• Home
  • News
  • Agri Business
  • चना, मूंग और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद अब 30 जून तक

चना, मूंग और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद अब 30 जून तक

चना, मूंग और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद अब 30 जून तक

24 June, 2020

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते रबी की फसल की खरीद देर से शुरू होने के कारण लिया ये निर्णय

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस साल रबी की फसल की खरीद देर से शुरू हुई। वहीं इस दौरान लगे लॉकडाउन के कारण किसानों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान संक्रमण को देखते हुए मंडी में भी कम संख्या में किसानों को बुलाया गया जिससे रबी फसल की खरीद किसानों से पूरी नहीं हो पाई। इसका परिणाम यह हुआ कि कई किसान फसल बेचने से वंचित रह गए। इसके बाद बारिश शुरू होने से किसान खरीफ की फसल की बुवाई में लग गए है। इन सब बातों के मध्यनजर मध्यप्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने निर्देशित किया है कि चने के उपार्जन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

उन्होंने कहा कि चना, मसूर, सरसों का उपार्जन 30 जून तक होना है। उन्होंने कहा कि किसान की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। मंत्री के निर्देश के बाद अब किसानों से रबी फसल- चना, मूंग व सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद अब 30 जून तक की जाएगी। इससे उन किसानों को फायदा होगा जो अब तक अपनी चना, मूंग और सरसों की फसल को किसी कारण से नहीं बेच पाए है। खरीद की तिथि बढ़ाने के पीछे सरकार का मकसद किसानों से ज्यादा से ज्यादा जिंस की खरीद कर उन्हें लाभ पहुंचाना है।

 

 

एसएमएस से दी जाएगी किसानों को सूचना

जो किसान अब अपनी चने की फसल मंडी तक  बेचने के लिए नहीं ला पाएं हैं उन्हें एसएमएस से सूचना दी जाएगी जिससे वे अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे जिससे किसानों को इस बढ़ी हुई तिथि का फायदा मिल सकेगा। इस संबंध में मंत्री पटेल ने कहा है कि ऐसे किसान, जो एसएमएस मिलने के बाद भी चना मंडी तक नहीं ले जा पाए हैं, उन्हें विभाग द्वारा पुन: एसएमएस भेजे जाएंगे। वे अपनी उपज समर्थन मूल्य पर मंडी में विक्रय कर सकेंगे। उन्होंने कहा है कि चना, मसूर, सरसों का उपार्जन 30 जून तक किया जाएगा।

 

और आगे भी बढ़ सकती है समर्थन मूल्य पर खरीद की तिथि

समर्थन मूल्य पर चना, मसूर, सरसों की खरीद की तिथि 30 जून से आगे भी बढ़ाई जा सकती है। बता दें कि चना, मसूर, सरसों की खरीदी की तिथि भारत सरकार की समर्थन मूल्य नीति के अनुसार 29 जुलाई तक होना संभावित है। इसे दृष्टिगत रखते हुए खरीफ फसलों की खरीदी जारी रखी जा सकती है।

 

किसानों को सुविधा हो इसलिए मंडी शेड के नीचे की गई है खरीद की व्यवस्था

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मंडी में चना, मसूर एवं सरसों के उपार्जन के लिए निर्देश दिए गए हैं की खरीदी का कार्य मंडी शेड में ही किया जाना सुनिश्चित किया जाए। इस निर्देश के बाद मंडी में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था मंडी शेड के नीचे की गई है जिससे किसानों को आवागमन में सुविधा रहे और किसान आसानी से मंडी में अपनी फसल बेचने के लिए आ सके।

 

