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आत्मनिर्भर भारत अभियान : सरकार डेयरी किसानों को देगी क्रेडिट कार्ड

आत्मनिर्भर भारत अभियान : सरकार डेयरी किसानों को देगी क्रेडिट कार्ड

04 June, 2020

डेयरी किसानों के लिए सरकार की खास योजना

ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पिछले दिनों केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। अब इस पैकेज का असर विभिन्न सेक्टरों में दिखना शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने डेयरी और पशुपालन के कार्य से जुड़े किसानों के लिए खास योजना शुरू की है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अब दो महीने के दौरान यानी 31 जुलाई तक देश के डेढ़ करोड़ डेयरी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए डेयरी किसानों को बिना गारंटी के 3 लाख रुपए तक का लोन मिलेगा। तो ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से जानते हैं योजना की पूरी जानकारी।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

डेयरी किसान क्रेडिट कार्ड की खास बातें

  • 1.5 करोड़ डेयरी किसानों को केसीसी प्रदान करने का विशेष अभियान किसानों के लिए प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का अंग है।  
  • वित्त मंत्री ने 15 मई 2020 को केसीसी योजना के तहत 2.5 करोड़ नए किसानों को शामिल करने की घोषणा की थी। 
  • केंद्र सरकार ने यह अभियान मिशन मोड पर 1 जून से शुरू कर दिया है। 
  • इसके तहत अगले दो महीनों तक यानी 31 जुलाई 2020 तक दुग्ध संघों और दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़े 1.5 करोड़ डेयरी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) उपलब्ध कराए जाएंगे। 
  • इस अभियान के पहले चरण में, उन सभी किसानों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है जो डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य हैं और विभिन्न दुग्ध संघों से जुड़े हैं और जिनके पास केसीसी नहीं है। 
  • जिन किसानों के पास पहले से ही अपने भू स्वामित्व के आधार पर केसीसी है, वे अपनी केसीसी लोन की सीमा को बढ़ा सकते हैं, हालांकि ब्याज की दरों से संबंधित वित्तीय सहायता केवल 3 लाख रुपये की सीमा तक ही उपलब्ध होगी। 
  • वैसे तो गारंटर के बिना केसीसी लोन की सामान्य सीमा 1 लाख 6० हजार रुपए है, लेकिन जिन किसानों का दूध सीधे तौर पर दुग्ध संघों द्वारा खरीदा जाता है, उनके लिए बिना गारंटी के लोन की सीमा 3 लाख रुपए तक हो सकती है। 
  • इससे दुग्ध संघों से जुड़े डेयरी किसानों के लिए ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और साथ ही बैंकों को लोन चुकता होने का आश्वासन भी मिलेगा।
  • यह कदम अर्थव्यवस्था की हाल की मंदी से पीडि़त किसानों के हाथों में 5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी प्रदान करेगा।
  • डेयरी सेक्टर पिछले 5 वर्षों में 6 प्रतिशत से अधिक सीएजीआर के साथ अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। इसलिए डेयरी किसानों को कार्यशील पूंजी, विपणन आदि के लिए उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अल्पकालिक लोन प्रदान करने से उनकी उत्पादकता में जबरदस्त वृद्धि होगी।

 

 

डेयरी किसानों को केसीसी के लिए आवेदन/डेयरी किसानों को लोन के लिए आवेदन

डेयरी किसानों को केसीसी उपलब्ध कराने की योजना तहत अगले दो महीनों यानी 31 जुलाई, 2020 तक दुग्ध संघों और दुग्ध उत्पादक कम्पनियों से जुड़े 1.5 करोड़ डेयरी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने इस अभियान को मिशन के रूप में लागू करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग के साथ मिलकर सभी राज्य दुग्ध महासंघ और दुग्ध संघों को पहले ही उपयुक्त परिपत्र और केसीसी आवेदन प्रारूप जारी कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि डेयरी सहकारिता अभियान के तहत देश के लगभग 1.7 करोड़ किसान 230 दुग्ध संघों के साथ संबद्ध हैं।

 

यह भी पढ़ें : मोबाइल से भरें आवेदन, 50 लाख लोगों को तुंरत मिलेगा लोन!

