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अब चावल, गेहूं, जौ, मक्का और ज्वार से बनेगा इथेनॉल, जानें, क्या है इथेनॉल और किस काम आता है?

अब चावल, गेहूं, जौ, मक्का और ज्वार से बनेगा इथेनॉल, जानें, क्या है इथेनॉल और किस काम आता है?

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना को दी मंजूरी

अब इथेनॉल बनाने में चावल, गेहूं, जौ, मक्का और ज्वार जैसे अनाजों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हाल ही में मोदी सरकार ने अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना और विस्तार को मंजूरी दे दी है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 30 दिसंबर को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना करना और मौजूदा अनाज आधारित भट्टियों का विस्तार करने की योजना को मंजूरी दी गई है। बैठक के बारे में जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि अनाज से इथेनॉल बनने पर लगभग 175 लाख मीट्रिक टन अनाज (चावल, गेंहू, जौ, मक्का और ज्वार) का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

 

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क्या है इथेनॉल और किस काम आता है? / इथेनॉल का उपयोग

इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाडिय़ों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। इसके अलावा इसका उपयोग वार्निश, पालिश, दवाओं के घोल तथा निष्कर्ष, ईथर, क्लोरोफ़ार्म, कृत्रिम रंग, पारदर्शक साबुन, इत्र तथा फल की सुगंधों का निष्कर्ष और अन्य रासायनिक यौगिक बनाने में होता है। पीने के लिए विभिन्न मदिराओं के रूप में, घावों को धोने में जीवाणुनाशक के रूप में तथा प्रयोगशाला में घोलक के रूप में इसका उपयोग होता है। पीने को औषधियों में यह डाला जाता है और मरे हुए जीवों को संरक्षित रखने में भी इसका उपयोग होता है।

 


भारत में इथेनॉल के उत्पादन को लेकर लिए गए फैसले की मुख्य बातें

  • सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और रसायन एवं अन्य क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,400 करोड़ लीटर एल्कोहल/इथेनॉल की जरूरत होगी।
  • इसमें से 1,000 करोड़ लीटर की जरूरत 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए और 400 करोड़ लीटर की जरूरत रसायन एवं अन्य क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगी।
  • इस 1,400 करोड़ लीटर की कुल जरूरत में से 700 करोड़ लीटर की आपूर्ति चीनी उद्योग और 700 करोड़ लीटर की आपूर्ति अनाज आधारित भट्टियों को करनी होगी। इससे लगभग 175 लाख मीट्रिक टन अनाज का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • चीनी उद्योग द्वारा 700 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए करीब 60 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त चीनी भंडार की समस्या का समाधान होगा, अतिरिक्त चीनी के भंडारण की समस्या से चीनी उद्योग को निजात मिलेगी और चीनी मिलों की राजस्व वसूली बढ़ेगी। इससे वे गन्ना किसानों को उनके बकाये का समय पर भुगतान कर सकेंगी।
  • गन्ना और इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से तीन राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होता है। इन तीन राज्यों से इथेनॉल को दूरदराज के अन्य राज्यों में ले जाने पर भारी परिवहन खर्च आता है।
  • देशभर में नई अनाज आधारित भट्टियां स्थापित करने से देश के अलग-अलग भागों में इथेनॉल का वितरण संभव हो सकेगा और इससे इसके परिवहन पर आने वाला भारी खर्च भी बचाया जा सकेगा।
  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि निम्न श्रेणियों को इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की एक संशोधित योजना लाई जाए।
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना करना/मौजूदा अनाज आधारित भट्टियों का विस्तार करना, लेकिन इस योजना के लाभ केवल उन्हीं भट्टियों को मिलेंगे, जो अनाजों की सूखी पिसाई की प्रक्रिया (ड्राई मीलिंग प्रोसेस) का इस्तेमाल करेंगी।
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए गुड़ शीरा आधारित नई भट्टियों की स्थापना/मौजूदा भट्टियों का विस्तार (चाहे वे चीनी मिलों से संबद्ध हो या उनसे अलग हो) और चाहे केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शून्य तरल डिस्चार्ज (जेडएलडी) को हासिल करने के लिए स्वीकृत कोई भी अन्य तरीका कायम करना हो।
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज और शीरा दोनों का दोहरा इस्तेमाल करने वाली नयी भट्टियां स्थापित करना और पहले से संचालित भट्टियों का विस्तार करना।
  • मौजूदा गुड़ शीरा आधारित भट्टियों (चाहे चीनी मिलों से संबद्ध हो या पृथक हो) को दोहरे इस्तेमाल (गुड़ शीरा और अनाज/कोई भी अन्य खाद्यान्न) में बदलना और अनाज आधारित भट्टियों को भी दोहरे इस्तेमाल वाली भट्टियों में बदलना।
  • चुकन्दर, ज्वार और अनाज आदि जैसे अन्य खाद्यान्न से इथेनॉल निकालने के लिए नई भट्टियां स्थापित करना/मौजूदा भट्टियों का विस्तार करना।
  • मौजूदा भट्टियों में संशोधित स्प्रिट को इथेनॉल में बदलने के लिए मॉलिक्यूलर सीव डीहाईड्रेशन (एमएसडीएच) कॉलम स्थापित करना।

 

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कैसे बनता है इथेनॉल?

इथेनॉल दो विधियों से तैयार किया जाता है। इसमें पहली संश्लेषण विधि व दूसरी किण्वीकरण विधि है।

  1. संश्लेषण विधि-एथिलीन गैस को सांद्र सल्फ्य़ूरिक अम्ल में शोषित कराने से एथिल हाइड्रोजन सल्फ़ेट बनता है जो जल के साथ उबालने पर उद्धिघटित (हाइड्रोलाइज़) होकर एथिल ऐल्कोहल देता है। इस विधि का प्रचलन अभी अधिक नहीं है।
  2. किण्वीकरण विधि- इसके द्वारा किसी भी शक्करमय पदार्थ (गन्ने की शक्कर, ग्लूकोस, शोरा, महुए का फूल आदि) या स्टार्चमय पदार्थ (आलू, चावल, जौ, मकई आदि) से ऐल्कोहल व्यापारिक मात्रा में बनाते हैं।


इथेनॉल की कीमत / इथेनॉल Price

माह अक्टूबर 2020 को सरकार ने इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसके अनुसार सी हैवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत 43.75 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 45.69 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। जबकि बी हैवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत 54.27 रुपए प्रति लीटर से बढक़र 57.61 रुपए प्रति लीटर और गन्ना रस से बने इथेनॉल की कीमत 59.48 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 62.65 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

 

 

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