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

Top Agri Business

प्याज के भाव : केंद्र सरकार राज्यों को 28 रुपए किलों की दर प्याज बेचेगी प्याज

प्याज के भाव : केंद्र सरकार राज्यों को 28 रुपए किलों की दर प्याज बेचेगी प्याज

प्याज के भावों को नियंत्रित करने को उठाया ये कदम, अब लोगों को सस्ता प्याज मुहैया कराएगी सरकार पिछले कई सप्ताह से प्याज के भावों में बढ़ोतरी हुई और हालात ये हो गए कि बड़े शहरों में इसके भाव 100 रुपए तक पहुंच गए। यही प्याज जो कभी 20 से 30 रुपए में बेचा जा रहा था, अचानक उसके भावों में तेजी दिखाई दी। भाव इस कदर बड़े की सरकार द्वारा किए गए प्रयास भी इस पर लगाम नहीं लगा पाए। अब केंद्र सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए प्याज के दामों को कम करने के लिए राज्यों को सस्ता प्याज उपलब्ध कराने का फैसला किया है ताकि लोगों को भी सस्ते में प्याज मिल सके। इसके लिए केंद्र सरकार राज्यों को 28 रुपए की दर से प्याज मुहैया कराएगी। इससे लोगों को फिर से 30-35 रुपए में प्याज मिल सकेगा। हालांकि सरकार ने प्याज के बढ़ते भावों के दौरान उसे नीचे लाने के लिए कई फैसले लिए लेकिन तमाम उपायों के बाद भी बाजार में प्याज के दाम तेजी से बढ़ते ही गए। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने खुद राज्यों को सस्ता प्याज बेचने की शुरुआत कर दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्याज के भाव बढ़ने का क्या है कारण प्याज के आसमान छूते भावों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इ दिनों दिल्ली में प्याज 80 से 100 रुपए किलो, केरल में प्याज 100 से 120 रुपए, चंडीगढ़ में 90 से 110 रुपए तथा मुंबई में 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसके भावों बढऩे को लेकर प्याज व्यापारियों का कहना है कि बारिश की वजह से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्याज की फसल खराब हुई है, जिसकी वजह से इसकी कीमतों में उछाल है। प्याज के भावों पर नियंत्रण के सरकारी प्रयास मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार प्याज के भावों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने अब राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को केंद्रीय सुरक्षित भंडार से प्याज की खेप उठाने को कहा है। उपभोक्ता मामलों की सचिव लीना नंदन ने बताया, हमने प्याज की कीमत वृद्धि पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। हमने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से खुदरा हस्तक्षेप के लिये बफर स्टॉक से प्याज लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि असम, आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु ने इसमें रुचि दिखाई है. ये राज्य बफर स्टॉक से कुल 8,000 टन प्याज ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय, अन्य राज्यों से प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। नासिक के बंफर स्टॉक से दी जाएगी प्याज उपभोक्ता मामलों की सचिव ने बताया कि केंद्र नासिक, महाराष्ट्र के बफर स्टॉक से 26-28 रुपए प्रति किलोग्राम की खरीद दर पर उन राज्यों को प्याज की पेशकश कर रहा है, जो अपने आप स्टॉक को उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों को प्याज पहुंचाए जाने (डिलीवरी भेजने) की जरुरत है, उनके लिए कीमत 30 रुपए प्रति किलोग्राम होगी। इसके अलावा, सचिव ने कहा कि सहकारी संस्था नैफेड, जो सरकार की ओर से प्याज की बफर स्टॉक के लिए खरीद और उनका रखरखाव कर रहा है, देशभर के थोक मंडियों में प्याज के स्टॉक को ला रहा है। दिल्ली में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के ये हो रहे हैं प्रयास उन्होंने कहा कि दिल्ली में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए, नाफेड राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय भंडार और मदर डेयरी के सफल बिक्री केन्द्र के माध्यम से खुदरा बिक्री के लिए बफर स्टॉक से प्याज भी दे रहा है. सरकार ने अब तक वर्ष 2019-20 की रबी फसल से की गई खरीद से बनाए गए 1,00,000 टन के बफर स्टॉक से 30,000 टन प्याज बाजार में ला चुकी है. खरीफ प्याज के मंडियों में जल्द ही पहुंचने की संभावना है और सरकार को उम्मीद है कि 37 लाख टन की अनुमानित खरीफ फसल उत्पादन के बाजार में आने के बाद बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी जिससे कीमतें कम होंगी। प्याज के आयात पर भी विचार कर रही है सरकार सरकार प्याज के आयात पर भी विचार कर रही है और 15 दिसंबर तक धुम्रशोधन व फाइटोसैनेटिक (स्वच्छता संबंधी) मानदंडों में ढील दी गई है। प्याज के आयात की खेपों को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय वाणिज्य दूतावासों को सक्रिय किया है। सरकार ने 14 सितंबर को खरीफ प्याज के बाजार में आने से पहले प्याज के कम उत्पादन वाले समय में घरेलू उपभोक्ताओं को वाजिब कीमत पर प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। बफर स्टॉक में बचा है अब 25 हजार टन प्याज मीडिया में प्रकाशित समाचार के हवाले से केन्द्र सरकार के पास बफर स्टॉक में अब केवल 25 हज़ार टन प्याज ही बचा है, जो कि नवंबर के पहले सप्ताह तक ही खत्म हो जाएगा। नेफैड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी है। वर्तमान में घरेलू उपलब्धता को बढ़ाने और प्याज की कीमतों को कम करने के लिए नेफेड प्याज के बफर स्टॉक को उतार रहा है। बीते कुछ सप्ताह में प्याज की कीमतें 75 रुपए प्रति किलो तक जा चुकी है। प्याज के बफर स्टॉक को नेफेड केंद्र सरकर की तरफ से तैयार और प्रबंधन करता है, ताकि जरूरत पडऩे पर इसे इस्तेमाल किया जा सके. इस साल नेफेड ने बफर स्टॉक के लिए 1 लाख टन प्याज की सरकरी खरीद की थी। अब प्याज के बढ़ते कीमतों पर लगाम लगाने के लिए इसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

