेहूं की खेती की जाए तो इसमें 2-2.5 हजार रुपए की लागत आती हैं। ऐसी स्थिति में थोड़ी ज्यादा जमीन रखने वाले किसानों को इस स्कीम से लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार को यह रकम बढ़ानी चाहिए ताकि किसानों को कुछ और राहत मिल सके। यह भी पढ़ें : ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने के उपाय करें सरकार- कृषि विशेषज्ञ वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने के साथ ही प्रोत्साहन के उपाय करने चाहिए। कृषि क्षेत्र के जानकारों ने यह बात कही है। उनका मानना है कि सरकार को कृषि क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर देना चाहिए। इसके लिए स्वदेशी कृषि अनुसंधान, तिलहन उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में अतिरिक्त धनराशि प्रदान करनी चाहिए। जानकारों का यह भी कहना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के दायरे में ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाने की जरूरत है। डीसीएम श्रीराम के अध्यक्ष और वरिष्ठ एमडी अजय श्रीराम ने कहा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने किसान के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति और बिचौलियों की लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बजट में खाद्य प्रसंस्करण को ब्याज प्रोत्साहन, कम कर, प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और इसके प्रोत्साहन के उपाय करने चाहिए। पिछले वित्त वर्ष भी कृषि के लिए बजट में की गई थी वृद्धि वित्त वर्ष 2019-20 में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन का अनुमान करीब 1.51 लाख करोड़ रुपए रहा था, जो कि अगले साल यानी वित्त वर्ष 2020-21 में मामूली बढ़त के साथ 1.54 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके अलावा भी ग्रामीण विकास के लिए वित्त वर्ष 2020-21 में 1.44 लाख करोड़ रुपए का आवंटन हुआ था। इसके पहले वित्त वर्ष (2019-20) में यह 1.40 लाख करोड़ रुपए था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत आवंटन की राशि को 2019-20 के 9,682 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2020-21 में 11,217 करोड़ रुपए कर दिया था। छोटे किसानों को मिलता है इस स्कीम से फायदा पीएम-किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा 100 फीसदी फंड पाने वाली स्कीम है। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 से इस योजना को शुरू किया था, जिसके तहत छोटे एवं सीमांत किसानों को सालाना 6,000 रुपए उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जाते हैं। इस स्कीम का लाभ वही किसान उठा सकते हैं, जिनके पास कुल 2 हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन नहीं है। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश इस स्कीम के तहत योग्य किसानों की पहचान करते हैं। 25 दिसंबर 2020 को ही पीएम मोदी ने करीब 9 करोड़ किसानों के खाते में करीब 18,000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किया है। यह भी पढ़ें : ऋण समाधान योजना : 31 जनवरी से पहले ऋण जमा कराएं, 90 प्रतिशत तक छूट पाएं पीएम किसान सम्मान निधि में अब तक किसानों को मिली सात किस्तें केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 7 किस्तों में पैसे जारी कर चुकी है। अब तक इस स्कीम के तहत 10.60 करोड़ किसानों को 95,000 करोड़ रुपए की रकम जारी की जा चुकी है। इस योजना के तहत अप्रैल-जुलाई, अगस्त-नवंबर और दिसंबर-मार्च की अवधि में अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। पीएम-किसान सम्मान निधि की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक इस योजना के 11.47 करोड़ किसानों को लाभ मिल चुका है। दिसंबर 2018 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। इन किसानों को नहीं मिलेगा इस योजना का लाभ ऐसे किसान जो भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक हैं, वर्तमान या पूर्व मंत्री हैं, मेयर या जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, विधायक, एमएलसी, लोकसभा और राज्यसभा सांसद हैं तो वे इस स्कीम से बाहर माने जाएंगे। भले ही वो किसानी भी करते हों। केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को लाभ नहीं. बाकी पात्र होंगे। पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे लाभ नहीं मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार के मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/समूह डी कर्मचारियों लाभ मिलेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 राजस्थान : जानें कितनी बढ़ी गेहूं की कीमत

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 राजस्थान : जानें कितनी बढ़ी गेहूं की कीमत

