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रबी की फसल के लिए उन्नत बीज : राज्य सरकार किसानों को मुफ्त में बांटेगी सरसों के बीज

रबी की फसल के लिए उन्नत बीज : राज्य सरकार किसानों को मुफ्त में बांटेगी सरसों के बीज

12 October, 2020

जानें, क्या है उन्नत बीज और बीजों के चयन में क्या रखें सावधानी

खरीफ की फसल की खरीद शुरू हो गई हैं। इसी के साथ अधिकांश जगह पर खरीफ की फसल के उत्पादन का दौर पूरा हो चुका है। अब किसान रबी की फसल की बुवाई करने की तैयारी कर रहे हैं। इधर राज्य सरकारें भी किसान के लिए बीज, खाद व उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रयास में लगी हुई है। इसके तहत इस समय उत्तरप्रदेश के किसानों को यहां की राज्य सरकार ने मुफ्त में सरसों के उन्नत बीज बांटने का निर्णय लिया है। इसके तहत किसानों को निशुल्क सरसों का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसी के साथ अन्य रबी फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस संबंध में कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में उत्तरप्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लखनऊ के कृषि निदेशालय में आगामी रबी सीजन को लेकर प्रदेश में बीज, खाद एवं उर्वरक की उपलब्धता के साथ विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन उत्तरप्रदेश में होता है, प्रदेश में करीब 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं का उत्पादन किया जाता है। कृषि विभाग का मुख्य कार्य जनपद को उनकी मांग के अनुसार उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराना है। इसके अतिरिक्त उन्होंने आगामी रबी सीजन को देखते हुए अधिक से अधिक बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

 

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रबी सीजन के लिए 49 लाख 50 हजार क्विंटल बीज की होगी आवश्यकता

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कृषि मंत्री ने कहा कि रबी फसलों में मुख्य रूप से गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों एवं अलसी के लिए करीब 49 लाख 50 हजार क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है। इसमें 8 लाख 27 हजार 391 क्विंटल बीज की व्यवस्था सरकारी, सहकारी एवं अद्र्ध सरकारी क्षेत्र के विभागों द्वारा और 41 लाख 22 हजार 609 क्विंटल बीज की व्यवस्था निजी क्षेत्र के माध्यम से की जाएगी। गेहूं की बुआई हेतु 7 लाख 64 हजार 768 बीज वितरण का लक्ष्य सरकारी, सहकारी एवं अद्र्धसहकारी क्षेत्र के विभागों को तथा 37 लाख 35 हजार 232 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य निजी क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है।

 


राज्य में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की खेती होने की उम्मीद

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भारत सरकार इस वर्ष सरसों की खेती पर विशेष जोर दे रही है। देश में 75,000 करोड़ रुपए का खाद्य तेल आयात किया जाता है। इस दृष्टि से भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की खेती किए जाने की उम्मीद गई है। उन्होंने कहा कि इस साल हम सरसों और तिलहन उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ाएंगे और लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों का आच्छादन बढ़ाने की दृष्टि से किसानों को सरसों के उन्नत बीज उपलब्ध कराएंगे और हर संभव प्रयास किए जाएंगे। किसानों को 10 लाख हेक्टेयर की बुवाई के लिए उन्हें नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराए जाए। इस साल हम सरसों और तिलहन उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ाएंगे। सरसों का रकबा करीब 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए किसानों को निशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।


क्या है उन्नत बीज?

उन्नत बीज वह होता है जिसके प्रयोग से अधिक पैदावार प्राप्त हो। साथ ही ऐसा बीज जो रोगों के प्रतिरोधक हो और प्रदेश की जलवायु के अनुसार हो। कई बार किसान ऐसे बीजों की बुवाई कर देते हैं जिससे उत्पादन घट जाता है और किसान को उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए प्रमाणिक उन्नत बीजों का ही उपयोग करना चाहिए। उन्नत बीज वह होता है जिसमें आनुवांशिक शुद्धता शत-प्रतिशत हो,अन्य फसल एवं खरपतवार के बीजों से रहित हो, रोग व कीट के प्रभाव से मुक्त हो, अंकुरण क्षमता उच्च कोटि की हो, खेत में जमाव और अन्तत: उपज अच्छी हो।