 

किसानों को अल्पकालीन ऋण की सुविधा

पशुपालन और डेयरी विभाग भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के तहत आता है। सरकार ने किसानों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान कार्ड पर ऋण देने की योजनाएं चला रखी है। जानवरों को पालने, डेयरी आदि संबंधी गतिविधियों में ऋण की आवश्यकता को पूर्ण करने, पक्षियों, मछली, झींगा, अन्य जलीय जीवों, मछलियों को पकडऩे  के लिए अल्पकालिक क्रेडिट मिलता है। क्रेडिट कार्ड धारी किसान पशुपालन एवं मछली पालन आदि गतिविधियों के लिए अल्पकालिक ऋण ले सकते हैं। किसानों को क्रेडिट कार्ड मुहैया कराने में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग पूरा सहयोग करेगा।

 

जानिएं, क्या है किसान क्रेडिट कार्ड

सरकार का इरादा किसानों को खेती से जुड़ी चीजों जैसे बीज, खाद, कीटनाशक आदि खरीदने के लिए कर्ज उपलब्ध कराना है। बैंक किसान क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य यह है कि किसानों को साहूकारों से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़े। इसके तहत लिए गए लोन को यदि किसान ने समय पर चुकाया तो उसे 2 से 4 प्रतिशत तक कम ब्याज चुकाना होता है।

 

 

अर्थव्यवस्था की मंदी दूर करने का प्रयास/सरकार का सस्ता लोन

कोरोना लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था में आई मंदी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया गया था। इसमें कृषि और सहायक गतिविधियों और एमएसएमई समेत इकनॉमी के कई सेक्टरों के लिए सस्ते लोन की व्यवस्था की गई है। एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया जा चुका है। इस सेक्टर में कम से कम 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

 

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दालों ने पकड़ी तेजी की रफ्तार, अरहर में 500 रुपए क्विंटल की तेजी

दालों ने पकड़ी तेजी की रफ्तार, अरहर में 500 रुपए क्विंटल की तेजी

अरहर, उड़द व चना दाल की कीमतों में भारी इजाफा, अभी तीन महीने बाद आएगी नई फसल कोरोना संक्रमण काल में जहां आम आदमी की आमदनी कम हुई है वहीं खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। सब्जियों के भावों में तेजी के बाद अब दालों के भावों ने भी तेजी की रफ्तार पकड़ ली है। साबुत दालों की कीमतों में आई तेजी का असर अरहर, उड़द आर चना दाल की कीमतों पर देखा जा रहा है। थोक में लेमन अरहर दाल की कीमतों में 500 रुपए की तेजी देखी गई है। दिल्ली के नया बाजार में लेमन अरहर दाल के भाव 10 हजार 400 से 10 हजार 800 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए हैं। वहीं दिल्ली में उड़द धोया की कीमतों में 300 रुपए की तेजी आई है, भाव 9600 से 9800 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए हैं। चना दाल के भाव भी तेजी के बाद 6300 से 6600 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं। मूंग धोया के भाव 8500 से 8800 रुपए और मसूर मल्का कोरी के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर बने हुए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 दाल की कीमतों में तेजी के कारण बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारी बारिश से देश के कई हिस्सों में फसल खराब हुई है। उड़द और मूंग की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कुछ हिस्सों में तुअर की फसल भी बर्बाद हुई। बारिश के कारण फसल को नुकसान और मांग में सुधार के कारण दालों की कीमतों में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है। सरकार द्वारा आयात लाइसेंस जारी नहीं करने के कारण भी घरेलू बाजार में तुअर की सप्लाई कम हुई है जिससे कीमतों को और सपोर्ट मिला है। नैफेड के तुअर ना बेचने से भी कीमतों में तेजी आई है। त्योहारी मांग से चना में लगातार तेजी, मूंग व उड़द के दाम भी बढ़े चने की दाल में भी लगातार तेजी बनी हुई है और भविष्य में त्योहारी डिमांड के चलते तेजी की संभावना है। पिछले एक महीने के दौरान चने की कीमतों में 40 फीसदी का उछाल आया है। एनसीडीईएक्स पर चना 5600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। खरीफ दलहन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढऩे से इसको सहारा मिल रहा है। नैफेड के पास चना का काफी स्टॉक है। सरकार 13.77 लाख टन दलहन और तिलहन खरीदेगी। व्यापारियों के अनुसार चार महीने बाद जब नई फसल आएगी तब ही कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। इसके साथ ही अगर मटर की दाल के इंपोर्ट पर लगा बैन हट जाता है तो चने की कीमतें नीचे आ जाएंगी। इसके अलावा मूंग और उड़द दाल भी 10 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। व्यापारियों ने की आयात कोटा जारी करने की मांग चना दाल की कीमतें पिछले साल इस अवधि में 70-80 रुपये प्रति किलो थी लेकिन इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। अरहर दाल 115 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारोबारियों की मांग है कि सरकारी एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) को सप्लाई बढ़ाने के लिए अपना स्टॉक रिलीज करना चाहिए। देश के अंदर सप्लाई में गिरावट आई है। जबकि, डिमांड लगातार बढ़ रही है। इसलिए कारोबारियों ने 2020-21 के लिए आयात कोटा जारी करने की मांग की है। इस साल बंपर पैदावार का अनुसार सरकार का मानना है कि आपूर्ति की स्थिति ठीकठाक है और अगले तीन महीने में खरीफ सीजन की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाएगी। इस साल बंपर पैदावार का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक भारत को उम्मीद है कि खरीफ सीजन में दालों का कुल उत्पादन 93 लाख टन होगा। अरहर का उत्पादन पिछले साल के 38.3 लाख टन के मुकाबले इस साल बढक़र 40 लाख टन होने की उम्मीद है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