राजस्थान में गेहूं का एमएसपी तय, अब इस कीमत पर होगी खरीद राजस्थान में आगामी रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय कर दिया गया है। अब किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद की जाएगी। बता दें कि रबी विपणन वर्ष 2020-21 में रबी सीजन में उत्पादित गेहूं के लिए केंद्र सरकार ने 1925 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य यानि एमएसपी तय किया था। अब राजस्थान सरकार की ओर से तय किया गया एमएसपी रबी विपणन वर्ष 2020-21 से 50 रुपए अधिक है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रदेश में 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार का अनुमान कृषि विभाग के अनुसार इस बार प्रदेश में 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान जताया गया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से जारी कृषि उत्पादन कार्यक्रम के तहत प्रदेश में लगभग 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार होने की संभावना जताई गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने बुधवार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक में यह बात कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान ई-प्रोक्योरमेन्ट के तहत कोई कार्य नहीं हुआ। लेकिन, इस रबी विपणन वर्ष 2021-22 में ई-प्रोक्योमेन्ट के तहत समस्त कार्यवाही निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन सचिव ने बताया कि समस्त खरीद प्रक्रिया के प्रभावी रूप से नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया गया है। परिवहन दरों व मंडी लेबर चार्जेज के निर्धारण के लिए विशेषज्ञ उप समिति का गठन उन्होंने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार परिवहन दरों के निर्धारण एवं मंडी लेबर चार्जेज के निर्धारण के लिए राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें इन दरों के निर्धारण के लिए एक विशेषज्ञ उप समिति का गठन कर लिया गया है। उप समिति आगामी 2 फरवरी को राज्य स्तरीय समिति को रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आगामी रबी विपणन वर्ष 2021-22 में दरों का निर्धारण किया जाएगा। गेहूं की खरीद से जुड़े हुए विभिन्न बिन्दुओं सहित खरीद कीमतों पर बैठक में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त खाद्य आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, राजफैड की प्रबन्ध निदेशक सुषमा अरोड़ा, एफसीआई के महाप्रबन्धक संजीव भास्कर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। यह भी पढ़ें : ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ इधर यूपी में धान की खरीद में गड़बड़ी, छह क्रय प्रभारियों पर कार्रवाई उत्तप्रदेश के सिद्धार्थनगर में धान खरीद में ऑनलाइन पंजीकरण में गड़बड़ी पाए जाने पर यहां के पीसीएफ के चार क्रय केन्द्र प्रभारियों समेत तीन तहसील कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई हैं। इसके तहत इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा कुशीनगर के दो क्रय केन्द्र प्रभारी व तहसील के कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने मीडिया को यह जानकारी दी है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार उन्होंने बताया कि धान खरीद में किसानों को बेचने के लिए खाद्य तथा रसद विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराए जाने की व्यवस्था की गई है। सिद्धार्थनगर में सात किसानों ने अपने पंजीकरण में कई हेक्टेयर भूमि पर धान की पैदावार दिखाई थी। इसका सत्यापन तहसील से भी करा लिया। पीसीएफ के चार क्रय केन्दों पर इन तथाकथित किसानों ने हजारों क्विंटल धान भी बेचा। ऑनलाइन आंकड़ों की समीक्षा होने पर यह गड़बड़ी पकड़ में आई तो सातों किसान, चारों क्रय केन्द्र प्रभारी व तीन तहसील कर्मियों के खिलाफ एफआईआर करवाई गई। इसी तरह कुशीनगर में एक किसान ने अपने पंजीकरण में 421 हेक्टयर भूमि दर्ज की और इस पर 22472.98 क्विंटल धान की मात्रा भी सत्यापित करवा दी जबकि जमीन अन्य किसानों के नाम पर थीं। यूपीपीसीयू के दो धान क्रय केन्द्र प्रभारियों द्वारा बिना किसान के प्रपत्र, खतौनी आदि देखे हुए 1064 क्विंटल धान की खरीद भी कर ली गर्ईं। इस पर कार्रवाई करते हुए किसान, दोनों क्रय केन्द्र प्रभारी व तहसील के कम्प्यूटर आपरेटर के खिलाफ एफआईआर की गई है। धान खरीद वर्ष 2020-21 के तहत प्रदेश में अब तक 59.15 लाख मीट्रिक धान की खरीद कर ली गई है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान

गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान

खेती-बाड़ी सलाह : अच्छे उत्पादन के लिए गेहूं की फसल में रखें ये सावधानियां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों को गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए उपयोगी सलाह दी है। इसमें गेहूं की आवश्यकता से अधिक सिंचाई करने पर उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने को लेकर आगाह किया गया है। संस्थान द्वारा दी गई सलाह के अनुसार जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें, अन्यथा फसल गिर सकती है, साथ ही दानों में दूधिया धब्बे आ जाते हैं और उपज कम हो जाती है। किसान, बालियां आने पर फव्वारा विधि से सिंचाई न करें, अन्यथा फूल खिरने, दानों का मुंह काला पड़ने, करनाल बंट या कंडुआ रोग के प्रकोप का डर रहता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 गेहूं की फसल में कब-कब करें सिंचाई संस्थान द्वारा दी गई सलाह के अनुसार गेहूं की अगेती खेती में (मध्य क्षेत्र की काली मिट्टी तथा 3 सिंचाई की खेती में) पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद, दूसरी 35-40 दिन और तीसरी सिंचाई 70-80 दिन की अवस्था में करना पर्याप्त है। पूर्ण सिंचित समय से बुवाई में 20-20 दिन के अंतराल पर 4 सिंचाई करें। अधिक सर्दी वाले दिनों में फसलों में स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई करें। 500 ग्राम थायो यूरिया 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें या 8-10 किलोग्राम सल्फर पाउडर/एकड़ का भुरकाव करें अथवा घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। गेहूं में खाद व उर्वरक की मात्रा का रखें ध्यान गेहूं के लिए सामान्यतः नत्रजन, स्फुर और पोटाश 4:2:1 के अनुपात में देना चाहिए। असिंचित खेती में 40:20:10, सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20, सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम/ हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक देना चाहिए। सिंचित खेती की मालवी किस्मों को नत्रजन, स्फुर और पोटाश 140:70:35 कि.ग्रा./हेक्टेयर की दर से देना चाहिए। पूर्ण सिंचित खेती में नत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी में ओरना (3-4 इंच गहरा) चाहिए। शेष नत्रजन पहली सिंचाई के साथ देना चाहिए। वर्षा आधारित या सीमित सिंचाई की खेती में सभी उर्वरक बुवाई से पहले मिट्टी में एक साथ देने चाहिए। किसानों को सलाह है कि खेत के उतने हिस्से में ही यूरिया भुरकाव करें जितने में उसी दिन सिंचाई दे सकें। यूरिया को बराबर से फैलाएं। यह भी पढ़ें : कोरोना वैक्सीन : देशभर में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी से गेहूं में खरपतवार नियंत्रण के लिए ये करें उपाय गेहूं फसल में मुख्यत: दो प्रकार के खरपतवार होते हैं। चौड़ी पत्ती वाले बथुआ, सेंजी, दूधी ,कासनी, जंगली पालक, जंगली मटर, कृष्ण नील, हिरनखुरी तथा संकरी पत्ती वाले मोथा, जंगली जई और कांस। जो किसान खरपतवारनाशक का उपयोग नहीं करना चाहते हैं वे डोरा, कुल्पा या हाथ से निंदाई-गुड़ाई कर 40 दिन से पहले दो बार करके खरपतवार निकाल सकते हैं। मजदूर नहीं मिलने पर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए 2 ,4 डी की 0.65 किग्रा. या मैटसल्फ्यूरॉन मिथाइल की 4 ग्राम मात्रा/हे. की दर से बुवाई के 30-35 दिन बाद, जब खरपतवार दो-चार पत्ती वाले हों, छिडक़ाव करें। संकरी पत्ती वाले खरपतवार के लिए क्लौडीनेफॉप प्रौपरजिल 60 ग्राम/हे. की दर से 25-35 दिन की फसल में छिडक़ाव करने से दोनों तरह के खरपतवारों पर नियंत्रण किया जा सकता है। मोहू कीट के प्रकोप से ऐसे करें बचाव इन दिनों फसल पर जड़ माहू कीटों का प्रकोप देखा जा सकता है। यह कीट गेहूं के पौधे को जड़ से काट देते हैं। इस कीट के नियंत्रण के उपाय करना जरूरी है। इसके लिए क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी दवाई 5 लीटर/हेक्टेयर बालू रेत में मिलाकर खेत में नमी होने पर बुरकाव करें या बुरकने के बाद सिंचाई कर दें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 250 मिली लीटर या थाई मैथोक्सेम की 200 ग्राम/हे. की दर से 300-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। यदि माहू का प्रकोप गेहूं फसल में ऊपरी भाग (तनों या पत्तों) पर होने की दशा में इमिडाक्लोप्रिड 250 मिलीग्राम /हे. की दर से पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। देरी से बुवाई की अनुशंसित किस्में देरी से बुवाई वाली किस्मों में एचडी 2932 (पूसा 111), एचआई 1634 (पूसा अहिल्या), जेडब्ल्यू 1202-1203,एमपी 3336, राज 4238 आदि प्रमुख उपयोगी किस्में हैं। इसमें एनपीके खाद 100:50:25 की दर से दें। खेत में गेहूं के पौधे सूखने या पीले पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेकर शीघ्र उपचार करें। यह भी पढ़ें : ऋण समाधान योजना : 31 जनवरी से पहले ऋण जमा कराएं, 90 प्रतिशत तक छूट पाएं इस साल रबी फसल का उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद, गेहूं का रकबा बढ़ा देश में रबी फसलों का रकबा गत वर्ष अब तक हुई बोनी को पार कर गया है। देश में अब तक गेहूं का रकबा 313.24 लाख हेक्टेयर हो गया है तथा कुल बोनी 597.92 लाख हेक्टेयर में हो गई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 573.23 लाख हेक्टेयर में बोनी की गई थी। अर्थात अब तक 24.69 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में बोनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि चालू रबी सीजन में बुवाई बेहतर होगी तथा उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में गेहूं की बुआई रकबा 313.24 लाख हेक्टेयर हो गया है। जबकि गत वर्ष अब तक 297.39 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। रबी में गेहूं का सामान्य रकबा 303.28 लाख हेक्टेयर है। जानकारी के मुताबिक देश में सबसे अधिक म.प्र. में 102.76 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 82 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं की बोनी हुई है। इसी प्रकार अब तक उत्तर प्रदेश में 89.23 लाख हेक्टेयर में, पंजाब में 34.70, राजस्थान में 28.57, हरियाणा में 24.87 एवं बिहार में 17 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है। गेहूं की तरह दूसरी फसलों की भी बुआई पिछले साल की अपेक्षा बेहतर दिखाई दे रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक चालू रबी सीजन में अभी तक धान का रकबा 12.49 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। दलहनी फसलों की भी बुआई 149.29 लाख हेक्टेयर में हो गई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 141.64 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी। इसी प्रकार मोटे अनाजों का रकबा 43.44 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। जो गत वर्ष 46.55 लाख हेक्टेयर था। तिलहनी फसलों की बुआई 79.47 लाख हेक्टेयर में हुई है। जो गत वर्ष अब तक 74.19 लाख हेक्टेयर में हो गई थी। कुल रबी फसलों की बुआई का रकबा इस साल 597.92 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

