नाफेड की बिकवाली से मूंगफली तेल और तिलहन की कीमतों में आई गिरावट

नाफेड की बिकवाली से मूंगफली तेल और तिलहन की कीमतों में आई गिरावट

Posted On - 07 Aug 2020

तिलहन की गिरती कीमतों को लेकर किसान और व्यापारी दोनों परेशान

गुजरात के स्थानीय बाजार में मूंगफली तेल और तिलहन की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। बताया जा रहा है कि मूंगफली और तिलहन की कीमतों में गिरावट आने का मुख्य कारण गुजरात में सहकारी संस्था नाफेड द्वारा मूंगफली की  बिकवाली करने से यह गिरावट आई है। वहीं पाम ऑयल की कीमतों में नरमी का रूख देखा गया। दूसरी ओर देश में  ब्लेंडिंग की  मांग बढऩे से सोयाबीन डीगम के साथ ही सोयाबीन के अन्य तेलों की कीमतों में सुधार आया है।  

बाजार सूत्रो के अनुसार सस्ते आयातित तेलों की देश में बढ़ती मांग के आगे देशी तेल तिलहनों को बाजार में खपाना मुश्किल होता जा रहा है। वायदा कारोबार में भी इन तेलों के भाव लागत से काफी कम बोले जा रहे हैं तो ऐसे में किसान, देशी तेल तिलहन उद्योग परेशान हैं कि उनके माल कहां खपेंगे जहां किसानों के पास पहले से मूंगफली और सोयाबीन का काफी स्टॉक पड़ा है और आगामी फसल भी बंपर रहने की संभावना है। 

 

सस्ते आयातित तेल से कम हो रही है कीमतें

कुछ व्यापारियों द्वारा विदेशों से सस्ता तेल आयातित कर बाजार में तय कीमतों से कम में सस्ता बेचा जा रहा है इससे देशी तेलों के भाव में गिरावट आ रही है। इससे आयातित तेल बाजार में अपनी पैठ बना रहा है जिससे देशी तेल-तिलहन की मांग कम हो रही है और नतीजा इसके भाव गिर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि विदेशों से तेल आयात करने पर लगाम लगाए ताकि स्थानीय व्यापारियों सहित किसानों को फायदा हो सके। 

 

 

बेपरता कारोबार पर लगे लगाम

तेल उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि सोयाबीन डीगम के भाव पांच प्रतिशत बेपरता बैठ रहे हैं जबकि सीपीओ के भाव 200 रुपए क्विंटल बेपरता बैठते हैं। इसी प्रकार सूरजमुखी 400 रुपए क्विंटल और सोयाबीन डीगम 300 रुपए क्विंटल बेपरता बैठते हैं। ऐसे बेपरता कारोबार करने वालों पर नकेल नहीं कसी गई तो बैंकों के पैसे डूबने की पूरी आशंका है। बाजार सूत्रों का कहना है कि गुजरात में सहकारी संस्था नाफेड की बिकवाली से मूंगफली के भाव में हानि हुई है।

 

किसान व व्यापारी दोनों परेशान

तेल-तिलहन के भावों में गिरावट का असर किसान और व्यापारी दोनों पर देखने को मिल सकता है। भाव गिरने से किसानों को यह डर सता रहा है कि उनकी तिलहन की फसल की खपत अब वो कहां करेंगे क्योंकि विदेशों से सस्ती दर पर इसका आयात किया जा रहा है। कुछ व्यापारी विदेशों से सस्ता तेल आयत करने में लगे हुए है और सस्ता ही बाजार में बेच रहे है।

इसका परिणाम यह हो रहा है कि स्थानीय तेलों की मांग कम हो रही है जिससे किसान व व्यापारी दोनों परेशान है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को विदेशों से तेल के आयात को रोकना चाहिए ताकि स्थानीय देशी तेलों की मांग बाजार में हो जिससे किसान और व्यापारी दोनों को फायदा पहुंचे।

 

बाजार में तेल - तिलहन भाव इस प्रकार रहे

(भाव- रुपए प्रति क्विंटल) सरसों तिलहन - 4,930- 5,000 (42 फीसदी कंडीशन का भाव) रुपए, मूंगफली दाना - 4,605- 4,655 रुपए, वनस्पति घी- 965 - 1,070 रुपये प्रति टिन, मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 12,020 रुपए, मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,805- 1,855 रुपए प्रति टिन, सरसों तेल दादरी- 10,200 रुपए प्रति क्विंटल, सरसों पक्की घानी- 1,595 - 1,735 रुपए प्रति टिन, सरसों कच्ची घानी- 1,705 - 1,825 रुपए प्रति टिन, तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपए, सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,420 रुपए, सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,150 रुपए, सोयाबीन तेल डीगम- 8,320 रुपए, सीपीओ एक्स-कांडला-7,400 से 7,430 रुपए, बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,300 रुपए, पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 8,900 रुपए, पामोलीन कांडला- 8,140 रुपए, (बिना जीएसटी के). सोयाबीन तिलहन डिलिवरी भाव 3,625- 3,650 लूज में 3,360--3,425 रुपए, मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपए।

 

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