किसान उत्पादक संगठन : देश का किसान बनाएगा खुद की कंपनी, सरकार देगी 2 करोड़

किसान उत्पादक संगठन : देश का किसान बनाएगा खुद की कंपनी, सरकार देगी 2 करोड़

Posted On - 20 May 2020

जानिएं किसान उत्पादक संगठन बनाने की पूरी प्रक्रिया

ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। मोदी सरकार किसान और कृषि को आगे बढ़ाने की दिशा में नए प्रयोग कर रही है। देश के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने दिशा में केंद्र सरकार किसान उत्पादक संगठन (FPO-Farmer Producers Organisation) को प्रोत्साहित कर रही है। एफपीओ यानी किसानी उत्पादक संगठन किसानों का एक समूह होगा, जो कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां चलाएगा। किसान समूह बनाकर कंपनी एक्ट में रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। देश में 2024 तक 10 हजार एफपीओ बनाए जाएंगे। इससे 30 लाख किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा और इसमें एफपीओ को 2 करोड़ रुपए का लोन भी सरकार मिलेगा। देश के जागरूक किसान एफपीओ का लाभ उठाकर अपनी समृद्धि को बढ़ा सकते हैं तो ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से जानते हैं एफपीओ बनाने की पूरी प्रक्रिया।

 

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किसान उत्पादक संगठन योजना की शुरुआत और आवंटित बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2020 को उत्तरप्रदेश के चित्रकूट से किसान उत्पादक संगठन योजना लांच की थी। समारोह में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि किसानों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें समृद्ध बनाने का प्लान केंद्र सरकार कर रही है। इसके लिए उन्हें एक कंपनी बनानी यानी किसान उत्पादक संगठन बनाना होगा। सरकार ने 2024 तक 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठन बनाने की मंजूरी दे दी है। अब सरकार की ओर से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के लिए 6865 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 

 

 

एफपीओ बनाने के प्रक्रिया

किसान उत्पादक संगठन बनाने के लिए सबसे पहले किसानों का एक समूह बनाना होगा। इस समूह में कम से कम 11 सदस्य होने चाहिए। इसके बाद कंपनी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करना होगा। अगर किसान एफपीओ बनाना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, लघु कृषक कृषि व्यापार संघ एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं। 

 

एफपीओ से जुड़े खास बातें

  • एफपीओ लघु व सीमांत किसानों का एक समूह होगा, जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा। 
  • इसमें सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकडज़ाल से मुक्ति मिलेगी। एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन कृषि से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर सकेगा। 
  • एक समूह बनाकर किसान कंपनी एक्ट में रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। इसका रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट में ही होगा, इसलिए इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं। 
  • यह संगठन कॉपरेटिव पॉलिटिक्स से बिल्कुल अलग होंगे यानी इन कंपनियों पर कॉपरेटिव एक्ट नहीं लागू होगा।

 

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किसान उत्पादक संगठन बनाने के लिए सरकारी सहायता

  • केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के मुताबिक एफपीओ द्वारा किसान अपनी उपज को उचित दाम पर बेच पाएंगे।
  • देशभर के करीब 100 जिलों के हर ब्लॉक में कम से कम 1 एफपीओ ज़रूर बनाया जाएगा।
  • एफपीओ को सरकार द्वारा क्रेडिट गारंटी पर करीब 2 करोड़ रुपए तक का लोन भी मिल पाएगा।
  • इसके साथ ही संगठन को 15 लाख रुपए तक की इक्विटी ग्रांट भी दी जाएगी।

 

एफपीओ बनाकर सरकार से सहायता लेने की शर्तें

  • अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम कर रहा है तो कम से कम 300 किसान उससे जुड़े होने चाहिए। यानी एक बोर्ड मेंबर पर कम से कम 30 लोग सामान्य सदस्य हों। 
  • पहाड़ी क्षेत्र में एक कंपनी के साथ 100 किसानों का जुडऩा जरूरी है। उन्हें कंपनी का फायदा मिल रहा हो।
  • एफपीओ बनने के बाद 3 साल तक कंपनी का काम देखा जाएगा। इसके बाद नाबार्ड कंस्ल्टेंसी सर्विसेज रेटिंग देगी। अगर इस रेटिंग में एफपीओ पास होता है, तो मोदी सरकार द्वारा 15 लाख रुपए की इक्विटी ग्रांट का लाभ मिल पाएगा।
  • नाबार्ड कंस्ल्टेंसी सर्विसेज आपकी कंपनी का काम देखकर रेटिंग करेगी, उसके आधार पर ही ग्रांट मिलेगी।
  • बिजनेस प्लान देखा जाएगा कि कंपनी किस तरह किसानों को फायदा दे पा रही है। वो किसानों के उत्पाद का मार्केट उपलब्ध करवा पा रही है या नहीं।
  • कंपनी का गवर्नेंस कैसा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर कागजी हैं या वो काम कर रहे हैं। वो किसानों की बाजार में पहुंच आसान बनाने के लिए काम कर रहा है या नहीं।
  • अगर कोई कंपनी अपने से जुड़े किसानों की जरूरत की चीजें जैसे बीज, खाद और दवाइयों आदि की कलेक्टिव खरीद कर रही है तो उसकी रेटिंग अच्छी हो सकती है। क्योंकि ऐसा करने पर किसान को सस्ता सामान मिलेगा।

 

 

एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को मदद

किसान उत्पादक संगठन यानि एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को मदद मिलेगी। एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे, ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आजीविका तेजी से बढ़ सके। छोटे और सीमांत किसानों की संख्या देश में लगभग 86 फीसदी हैं, जिनके पास औसतन 1.1 हेक्टेयर से कम जोत है। इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को खेती के समय भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रौद्योगिकी, उच्चगुणवत्ता के बीज, उर्वरक, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याएं शामिल हैं।

 

एफपीओ का आम किसानों को फायदा

अगर अकेला किसान अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है। एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, क्योंकि यहां बिचौलिए नहीं होंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक ये 10,000 नए एफपीओ 2019-20 से लेकर 2023-24 तक बनाए जाएंगे। इससे किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ेगी। इस योजना से करीब 30 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

 

‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में एफपीओ की घोषणा

कोरोना लॉकडाउन में बिगड़ी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैकेज को ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ नाम दिया है। इस पैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपए दिया है। इसके साथ ही किसानों के लिए 11 महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की हैं। सरकार की इन घोषणाओं में किसान उत्पादक संगठन भी शामिल है।

 

किसान उत्पादक संगठन की ऑनलाइन जानकारी

किसान उत्पादक संगठन की ऑनलाइन जानकारी ऑफिशियल बेवसाइट http://sfacindia.com/FPOS.aspx पर जाकर ले सकते हैं।

 

 

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