मोती की खेती (Pearl Farming) का सीजन शुरू, कम जगह और थोड़ी सी लागत से लाखों रुपए का मुनाफा ट्रैक्टर जंक्शन में किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम आपको मोती की खेती से कमाई संबंधित सभी जानकारी देंगे। देशभर में किसान पारंपरिक खेती के अलावा अन्य विकल्पों में भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं और अपनी कमाई का जरिया बढ़ा रहे हैं। देश का किसान मोती की खेती से भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मोती की खेती के लिए सरकार की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है। साथ ही कई बैंकों की ओर से मोती की खेती के लिए आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। तो आइए जानते हैं मोती की खेती के बारे में संपूर्ण जानकारी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मोती की खेती कैसे होती है? ( pearl cultivation ) यहां पर हम आपको मोती की खेती के मौसम, आवश्यक जगह, लागत, ट्रेनिंग सेंटर व बाजार में मोतियों की बिक्री व कीमत के बारे में जानकारी दे रहे हैं। मोती की खेती के लिए मौसम मोती की खेती से कम लागत और मेहनत में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना है, इसलिए किसानों का रूझान मोती की खेती तरफ भी बढ़ा है। मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानि अक्टूबर से दिसंबर तक का महीना माना गया है। मोती की खेती के लिए जमीन या जगह मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। किसान भाई अपने खेत या घर के आसपास छोटी जगह पर मोती की खेती कर सकते हैं। मोती की खेती के लिए 500 वर्गफीट का तालाब होना चाहिए। इस तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू किया जा सकता है। मोती की खेती में लागत किसान भाई 500 वर्गफीट के तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू कर सकते हैं। बाजार में सीप की कीमत 15 से 25 रुपए प्रति नग होती है। वहीं तालाब बनाने पर करीब 15 से 20 हजार रुपए का खर्चा आता है। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट और उपकरणों पर भी 5 हजार रुपए तक का खर्चा आता है। सीप को कैसे करें तैयार मोती की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले तालाब या नदी आदि जगहों से सीपों को इकट्ठा किया जाता है। इसके अलावा सीपों को बाजार से भी खरीदा जा सकता है। सीप आप सरकारी संस्थानों से या मछुआरों से ले सकते हैं। सबसे पहले इन सीपों को खुले पानी में डाला जाता है। फिर 2 से 3 दिन बाद इन्हें निकाला जाता है। ऐसा करने से सीप के ऊपर का कवच और उसकी मांसपेशियां नरम हो जाती हैं। इनमें मामूली सर्जरी के माध्यम से उसकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद किया जाता है। इसके बाद इस छेद में से रेत का एक छोटा सा कण डाला दिया जाता है। इस तरह से सीप में रेत का कण डाला जाता है, तो सीप में चुभन होती है और सीप अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोडऩा शुरू कर देता है। इसके बाद 2 से 3 सीप को एक नायलॉन के बैग में रखकर तालाब में बांस या किसी पाईप के सहारे छोड़ा जाता है। बाद में इस सीप से 15 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाता है। अब कवच को तोडक़र मोती निकाला जाता है। भारत में मोती तैयार करने की विधि भारत