दालों ने पकड़ी तेजी की रफ्तार, अरहर में 500 रुपए क्विंटल की तेजी

दालों ने पकड़ी तेजी की रफ्तार, अरहर में 500 रुपए क्विंटल की तेजी

अरहर, उड़द व चना दाल की कीमतों में भारी इजाफा, अभी तीन महीने बाद आएगी नई फसल कोरोना संक्रमण काल में जहां आम आदमी की आमदनी कम हुई है वहीं खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। सब्जियों के भावों में तेजी के बाद अब दालों के भावों ने भी तेजी की रफ्तार पकड़ ली है। साबुत दालों की कीमतों में आई तेजी का असर अरहर, उड़द आर चना दाल की कीमतों पर देखा जा रहा है। थोक में लेमन अरहर दाल की कीमतों में 500 रुपए की तेजी देखी गई है। दिल्ली के नया बाजार में लेमन अरहर दाल के भाव 10 हजार 400 से 10 हजार 800 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए हैं। वहीं दिल्ली में उड़द धोया की कीमतों में 300 रुपए की तेजी आई है, भाव 9600 से 9800 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए हैं। चना दाल के भाव भी तेजी के बाद 6300 से 6600 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं। मूंग धोया के भाव 8500 से 8800 रुपए और मसूर मल्का कोरी के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर बने हुए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 दाल की कीमतों में तेजी के कारण बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारी बारिश से देश के कई हिस्सों में फसल खराब हुई है। उड़द और मूंग की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कुछ हिस्सों में तुअर की फसल भी बर्बाद हुई। बारिश के कारण फसल को नुकसान और मांग में सुधार के कारण दालों की कीमतों में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है। सरकार द्वारा आयात लाइसेंस जारी नहीं करने के कारण भी घरेलू बाजार में तुअर की सप्लाई कम हुई है जिससे कीमतों को और सपोर्ट मिला है। नैफेड के तुअर ना बेचने से भी कीमतों में तेजी आई है। त्योहारी मांग से चना में लगातार तेजी, मूंग व उड़द के दाम भी बढ़े चने की दाल में भी लगातार तेजी बनी हुई है और भविष्य में त्योहारी डिमांड के चलते तेजी की संभावना है। पिछले एक महीने के दौरान चने की कीमतों में 40 फीसदी का उछाल आया है। एनसीडीईएक्स पर चना 5600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। खरीफ दलहन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढऩे से इसको सहारा मिल रहा है। नैफेड के पास चना का काफी स्टॉक है। सरकार 13.77 लाख टन दलहन और तिलहन खरीदेगी। व्यापारियों के अनुसार चार महीने बाद जब नई फसल आएगी तब ही कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। इसके साथ ही अगर मटर की दाल के इंपोर्ट पर लगा बैन हट जाता है तो चने की कीमतें नीचे आ जाएंगी। इसके अलावा मूंग और उड़द दाल भी 10 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। व्यापारियों ने की आयात कोटा जारी करने की मांग चना दाल की कीमतें पिछले साल इस अवधि में 70-80 रुपये प्रति किलो थी लेकिन इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। अरहर दाल 115 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारोबारियों की मांग है कि सरकारी एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) को सप्लाई बढ़ाने के लिए अपना स्टॉक रिलीज करना चाहिए। देश के अंदर सप्लाई में गिरावट आई है। जबकि, डिमांड लगातार बढ़ रही है। इसलिए कारोबारियों ने 2020-21 के लिए आयात कोटा जारी करने की मांग की है। इस साल बंपर पैदावार का अनुसार सरकार का मानना है कि आपूर्ति की स्थिति ठीकठाक है और अगले तीन महीने में खरीफ सीजन की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाएगी। इस साल बंपर पैदावार का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक भारत को उम्मीद है कि खरीफ सीजन में दालों का कुल उत्पादन 93 लाख टन होगा। अरहर का उत्पादन पिछले साल के 38.3 लाख टन के मुकाबले इस साल बढक़र 40 लाख टन होने की उम्मीद है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

