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निर्यात में आएगी तेजी, देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

निर्यात में आएगी तेजी, देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

अब विश्व बाजार में दिखेगी भारतीय कपास की चमक

कोराना संक्रमण से जुझ रहे दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस दरम्यान अमेरिकी डालर, रुपए के मुकाबले कमजोर हुआ है। इस कारण इस समय विश्व बाजार में भारत की कपास सबसे सस्ती है। इसका भारत को कपास के निर्यात में फायदा मिलने की उम्मीद है। इस वित्तीय वर्ष कपास का निर्यात बढक़र 47 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान लगाया जा रहा है जो अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू सीजन से पांच लाख गांठ ज्यादा है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपये में 8 से 10 फीसदी की कमजोर आई है, जिस कारण विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती है। इसलिए चालू सीजन में कुल निर्यात बढक़र 47 गांठ होने का अनुमान है जबकि पहले 42 लाख गांठ के निर्यात का अनुमान लगाया था। उन्होंने बताया कि पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू सीजन में अभी तक 32.50 लाख गांठ की शिपमेंट हो चुकी है जबकि मई और जून में भी क्रमश: पांच-पांच लाख गांठ का निर्यात होने का अनुमान है।

 

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इन देशों में है भारतीय कपास अच्छी मांग

सीएआई के अनुसार इस समय भारतीय कपास का बांग्लादेश सबसे बड़ा खरीदार है। उसके बाद चीन और वियतनाम है। मई में बांग्लादेश ने करीब दो लाख गांठ और चीन और वियतनाम ने क्रमश: एक-एक लाख गांठ कपास खरीदी है। सीएआई के अनुसार, चालू सीजन में कपास का उत्पादन 330 लाख गांठ का होने का अनुमान है जबकि पहले 354.50 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। उत्पादक मंडियों में 30 अप्रैल 2020 तक 285.09 लाख गांठ की आवक हो चुकी है।

 

 

देश में इस वर्ष कहां-कहां कितना होगा उत्पादन

सीएआई के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.50 लाख गांठ, मध्य प्रदेश में 16 लाख गांठ, तेलंगाना में 51 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश में 14 लाख गांठ, कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ, तमिलनाडु में पांच और ओडिशा में चार लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 59 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान है। कपास का आयात चालू सीजन में 15 लाख गांठ होने का अनुमान है जो कि पिछले साल के 32 लाख गांठ से कम है।

 

विश्व बाजार में कीमतें उपर होने का मिलेगा लाभ

विश्व बाजार में कपास की कीमतें ऊंची है और हमारी कपास इसके मुकाबले सस्ती है। सस्ती होने के कारण हमारी कपास की मांग विश्व बाजार में पहले की अपेक्षा अधिक होगी जिसका लाभ भारत को मिलेगा। इस संबंध में नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 36,000 से 36,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी 356 किलोग्राम) है जबकि विश्व बाजार में कीमतें उपर है। उन्होंने बताया कि रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से निर्यात पड़ते के लग रहे है। हालांकि उन्होंने बताया कि घरेलू यार्न मिलों की मांग कमजोर है, जबकि उत्पादक राज्यों में कपास का बकाया स्टॉक ज्यादा है। इसलिए घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में अभी ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है।

 

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