में मोती तैयार करने की तीन विधियां ज्यादा प्रचलित हैं। इनमें केवीटी, गोनट और मेंटलटीसू शामिल है। केवीटी में सीप के अंदर ऑपरेशन के जरिए फारेन बॉडी डालकर मोती तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल अंगूठी और लॉकेट बनाने में होता है। चमकदार होने के कारण एक मोती की कीमत हजारों रुपए में होती है। गोनट में प्राकृतिक रूप से गोल आकार का मोती तैयार होता है। मोती चमकदार व सुंदर होता है। एक मोती की कीमत आकार व चमक के अनुसार 1 हजार से 50 हजार रुपए तक होती है। मेंटलटीस पद्धति में सीप के अंदर सीप की बॉडी का हिस्सा ही डाला जाता है। इस मोती का उपयोग खाने के पदार्थों जैसे मोती भस्म, च्यवनप्राश व टॉनिक बनाने में होता है। बाजार में इसकी सबसे ज्यादा मांग है। मोती की खेती से लाभ किसान भाई मोती की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं। एक सीप से एक मोती १५ से 20 महीने बाद तैयार होता है। वर्तमान में एक सीप का बाजार भाव करीब 20 से 30 रुपए के बीच है। बाजार में एक मिमी से लेकर 20 मिमी साइज के सीप के मोती का दाम करीब 300 रुपए से लेकर 2000 रुपए के बीच मिलता है। सीप से मोती निकालने के बाद सीप को बाजार में भी बेच जा सकता है। भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशों में मोती का निर्यात कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है। सीप की संख्या को बढ़ाकर कमाई को बढ़ाया जा सकता है। असली मोती की कीमत अगर किसान भाई चाहें तो हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई जैसे शहरों में सीधे भी अपने मोती बेच सकते हैं। इन शहरों में हजारों कारोबारी हैं, जो मोती का के व्यवसाय में लगे हुए हैं। वहीं कई बड़ी कंपनियां देशभर में अपने एजेंटों के माध्यमों से मोतियों को खरीदती हैं। आप चाहें तो इन कंपनियों से भी संपर्क में रह सकते हैं। अगर आपको इंटरनेट की समझ है तो आप ऑनलाइन भी अपने मोती बेच सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार एक असली मोती की कीमत लगभग 360 रुपये / कैरेट और 1800 रुपये प्रति ग्राम होती है। मोती की खेती की ट्रेनिंग देश में मोती की खेती के लिए कई जगह ट्रेनिंग मिलती है। मोती की खेती थोड़ा वैज्ञानिक खेती है। इसलिए इसे शुरू करने से पहले किसानों को प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इंडियर काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत एक विंग देश में बना हुआ है। इस विंग का नाम सीफा यानी सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर है। यह मोती की खेती की ट्रेनिंग देता है। इसका मुख्यालय उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में है। यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यहां पर कोई भी 15 दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है। भारत सरकार का सेंट्रल मेरिन फिसरिज रिसर्च इंस्टीच्यूट ने केरल के तिरुवनंतपुरम में व्यवसायिक रूप से मोती के उत्पादन का बड़ा केंद्र स्थापित किया है। मोती की खेती के लिए लोन मोती की खेती के लिए कई संस्थाओं व बैंकों द्वारा लोन उपलब्ध कराया जाता है। यह लोन नाबार्ड और कई बैंक से मिलता है। इस लोन पर कम ब्याज देना होता है और 15 सालों तक चुकाने के लिए समय भी मिलता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