मोती की खेती (Pearl Farming) का सीजन शुरू, कम जगह और थोड़ी सी लागत से लाखों रुपए का मुनाफा ट्रैक्टर जंक्शन में किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम आपको मोती की खेती से कमाई संबंधित सभी जानकारी देंगे। देशभर में किसान पारंपरिक खेती के अलावा अन्य विकल्पों में भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं और अपनी कमाई का जरिया बढ़ा रहे हैं। देश का किसान मोती की खेती से भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मोती की खेती के लिए सरकार की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है। साथ ही कई बैंकों की ओर से मोती की खेती के लिए आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। तो आइए जानते हैं मोती की खेती के बारे में संपूर्ण जानकारी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मोती की खेती कैसे होती है? ( pearl cultivation ) यहां पर हम आपको मोती की खेती के मौसम, आवश्यक जगह, लागत, ट्रेनिंग सेंटर व बाजार में मोतियों की बिक्री व कीमत के बारे में जानकारी दे रहे हैं। मोती की खेती के लिए मौसम मोती की खेती से कम लागत और मेहनत में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना है, इसलिए किसानों का रूझान मोती की खेती तरफ भी बढ़ा है। मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानि अक्टूबर से दिसंबर तक का महीना माना गया है। मोती की खेती के लिए जमीन या जगह मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। किसान भाई अपने खेत या घर के आसपास छोटी जगह पर मोती की खेती कर सकते हैं। मोती की खेती के लिए 500 वर्गफीट का तालाब होना चाहिए। इस तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू किया जा सकता है। मोती की खेती में लागत किसान भाई 500 वर्गफीट के तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू कर सकते हैं। बाजार में सीप की कीमत 15 से 25 रुपए प्रति नग होती है। वहीं तालाब बनाने पर करीब 15 से 20 हजार रुपए का खर्चा आता है। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट और उपकरणों पर भी 5 हजार रुपए तक का खर्चा आता है। सीप को कैसे करें तैयार मोती की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले तालाब या नदी आदि जगहों से सीपों को इकट्ठा किया जाता है। इसके अलावा सीपों को बाजार से भी खरीदा जा सकता है। सीप आप सरकारी संस्थानों से या मछुआरों से ले सकते हैं। सबसे पहले इन सीपों को खुले पानी में डाला जाता है। फिर 2 से 3 दिन बाद इन्हें निकाला जाता है। ऐसा करने से सीप के ऊपर का कवच और उसकी मांसपेशियां नरम हो जाती हैं। इनमें मामूली सर्जरी के माध्यम से उसकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद किया जाता है। इसके बाद इस छेद में से रेत का एक छोटा सा कण डाला दिया जाता है। इस तरह से सीप में रेत का कण डाला जाता है, तो सीप में चुभन होती है और सीप अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोडऩा शुरू कर देता है। इसके बाद 2 से 3 सीप को एक नायलॉन के बैग में रखकर तालाब में बांस या किसी पाईप के सहारे छोड़ा जाता है। बाद में इस सीप से 15 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाता है। अब कवच को तोडक़र मोती निकाला जाता है। भारत में मोती तैयार करने की विधि भारत