किसान आंदोलन का 50वां दिन : किसानों ने कहा- संघर्ष जारी रहेगा

किसान आंदोलन का 50वां दिन : किसानों ने कहा- संघर्ष जारी रहेगा

अब 26 जनवरी तक यह रहेगा कार्यक्रम, जानें, किसान आंदोलन में किस दिन क्या होगा? किसान आंदोलन को 50 दिन पूरे हो रहे हैं, लेकिन अभी तक किसानों की मांगे पूरी नहीं हुई हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों को लेकर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। वहीं नए कृषि कानूनों को लेकर आ रही समस्याओं को सुलझाने के लिए चार सदस्यीय एक कमेटी का गठन भी कर दिया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से किसान संतुष्ट नहीं है। किसानों का कहना है कि वे कमेटी के समाने नहीं जाएंगे। यहीं कारण है कि मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है। आज किसानों के आंदोलन का आज 50वां दिन है। किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाएंगे। बता दें कि हरियाणा और पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों के किसान पिछले साल 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं और तीनों कानूनों को वापस लेने तथा अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी की मांग कर रहे हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 शांतिपूर्वक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा किसान नेताओं द्वारा मीडिया को बताए गए अनुसार उपरोक्त कार्यकमों के साथ-साथ अदानी, अंबानी के उत्पादों का बहिष्कार करने और भाजपा के समर्थक दलों पर दबाव डालने के हमारे कार्यक्रम बदस्तूर जारी रहेंगे। तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए किसानों का शांति पूर्वक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा। कृषि कानूनों के विरोध में एक ओर किसान की मौत, जहर खाकर दी जान पठानकोट-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पडऩे लदपालवा टोल प्लाजा के समीप एक किसान ने कृषि कानूनों के विरोध में जहर निगल लिया। इसके चलते किसान को इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। किसान की मौत के बाद अन्य किसानों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। इस सबंध में जानकारी देते किसानों ने बताया कि किसान सुच्चा सिंह (गुरदासपुर के गांव खोखर निवासी) संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए पहुंच था। उसने कहा था कि उससे किसानों का दुख देखा नहीं जा रहा और लगता है कि इसी वजह से उस ने अपनी शहादत दी है। बता दें कि किसान आंदोलन के शुरू होने से लेकर अब तक करीब 22 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। यह भी पढ़ें : लेजर लैंड लेवलर : खेत को बनाएं समतल, पानी-खाद और ईंधन की करें बचत किसान आंदोलन के तहत यह रहेगा आगामी कार्यक्रम किसान नेताओं के अनुसार बुधवार को लोहड़ी पर तीनों कानूनों को जलाने का कार्यक्रम होगा। 15 जनवरी को वे सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है। 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाएंगे। 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेंगे। 23 जनवरी को आज़ाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा। 26 जनवरी के दिन देशभर के किसान दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से किसान गणतंत्र परेड आयोजित कर गणतंत्र का गौरव बढ़ाएंगे। इधर भाजपा सांसद हेमामालिनी ने धरने पर बैठे किसानों को लेकर किया सवाल भारतीय जनता पार्टी की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी ने धरने पर बैठे किसानों को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। हेमा मालिनी का कहना है कि जो किसान धरने पर बैठे हैं, उन्हें कानून में समस्या ही नहीं पता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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