धान की सरकारी खरीद  : केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 41,084 किसानों से की 6 लाख टन धान की खरीद

धान की सरकारी खरीद : केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 41,084 किसानों से की 6 लाख टन धान की खरीद

41,084 किसानों के जेब में पहुंचे 1,082.46 करोड़ रुपए किसानों की ओर से नए कृषि कानून के विरोध के बीच शुरू की गई धान की समर्थन मूल्य पर खरीद जोरो पर चल रही है। पिछले 8 दिनों में केद्र सरकार ने करीब 5.73 लाख टन धान की खरीद की है। इससे किसानों के जेब में करीब 1,082.46 करोड़ रुपए पहुंचे हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक केंद्र सरकार की ओर से 6 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। केंद्र के अनुसार पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों से पिछले आठ दिनों में 1,082.46 करोड़ रुपए का लगभग 5.73 लाख टन धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। सरकार ने बताया है कि 41,084 किसानों से एमएसपी पर 1,082.46 करोड़ रुपये का धान खरीदा गया है। पंजाब और हरियाणा में 26 सितंबर से धान की खरीद शुरू हुई, जबकि अन्य राज्यों में यह 28 सितंबर से शुरू हुई। खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 3 अक्टूबर तक धान की कुल खरीद 5,73,339 टन रही है। बता दें कि सरकार ने चालू वर्ष के लिए धान का एमएसपी (सामान्य ग्रेड) 1,868 रुपए प्रति क्विंटल और ए ग्रेड किस्म का धान का एमएसपी 1,888 रुपए प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने इस खरीफ सत्र (2020-21) में समर्थन मूल्य के अनुसार 495 लाख टन (49.5 मिलियन टन) धान खरीद का लक्ष्य रखा है। पिछले साल सरकार ने लगभग 420 लाख टन धान की खरीद की थी जिसको इस साल बढ़ाकर 495 लाख टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 धान की खरीद को लेकर हरियाणा में ये है व्यवस्था वैसे राज्य सरकार ने अधिकारियों ने ऐसी तैयारी की है कि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। इसके लिए हरियाणा में इस बार धान की खरीद के लिए 200 अतिरिक्त केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ राज्य में कुल 400 धान खरीद केंद्र हो जाएंगे। ये खरीद केंद्र उन 8 जिलों में बनाए जा रहे हैं जिनमें धान की पैदावार अधिक होती है। इसी के साथ हरियाणा में खरीद के लिए मेरा पोर्टल मेरा ब्योरा के तहत पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। इधर पंजाब में धान की खरीद के लिए बनाए गए खरीद केंद्रों पर किसानों की आवाजाही बनी हुई है। हालांकि पंजाब में कृषि कानून विरोध के जारी रहने से इस बार यहां की मंडियों में किसानों की आवाजाही में कमी आई है। छत्तीसगढ़ में एक नबंवर से धान की खरीद शुरू करने की मांग मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार छत्तीसगढ़ में धान की खरीद शुरू करने को लेकर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में फैसला लेते हुए 60 लाख मीट्रिक टन धान लेने का फैसला किया है। इस हिसाब से प्रदेश को 90 लाख मीट्रिक टन धान की आवश्कता पड़ेगी। हमारी मांग है कि प्रदेश सरकार भी किसानों के हित में फैसला लेते हुए अब प्रति एकड़ 15 क्विंटल के स्थान पर 20 क्विंटल धान की खरीद करें। साथ ही धान की खरीद एक नबंवर से शुरू की जानी चाहिए। बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और अभी यहां धान की खरीद को लेकर तारीख तय की जानी है। इधर सीसीआई ने खरीदी 40.80 लाख रुपए की कपास जानकारी के अनुसार कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया सीसीआई ने 40.80 लाख रुपए में एमएसपी पर 147 गांठ खरीदी है। कपास की एक गांठ 170 किलोग्राम की होती है। पिछले साल भारतीय कपास निगम यानी कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा हरियाणा के किसानों से सीधे 30 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई थी। बता दें कि इस साल खरीफ सीजन की कपास के लिए केंद्र सरकार ने 5515 और 5825 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 5515 रुपए/क्विंटल और स्टेपल कपास का एमएसपी 5825 रुपए/ क्विंटल है। पिछले साल यह मूल्य 5,150 और 5,450 रुपए था। कपास खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई हरियाणा सरकार ने इस वर्ष 2020-2021 में कपास की खरीद को और बढ़ाने का लक्ष्य निधारित किया है। कपास की खरीद के लिए पिछले साल हरियाणा में 20 कपास खरीद केंद्र थे, जिसे इस साल बढ़ाकर 40 कर दिया गया है। कपास को लेकर सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि कपास की खरीद के दौरान 12 फीसदी तक नमी के पहले से ही तय मानक का पालन किया जाएगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू

उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू

जानें क्या है खरीद केंदों पर व्यवस्था और किस समय होगी खरीद, 28 फरवरी 2021 तक जारी रहेगी धान की खरीद उत्तर प्रदेश में धान की खरीद गुरुवार से शुरू हो गई है। इसके लिए विभिन्न खरीद केंद्रों पर समुचित व्यवस्था की गई है ताकि किसानों को कोई परेशानी नहीं हो। उत्तरप्रदेश सरकार इस बार किसानों से 50 लाख टन धान की खरीद करेगी। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मीडिया को बताया कि मंत्रिमंडल ने धान खरीद नीति को अनुमोदित करते हुए सामान्य किस्म के धान को 1850 रुपए प्रति क्विंटल तथा ए ग्रेड के धान को 1837 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि धान की छान-बीन के लिए किसानों को 20 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से अतिरिक्त धनराशि चुकाई जाएगी। शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018-9 में 48 लाख 25 हजार टन धान खरीदा गया था। वहीं 2019-20 में 50 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सामान्य श्रेणी का धान 1750 रुपए प्रति क्विंटल जबकि ए ग्रेड का धान 1770 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया था। साथ ही धान की साफ सफाई के लिए 20 रुपए प्रति क्विंटल अलग से भुगतान किया गया था। शर्मा ने बताया कि धान खरीद एक अक्टूबर से शुरू होकर अगले साल 28 फरवरी तक जारी रहेगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कब राज्य के किस जिले में होगी खरीद खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए खाद्य एवं रसद विभाग की प्रमुख सचिव वीणा कुमारी ने मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत धान क्रय नीति जारी की है। धान क्रय नीति के तहत लखनऊ संभाग के जनपद हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर तथा संभाग बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़ तथा झांसी में धान खरीदी की अवधि 1 अक्टूबर 2020 से 31 जनवरी, 2021 तक धान की खरीद की जाएगी। वहीं लखनऊ संभाग के जनपद लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव व चित्रकूट, कानपुर, फैजाबाद, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर एवं प्रयागराज मंडलों में 1 नवंबर, 2020 से 28 फरवरी, 2021 तक धान खरीदी जाएगी। यहां धान के खरीद केंद्रों के खुलने का समय सुबह 9.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक का रहेगा। किसानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों के समय में किया जा सकेगा परिवर्तन धान खरीद नीति के अनुसार जिलाधिकारी, स्थानीय परिस्थितयों के अनुसार खरीदी केंद्रों के खुलने एवं बंद करने के समय में आवश्यक परिवर्तन कर सकेंगें। किसानों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों को छोडक़र शेष कार्य दिवसों में धान केंद्र खुले रहेंगे। जिलाधिकारी केंद्रों पर धान की आवक व लक्ष्यपूर्ति को ध्यान में रखते हुए अवकाश के दिनों में भी धान की खरीद की जाएगी। इस बार 3000 खरीद केंद्र खोला जाना है प्रस्तावित खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए 3000 खरीद केंद्र खोला जाना प्रस्तावित है। खरीदी केंद्रों का निर्धारण एवं चयन जिलाधिकारी द्वारा इस प्रकार किया जाएगा की किसान को अपना धान बेचने के लिए 08 किलोमीटर से ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े। उपज खरीद सत्र में 100 मीट्रिक टन से कम खरीद की संभावना वाले क्षेत्र में विकास खंड स्तर पर अधिकतम एक केंद्र ही खोला जाएगा। वहीं उन क्षेत्रों में खरीद केंद्र मुख्य रूप से स्थापित किया जाएगा, जहां धान की अच्छी आवक होती है। धान की उपज बेचने के लिए ऐसे करा सकते हैं पंजीकरण इन खरीद केंद्रों पर धान की उपज बेचने के लिए किसान को अपना पंजीकरण करना जरूरी होता है। इसके बाद ही उससे धान की खरीद की जाती है। उत्तरप्रदेश राज्य में धान की खरीदी खाद्य एवं रसद विभाग के द्वारा की जाती है। किसानों को धान समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए www.fsc.up.gov.in पर पंजीकरण करवाना आवश्यक होता है। किसान इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-1800-150 पर संपर्क कर सकते है। पंजीकरण हेतु आवश्यक दस्तावेज जोतबही / खाता नंबर अंकित कम्प्यूटराइड खतौनी की कॉपी आधार कार्ड की कॉपी बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ (जिसमें खाता धारक का विवरण अंकित हो) की कॉपी किसान का एक पासपोर्ट साइज फोटो । अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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