बीजों के चयन में यह रखें सावधानियां

  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मजबूत और स्वस्थ फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक हैं, जो बीमारियों या सूखे की स्थिति में भी अपने आप को जीवित रख सकते हैं।
  • छोटे, सिकुड़े और टूटे बीजों में अंकुरण के लिए कम पोषण होता है। इस तरह के बीजों को हटाकर किसान स्वस्थ पौध और फसल प्राप्त कर सकते हैं।
  • किसान खुद के द्वारा उत्पादित बीज प्रयोग में लेते हैं तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कई बीमारियां हैं, जो बीज के माध्यम से फैलती हैं। यदि संक्रमित बीजों का उपयोग अगली फसल के लिए किया जाता है, तो बीज जनित रोग खेत में स्थानांतरित हो जाते हैं। इसलिए बीज, स्वस्थ पौधों से प्राप्त करना चाहिए।
  • फसल में कीटों और बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए भी अच्छे बीज का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। बीजों की गुणवत्ता को वॉछित स्तर पर सुनिश्चित करने के लिए बीज प्रमाणीकरण का प्राविधान है।
  • कृषि विभाग द्वारा खरीफ, रबी एवं जायद फसलों के विभिन्न प्रजाति के प्रमाणित बीजों का वितरण सभी जनपदों के विकास खंड स्थिति बीज भंडार के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। आप अपने विकास खंड से बीज प्राप्त कर, प्रमाणित बीजों से बुवाई कर सकते हैं।

 

 

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उत्तरप्रदेश में मक्का की सरकारी खरीद शुरू, खरीद केंद्र स्थापित किए

उत्तरप्रदेश में मक्का की सरकारी खरीद शुरू, खरीद केंद्र स्थापित किए

किसान फसल बेचने के लिए यहां कराएं ऑनलाइन पंजीकरण उत्तरप्रदेश सरकार ने सरकारी मंडियों में मक्का की खरीद शुरू कर दी है। मक्का खरीद के लिए सरकारी स्तर पर मंडियों में तैयारी की गई है। इस वर्ष केंद्र सरकार ने मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसी मूल्य पर किसानों से मक्का की खरीद की जाएगी। इसको लेकर उत्तरप्रदेश सरकार ने कुछ जिले जहां मक्का उत्पादन अधिक होता है वहां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदने का फैसला लिया है। उत्तरप्रदेश मंत्रीपरिषद् ने खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में मूल्य समर्थन योजना के तहत मक्का क्रय नीति को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य पर 17 अक्टूबर 2020 से शुरू की गई मक्का की खरीद 15 जनवरी 2021 तक जारी रहेगी। मक्का क्रय करने का जिम्मा खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा को सौंपा गया है। खरीद केंद्रों का निर्धारण और चयन जिलाधिकारियों द्वारा किया जाएगा। केवल उन क्षेत्रों में मक्का खरीद केंद्र स्थापित होंगे, जहां मक्का उत्पादन अधिक हो और पर्याप्त खरीद की संभावना हो। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इन जिलों में होगी मक्का की खरीद प्रथम चरण में मक्का खरीद के लिए अलीगढ़, फीरोजाबाद, कन्नौज, एटा, मैनपुरी, कासगंज, बदायूं, बहराइच, फर्रुखाबाद, इटावा, हरदोई, कानपुर नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, गोंडा, बलिया, बुलंदशहर, ललितपुर, श्रावस्ती, देवरिया, सोनभद्र व हापुड़ में सरकारी खरीद शुरू की गई हैं। अन्य जिलों में आवक को देखकर खाद्य आयुक्त द्वारा मक्का खरीद का निर्णय लिया जाएगा। उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य व निजी मंडी में मक्का के भावों में अंतर प्रदेश में 20 अक्टूबर 2020 को मक्का के सबसे कम भाव सिकंदराराहु मंडी में 1010-1135 रुपए प्रति क्विंटल और सबसे अधिक दाम कानपुर मंडी में 1200 से 1350 रुपए रहे। वहीं सरकार की ओर से मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इन भावों का अवलोकन करें तो सरकार द्वारा तय समर्थन, मूल्य निजी मंडी के भावों से अधिक हैं। इससे यहां के किसान समर्थन मूल्य पर अपनी मक्का की उपज बेचने के इच्छुक हैं। इसी को देखते हुए राज्य की योगी सरकार ने किसानों को राहत देते हुए मक्का की सरकारी खरीद शुरू की है। मक्का खरीद केंद्रों क्या है व्यवस्था खरीद केंद्र स्थापित इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसानों को मक्का बेचने के लिए अधिक दूरी न तय करनी पड़े। इसके लिए खरीद केंद्र ऐसे स्थान पर बनाएं जा रहे हैं जहां किसान आसानी से आ सके। इसके अलावा खरीद केंद्रों पर पर मक्का की खरीद के लिए आनलॉइन पंजीयन करना आवश्यक है। पंजीकरण कराने के बाद ही किसान से मक्का की खरीद की जाएगी। इसके अभाव में किसानों के लिए मक्का का विक्रय करना संभव नहीं होगा। वहीं मक्का क्रय केंद्र हेतु हैंडलिंग एवं परिवहन ठेकेदारों की नियुक्ति नियमानुसार ई-टेंडरिंग के माध्यम से की जाएगी। मक्का के मूल्य का भुगतान आर.टी.जी.एस/पी.एफ.एम.एस के माध्यम से मक्का क्रय के 72 घंटे के अन्दर किया जाएगा। चेक के माध्यम से भुगतान को मान्यता नहीं दी जाएगी। किसान कहां और कैसे कराएं पंजीकरण किसानों को मक्का समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाना आवश्यक है। किसान ऑनलाइन पंजीकरण खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट https://fcs.up.gov.in/ से कर सकते हैं। पंजीकरण कराने के लिए किसान को जेातबही खाता नंबर अंकित कम्प्यूटराइजड खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ (जिसमें खाता धारक का विवरण अंकित हो) की छाया प्रति तथा एक अद्यतन पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी होगी। पंजीकरण होने के बाद किसान अपनी मक्का की उपज सरकारी मंडी में बेच सकेंगे। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

सोयाबीन की खरीद से किसान खुश, समर्थन मूल्य से अधिक बाजार में दाम

सोयाबीन की खरीद से किसान खुश, समर्थन मूल्य से अधिक बाजार में दाम

समर्थन मूल्य बेहतर होने से बाजार में भी सोयाबीन के भावों में आई तेजी सोयाबीन किसानों को इस बार बाजार में फसल बेचने से अच्छे दाम मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह पांच साल में पहला मौका है जब सोयाबीन के मंडियों में बेहतर दाम मिल रहे हैं। इस समय महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन के भाव 4000 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3880 रुपए तय किया हुआ है। सरकारी समर्थन मूल्य की बेहतर होने से हाजिर वायादा भावों में भी तेजी आई है जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है। इधर सोमवार को कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन का नवंबर वायदा 54 रुपए की तेजी के साथ 4243 रुपए प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रहा था। महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के पूर्व चेयरमैन पाशा पटेल का कहना कि पिछले कई वर्षों बाद किसानों को उनकी उपज (सोयाबीन) का बेहतर भाव मिल रहा है। फसलों की कटाई के समय का पिछले 4-5 साल का ट्रेंड देखें तो सोयाबीन के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे थे। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था। कई साल बाद पहला मौका है जब भाव एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक देशभर की प्रमुख हाजिर मंडियों में सोयाबीन का भाव 4000 रुपए के आसपास चल रहा है। 19 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में हाजिर में बढिय़ा क्वालिटी वाली सोयाबीन का दाम 4000-4200 रुपए के बीच था। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मध्यप्रदेश में सोयाबीन के भावों को लेकर किसानों में उत्साह मध्य प्रदेश के किसानों से जुड़ी संस्था समृद्ध किसान के वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि इस साल मध्य प्रदेश के किसानों को सोयाबीन का उचित भाव मिल रहा है, जिससे में सोयाबीन बेचने वाले किसानों में उत्साह दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के ही उज्जैन जिले के बढऩगर की फॉर्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी के सुरेन्द्र का कहना है कि मंडियों में अच्छी क्वालिटी के सोयाबीन का दाम 4300 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हाजिर में भाव बढऩे से वायदा में भी तेजी का रुख है। उनका कहना है कि बाजार में जितनी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी किसानों को उनकी उपज का भाव बाजिव मिलेगा। इस बार भारी बारिश से सोयाबीन की फसल में हुआ नुकसान, दाम बढऩे से हो सकेगी भरपाई इस बार कई जगह भारी बारिश की वजह से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन में कमी आई है। बात करें देश में सबसे अधिक सोयाबीन उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की तो यहां इस साल भारी बारिश के कारण 20 फीसदी नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें मध्यप्रदेश में बारिश की कमी और महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश की वजह से फसल बर्बाद हुई। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। अब चूंकी बाजार में किसानों को सोयाबीन के अच्छे दाम मिल रहे हैं इससे किसानों के नुकसान की भरपाई हो सकेगी। सोयाबीन का बाजार भाव व एमएसपी में कितना अंतर सोयाबीन का सरकारी एमएसपी- 3880 रुपए प्रति क्विंटल सोयाबीन के निजी मंडियों में भाव- 4000 रुपए प्रति क्विंटल (महाराष्ट्र) सोयाबीन का बाजार भाव- 4243 रुपए प्रति क्विंटल (महाराष्ट्र) भावों का अंतर देखें तो सोयाबीन का बाजार भाव, सरकार द्वारा तय किए गए भाव से काफी ज्यादा हैं। इससे किसानों को निजी मंडियों में सोयाबीन बेचने से फायदा हो रहा है। फिर भी सरकार द्वारा तय किए गए भावों से एक फायदा है कि खरीद शुरू होने पर इससे कम भाव में व्यापारी किसानों से सोयाबीन की खरीद नहीं कर पाएंगे। इसलिए एमएसपी भी किसान के लिए बेहद जरूरी हैं ताकि बाजार में भाव नीचे गिरने लगे तो किसान एमएसपी पर अपनी उपज बेचकर अपनी हानि की भरपाई कर सके। सोयाबीन की बुआई से लेकर कटाई तक आता है इतना खर्चा सोयाबीन फसल की बुआई से लेकर कटाई तक किसानों को प्रति बीघा के हिसाब से करीब ढाई हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। किसानों के द्वारा बताया जा रहा है कि, प्रति बीघा जमीन की 02 वार की जुताई 750 रुपए, पंजी की हकाई 250 रुपए, सोयाबीन की बुवाई 250 रुपए, 1200 रुपए की बीज, थ्रेसर की कटाई 500 रुपए, दबाई 200 रुपए और मजदूरों से कटाई 1000 यानि कुल 4 हजार से 4200 रुपए का खर्चा करना पड़ता है। इस हिसाब से देखें तो सोयाबीन की फसल बेचने से किसान की लागत ही निकल पाती है। इसलिए किसानों को चाहिए कि सोयाबीन की फसल के साथ अन्य सहायक फसलें भी उगाएं ताकि एक फसल में हानि होने पर दूसरी फसल को बेचकर उसकी भरपाई की जा सके। राजस्थान में एक नवंबर से शुरू हो रही है सोयाबीन की खरीद राजस्थान में सोयाबीन और मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी। इसके लिए 20 अक्टूबर से पंजीयन शुरू हो जाएगा। मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के मुताबिक सोयाबीन के लिए 79 खरीद केन्द्र चिह्नित किए गए हैं। ई-मित्र और खरीद केन्द्रों पर ऑनलाइन पंजीकरण सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक हो सकेगा। बिना पंजीकरण के किसानों से खरीद नहीं होगी। इस बार राजस्थान में किसानों से सोयाबीन की 2.92 लाख टन उपज खरीदने का लक्ष्य हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समर्थन मूल्य पर खरीद : राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली के लिए पंजीकरण 20 से

समर्थन मूल्य पर खरीद : राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली के लिए पंजीकरण 20 से

किसान ई-मित्र व खरीद केंद्रों पर करा सकेंगे पंजीकरण, किसानों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे हैं 850 से अधिक खरीद केंद्र देश के कई राज्यों में इस समय खरीफ की उपज की खरीद शुरू हो चुकी है। हरियाणा और पंजाब में धान, कपास आदि की खरीद का कार्य जोरशोर से चल रहा है। वहीं राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद नवंबर माह में शुरू की जानी है जिसको लेकर यहां तैयारियां चल रही हैं। राजस्थान में किसानों को फसल बेचने से पहले अपना पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के अभाव में किसान यहां समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बेच पाएंगे। राजस्थान राज्य में समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 20 अक्टूबर 2020 से शुरू किए जा रहे हैं। इस वर्ष राजस्थान में केंद्र सरकार ने मूंग की 3.57 लाख मीट्रिक टन, उड़द 71.55 हजार, सोयाबीन 2.92 लाख तथा मूंगफली 3.74 लाख मीट्रिक टन की खरीद के लक्ष्य की स्वीकृति दी है। पंजीकरण के अभाव में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद संभव नहीं होगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसानों से कब की जाएगी समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू राजस्थान में किसान 850 से अधिक खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केन्द्रों पर मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की उपज 1 नवंबर से तथा 18 नवंबर से मूंगफली की उपज पर समर्थन मूल्य पर बेच सकेगें। मूंग के लिए 365, उड़द के लिए 161, मूंगफली के 266 एवं सोयाबीन के लिए 79 खरीद केंद्र बनाए जा रहे हैं जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 500 अधिक हैं। पंजीकृत किसान इन खरीद केन्द्रों पर अपनी उपज को लाकर बेच सकते हैं। कब और कैसे करवाएं पंजीकरण किसानों की सुविधा के लिए यहां ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था ई-मित्र केंद्र व केन्द्रों पर सुबह 9 बजे से सायं 7 बजे तक की गई है। इच्छुक किसान ई-मित्र केंद्र पर 20 अक्टूबर से अपनी उपज बेचने के लिए पण पंजीकरण करवा सकते हैं। किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगें। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि जिस तहसील में कृषि भूमि है उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केंद्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण करावें। दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नहीें होगा। पंजीकरण कराते समय इन बातों का रखें ध्यान किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाइल नंबर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके। किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो। पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज किसान को पंजीकरण केंद्र पर अपने साथ जनआधार कार्ड नंबर, खसरा नंबर, गिरदावरी की प्रति, बैंक पासबुक की प्रति ले जानी होगी। किसानों को यह दस्तावेज पंजीकरण फार्म के साथ अपलोड करने होंगे। जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जाएगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए मान्य नहीं होगा। यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किए जाते हैं या तहसील के बाहर पंजीकरण किए जाते हैं तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2020-21 के लिए सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य वर्ष 2020-21 के लिए सरकार की ओर से मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली का समर्थन मूल्य तय किए गए हैं। इसमें उड़द का समर्थन मूल्य 6000 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग का समर्थन मूल्य 7196 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली का समर्थन मूल्य 5275 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3880 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। पंजीकरण में समस्या होने पर किसान यहां कर सकते हैं संपर्क पंजीकरण कराने में यदि किसानों को कोई समस्या आ रही हो तो वे इसके समाधान हेतु राजफैड स्तर पर ट्रोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 पर सुबह 9 से 7 बजे तक दर्ज करा सकते हैं। यह टोल फ्री नंबर 20 अक्टूबर से कार्य करना शुरू कर देगा। इसके अलावा किसान अपनी शिकायत/समस्या को लिखित में राजफैड मुख्यालय में स्थापित काल सेंटर पर [email protected] पर मेल भेज सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब किसानों को मिल सकेगी गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी

अब किसानों को मिल सकेगी गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी

कृषि वैज्ञानिकों ने विकसित की पोष्टिकता से भरपूर बॉयोफोर्टीफाइड नई किस्में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑरेनाइजेशन एफपीओ की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बीजों की वैरायटी को देश को समर्पित किया है। बताया जा रहा है कि जारी किए गए बीजों की वैरायटी अन्य बीजों के मुकाबले पोष्टिता से भरपूर है और ये किसानों और आम नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित होगी। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार पीएम मोदी ने इन 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी को देश समर्पित करते हुए कहा कि अब कुपोषण से निपटने के लिए महत्वपूर्ण दिशा में काम हो रहे हैं। अब देश में ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें पोष्टिक पदार्थ- जैसे प्रोटीन, आयरन, जिंक आदि होते हैं। मोटे अनाज- जैसे रागी, ज्वार, बाजरा, कोडो, झांगोरा, बार्री, कोटकी इन जैसे अनाज की पैदावार बढ़े, लोग अपने भोजन में इन्हें शामिल करें। उन्होंने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय बाजरा दिवस घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने कुपोषण खत्म करने की दिशा में काम के लिए किसान, कृषि वैज्ञानिकों सहित आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता को बधाई दी और कहा कि यह इस आंदोलन के आधार हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 यह है कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई 17 बायोफोर्टीफाइड नई किस्में गेहूं : एचआई-1633, एचडी-3298, डीबीडब्ल्यू-303 और एमएसीएस-4058, चावल- सीआरधान-315, मक्का- एलक्यूएमएच-1, एलक्यूएमएच-3, रागी- सीएफएमवी-1, सीएफएमवी-2, सावा– सीएलएवी-1, सरसों- पीएम-32, मूंगफली : गिरनार-4, गिरनार-5 किस्में. रतालू- डीए-340 एवं श्रीनीलिमा नई किस्में जारी की गई हैं। क्या होती है बॉयोफोर्टिफाइड किस्में बायोफोर्टिफिकेशन, पादप प्रजनन द्वारा फसलों की पोषक गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक है। बायोफोर्टिफिकेशन साधारण फोर्टिफिकेशन से अलग है, क्योंकि इसमें फसलों को अधिक पौष्टिक बनाया जाता है। बायोफोर्टिफाइड तकनीक द्वारा फसलों की पोषकता में बढ़ोतरी होती है। वैज्ञानिक इन फसलों के विकास के दौरान उनके बीज में पोषक तत्व और विटामिन, जड़ द्वारा अवशोषित कर बायोफोर्टिफाइड कर रहे हैं। फसलों पर ऐसे किया जाता है बायोफोर्टिफिकेशन बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक में परंपरागत पादप प्रजजन तकनीक से उच्च सूक्ष्म तत्व वाली किस्म का पता लगाया जाता है। इन किस्मों को उच्च उत्पादन देने वाली किस्म से संकरण करवाया जाता है। इससे इन किस्मों में उच्च उत्पादक गुणों के साथ-साथ उच्च मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व और जरूरी विटामिन उपलब्ध हो सके, जो कि किसानों के लिए फायदेमंद हो सके। ऐसे होता है बायोफोर्टिफिकेशन हाल ही में जारी की गई बॉयोफोर्टीफाइड बीज की किस्मों से पहले भी कई किस्में जारी की गई हैं। हम यहां उदाहरण के तौर पर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इन नई किस्मों से पहले जारी की गई बीजों की किस्मों के द्वारा बायोफोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को इस तरह से समझ सकते हैं- धान : विटामिन ए, फोलिक एसिड, अधिक आयरन गोल्डन राइस पहली बायोफोर्टिफाइड फसल है। संकरण तकनीक से धान में बीटा केरोटीन जीन डाला गया है। यदि रोजाना 40 ग्राम सुनहरा चावला पकाकर खाए जो अंधापन नहीं होगा। मक्का : विटामिन, आयरन, प्रो-विटामिन, विटामिन ई पोषक जरूरतों को पूरा करने के लिए क्यूपीएम मक्का अच्छा विकल्प है। क्योंकि इसमें 3.3 से 4 ग्राम प्रति 100 ग्राम लाइसिन प्रोटीन पाया जाता है, जो साधारण मक्का से दोगुना है। बॉयोफोर्टीफाइड किस्मों की विशेषताएं / लाभ गेहूं और धान सहित अनेक फसलों के 17 नए बीजों की वैरायटी, देश के किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। हमारे यहां अक्सर हम देखते हैं कि कुछ फसलों की सामान्य वैरायटी में किसी न किसी पौष्टिक पदार्थ या माइक्रो-न्यूट्रिएंट की कमी रहती है। इन फसलों की अच्छी वैरायटी, बॉयोफोर्टीफाइड वैरायटी, इन कमियों को दूर कर देती है, अनाज की पौष्टिकता बढ़ाती है। बीते वर्षों में देश में ऐसी वैरायटीज, ऐसे बीजों की रिसर्च और डवलपमेंट में काम हुआ है। आज अलग-अलग फसलों की 70 बॉयोफोर्टीफाइड किस्में किसानों को उपलब्ध हैं। इन वैरायटियों के इस्तेमाल से जहां किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता है वहीं लोगों को पोष्टिकता से भरपूर भोजन। इस तरह ये नई किस्में किसानों व आम लोगों दोनों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगी। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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