में मोती तैयार करने की तीन विधियां ज्यादा प्रचलित हैं। इनमें केवीटी, गोनट और मेंटलटीसू शामिल है। केवीटी में सीप के अंदर ऑपरेशन के जरिए फारेन बॉडी डालकर मोती तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल अंगूठी और लॉकेट बनाने में होता है। चमकदार होने के कारण एक मोती की कीमत हजारों रुपए में होती है। गोनट में प्राकृतिक रूप से गोल आकार का मोती तैयार होता है। मोती चमकदार व सुंदर होता है। एक मोती की कीमत आकार व चमक के अनुसार 1 हजार से 50 हजार रुपए तक होती है। मेंटलटीस पद्धति में सीप के अंदर सीप की बॉडी का हिस्सा ही डाला जाता है। इस मोती का उपयोग खाने के पदार्थों जैसे मोती भस्म, च्यवनप्राश व टॉनिक बनाने में होता है। बाजार में इसकी सबसे ज्यादा मांग है। मोती की खेती से लाभ किसान भाई मोती की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं। एक सीप से एक मोती १५ से 20 महीने बाद तैयार होता है। वर्तमान में एक सीप का बाजार भाव करीब 20 से 30 रुपए के बीच है। बाजार में एक मिमी से लेकर 20 मिमी साइज के सीप के मोती का दाम करीब 300 रुपए से लेकर 2000 रुपए के बीच मिलता है। सीप से मोती निकालने के बाद सीप को बाजार में भी बेच जा सकता है। भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशों में मोती का निर्यात कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है। सीप की संख्या को बढ़ाकर कमाई को बढ़ाया जा सकता है। असली मोती की कीमत अगर किसान भाई चाहें तो हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई जैसे शहरों में सीधे भी अपने मोती बेच सकते हैं। इन शहरों में हजारों कारोबारी हैं, जो मोती का के व्यवसाय में लगे हुए हैं। वहीं कई बड़ी कंपनियां देशभर में अपने एजेंटों के माध्यमों से मोतियों को खरीदती हैं। आप चाहें तो इन कंपनियों से भी संपर्क में रह सकते हैं। अगर आपको इंटरनेट की समझ है तो आप ऑनलाइन भी अपने मोती बेच सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार एक असली मोती की कीमत लगभग 360 रुपये / कैरेट और 1800 रुपये प्रति ग्राम होती है। मोती की खेती की ट्रेनिंग देश में मोती की खेती के लिए कई जगह ट्रेनिंग मिलती है। मोती की खेती थोड़ा वैज्ञानिक खेती है। इसलिए इसे शुरू करने से पहले किसानों को प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इंडियर काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत एक विंग देश में बना हुआ है। इस विंग का नाम सीफा यानी सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर है। यह मोती की खेती की ट्रेनिंग देता है। इसका मुख्यालय उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में है। यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यहां पर कोई भी 15 दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है। भारत सरकार का सेंट्रल मेरिन फिसरिज रिसर्च इंस्टीच्यूट ने केरल के तिरुवनंतपुरम में व्यवसायिक रूप से मोती के उत्पादन का बड़ा केंद्र स्थापित किया है। मोती की खेती के लिए लोन मोती की खेती के लिए कई संस्थाओं व बैंकों द्वारा लोन उपलब्ध कराया जाता है। यह लोन नाबार्ड और कई बैंक से मिलता है। इस लोन पर कम ब्याज देना होता है और 15 सालों तक चुकाने के लिए समय भी मिलता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

