राजस्थान की मंडियों में हड़ताल से किसानों की मुश्किले बढ़ी, 15 मई तक रहेगी मंडी बंद

राजस्थान की मंडियों में हड़ताल से किसानों की मुश्किले बढ़ी, 15 मई तक रहेगी मंडी बंद

Posted On - 12 May 2020

औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है फसल, 15 मई तक रहेगी मंडी बंद

राजस्थान में व्यापारियों और सरकार के बीच दो फीसदी कृषक कल्याण शुल्क का लेकर समझौता नहीं होने से जिंसा मंडियों में व्यापारियों ने हड़ताल 15 मई तक बढ़ा दी है। इससे राज्य की 247 कृषि उपज मंडियां बंद है जिससे राज्य के किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रबी फसलों की आवक का समय चल रहा है, लेकिन मंडियों में हड़ताल होने की वजह से किसानों को गेहूं, सरसों, चना, जौ आदि फसलें औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। गौरतलब है कि इस शुल्क को वापस लेने की मांग को लेकर मंडी व्यापारी छह मई से हड़ताल पर हैं।

इस संबंध में राजस्थान खाद्य व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता का कहना है कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं किए जाने के कारण हमने हड़ताल फिलहाल 15 मई तक बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में आगे का फैसला भी सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। इस हड़ताल के कारण राज्य की 247 कृषि उपज मंडियां बंद हैं। गुप्ता के अनुसार संकट के इस समय में ऐसा शुल्क लगाना राज्य के खाद्य पदार्थ व्यापारियों के लिए घातक है।

 

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कृषक कोष के लिए पैसा जुटाने के लिए सरकार ने लगाया शुल्क, व्यापारियों ने किया विरोध  

राजस्थान सरकार ने कृषक कल्याण कोष के लिए पैसा जुटाने के लिए राज्य के मंडियों में कृषि उपजों की खरीद-बिक्री पर दो फीसदी कृषक कल्याण शुल्क लगाने की घोषणा पांच मई को की थी। इसको लेकर व्यापारियों ने विरोध किया और मंडी बंद करने की घोषणा कर दी। व्यापारियों का मानना है कि सरकार द्वारा शुल्क लगाना उनके लिए व्यापारियों के हित में नहीं है। इधर प्रमुख शासन सचिव (कृषि) नरेशपाल गंगवार के अनुसार कृषि उपज मंडी में उपज की खरीद-बिक्री पर लगाए गए कृषक कल्याण शुल्क का भार किसानों और व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि पडौसी राज्यों में मंडी और विकास शुल्क मिलाकर अब भी राजस्थान से ज्यादा है। गंगवार ने बताया कि राजस्थान में अधिसूचित कृषि जिन्सों का मंडी शुल्क 0.01 फीसदी से 1.60 फीसदी तक है जबकि पड़ोसी राज्यों में मंडी शुल्क की दरें तुलनात्मक रूप से ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब व हरियाणा में तो पहले ही मंडी शुल्क के अतिरिक्त विकास शुल्क भी लिया जा रहा है।

 

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