धान की सरकारी खरीद  : केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 41,084 किसानों से की 6 लाख टन धान की खरीद

धान की सरकारी खरीद : केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 41,084 किसानों से की 6 लाख टन धान की खरीद

41,084 किसानों के जेब में पहुंचे 1,082.46 करोड़ रुपए किसानों की ओर से नए कृषि कानून के विरोध के बीच शुरू की गई धान की समर्थन मूल्य पर खरीद जोरो पर चल रही है। पिछले 8 दिनों में केद्र सरकार ने करीब 5.73 लाख टन धान की खरीद की है। इससे किसानों के जेब में करीब 1,082.46 करोड़ रुपए पहुंचे हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक केंद्र सरकार की ओर से 6 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। केंद्र के अनुसार पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों से पिछले आठ दिनों में 1,082.46 करोड़ रुपए का लगभग 5.73 लाख टन धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। सरकार ने बताया है कि 41,084 किसानों से एमएसपी पर 1,082.46 करोड़ रुपये का धान खरीदा गया है। पंजाब और हरियाणा में 26 सितंबर से धान की खरीद शुरू हुई, जबकि अन्य राज्यों में यह 28 सितंबर से शुरू हुई। खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 3 अक्टूबर तक धान की कुल खरीद 5,73,339 टन रही है। बता दें कि सरकार ने चालू वर्ष के लिए धान का एमएसपी (सामान्य ग्रेड) 1,868 रुपए प्रति क्विंटल और ए ग्रेड किस्म का धान का एमएसपी 1,888 रुपए प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने इस खरीफ सत्र (2020-21) में समर्थन मूल्य के अनुसार 495 लाख टन (49.5 मिलियन टन) धान खरीद का लक्ष्य रखा है। पिछले साल सरकार ने लगभग 420 लाख टन धान की खरीद की थी जिसको इस साल बढ़ाकर 495 लाख टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 धान की खरीद को लेकर हरियाणा में ये है व्यवस्था वैसे राज्य सरकार ने अधिकारियों ने ऐसी तैयारी की है कि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। इसके लिए हरियाणा में इस बार धान की खरीद के लिए 200 अतिरिक्त केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ राज्य में कुल 400 धान खरीद केंद्र हो जाएंगे। ये खरीद केंद्र उन 8 जिलों में बनाए जा रहे हैं जिनमें धान की पैदावार अधिक होती है। इसी के साथ हरियाणा में खरीद के लिए मेरा पोर्टल मेरा ब्योरा के तहत पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। इधर पंजाब में धान की खरीद के लिए बनाए गए खरीद केंद्रों पर किसानों की आवाजाही बनी हुई है। हालांकि पंजाब में कृषि कानून विरोध के जारी रहने से इस बार यहां की मंडियों में किसानों की आवाजाही में कमी आई है। छत्तीसगढ़ में एक नबंवर से धान की खरीद शुरू करने की मांग मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार छत्तीसगढ़ में धान की खरीद शुरू करने को लेकर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में फैसला लेते हुए 60 लाख मीट्रिक टन धान लेने का फैसला किया है। इस हिसाब से प्रदेश को 90 लाख मीट्रिक टन धान की आवश्कता पड़ेगी। हमारी मांग है कि प्रदेश सरकार भी किसानों के हित में फैसला लेते हुए अब प्रति एकड़ 15 क्विंटल के स्थान पर 20 क्विंटल धान की खरीद करें। साथ ही धान की खरीद एक नबंवर से शुरू की जानी चाहिए। बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और अभी यहां धान की खरीद को लेकर तारीख तय की जानी है। इधर सीसीआई ने खरीदी 40.80 लाख रुपए की कपास जानकारी के अनुसार कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया सीसीआई ने 40.80 लाख रुपए में एमएसपी पर 147 गांठ खरीदी है। कपास की एक गांठ 170 किलोग्राम की होती है। पिछले साल भारतीय कपास निगम यानी कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा हरियाणा के किसानों से सीधे 30 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई थी। बता दें कि इस साल खरीफ सीजन की कपास के लिए केंद्र सरकार ने 5515 और 5825 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 5515 रुपए/क्विंटल और स्टेपल कपास का एमएसपी 5825 रुपए/ क्विंटल है। पिछले साल यह मूल्य 5,150 और 5,450 रुपए था। कपास खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई हरियाणा सरकार ने इस वर्ष 2020-2021 में कपास की खरीद को और बढ़ाने का लक्ष्य निधारित किया है। कपास की खरीद के लिए पिछले साल हरियाणा में 20 कपास खरीद केंद्र थे, जिसे इस साल बढ़ाकर 40 कर दिया गया है। कपास को लेकर सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि कपास की खरीद के दौरान 12 फीसदी तक नमी के पहले से ही तय मानक का पालन किया जाएगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor